नवंबर में आएगी भारत की पहली बांस की इलेक्ट्रिक साइकल, जानिए फीचर्स से लेकर कीमत
दी यंगिस्तान, नई दिल्ली।
भारत की पहली बांस की इलेक्ट्रिक साइकल झारखंड में नवंबर में लॉन्च होने जा रही है। यह केवल एक ई-बाइक नहीं, बल्कि पर्यावरण और स्थानीय कारीगरी को बढ़ावा देने वाला अनूठा नवाचार है।
पर्यावरण और तकनीक का संगम
झारखंड की 25वीं स्थापना वर्षगांठ के मौके पर राज्य को एक अनोखा तोहफा मिलने जा रहा है। बांस से बनी भारत की पहली इलेक्ट्रिक साइकल नवंबर में लॉन्च होगी। यह इनोवेशन न केवल आधुनिक ई-मोबिलिटी को नई दिशा देगा बल्कि बांस जैसी प्राकृतिक और टिकाऊ सामग्री को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाएगा। बांस का फ्रेम हल्का, मजबूत और कंपन सोखने वाला होता है, जो राइडिंग अनुभव को आरामदायक बनाता है।
स्थानीय जनता के लिए टेस्ट राइड
शुरुआत में इस ई-साइकल को झारखंड के लातेहार जिले के आदिवासी इलाकों में पेश किया जाएगा। यहां की जनता को पहली बार टेस्ट राइड का मौका मिलेगा। यह कदम दिखाता है कि यह प्रोजेक्ट केवल प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि आम जनता को तकनीक से जोड़ने और उनकी प्रतिक्रिया लेने का भी प्रयास है।
तकनीकी विशेषताएँ: रफ्तार, रेंज और चार्जिंग
- इस ई-बाइक की अधिकतम गति 25 किमी प्रति घंटा है।
- एक बार चार्ज करने पर यह करीब 60 किलोमीटर की दूरी तय कर सकती है।
- इसमें मॉड्यूलर बैटरी सिस्टम लगा है, जिसे आसानी से बदला या रिसाइकल किया जा सकता है।
- खास बात यह है कि इसे सौर ऊर्जा (Solar Power) से भी चार्ज किया जा सकता है, जिससे यह और भी पर्यावरण-अनुकूल हो जाती है।
ये फीचर्स इसे रोजमर्रा की सवारी के लिए सस्ती, टिकाऊ और ऊर्जा-कुशल बनाते हैं।
कीमत और सामर्थ्य
भारत की पहली बांस की इलेक्ट्रिक साइकल का DIY (Do It Yourself) मॉडल महज ₹15,000 में उपलब्ध कराया जाएगा। इतनी किफायती कीमत पर ई-बाइक मिलना बड़ी उपलब्धि है। यह न केवल शहरों के युवाओं बल्कि ग्रामीण और छोटे कस्बों के लोगों के लिए भी टिकाऊ परिवहन का विकल्प बनेगी।
स्थानीय कारीगरों का सशक्तिकरण
इस साइकल की सबसे खास बात यह है कि इसका निर्माण स्थानीय कारीगरों के हाथों से किया जाएगा। बांस की पारंपरिक कारीगरी को आधुनिक तकनीक से जोड़कर रोजगार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था और समुदाय को मजबूत करने वाला साबित होगा।
भविष्य की संभावनाएँ
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह हल्का और मजबूत बांस फ्रेम सिर्फ ई-बाइक तक सीमित नहीं रहेगा। भविष्य में इसका इस्तेमाल स्ट्रीट वेंडर्स के इलेक्ट्रिक कार्ट्स और अन्य हल्के वाहनों में भी किया जा सकता है। इससे बैटरी का आकार छोटा होगा, लागत घटेगी और रेंज बढ़ेगी। यह मॉडल शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के लिए स्थायी परिवहन का नया रास्ता खोल सकता है।
पर्यावरणीय महत्व
बांस एक तेजी से बढ़ने वाला और पुनर्नवीकरणीय संसाधन है। स्टील या एल्युमिनियम की तुलना में इसका कार्बन फुटप्रिंट बेहद कम है। बांस का प्रयोग न केवल प्रदूषण कम करेगा बल्कि हरित भारत (Green India) की दिशा में बड़ा कदम होगा।
भारत की पहली बांस की इलेक्ट्रिक साइकल केवल एक नया उत्पाद नहीं, बल्कि एक सोच है — स्थिरता, आत्मनिर्भरता और नवाचार की सोच। यह दर्शाता है कि स्थानीय संसाधन और आधुनिक तकनीक मिलकर कैसे बेहतर भविष्य का रास्ता बना सकते हैं। झारखंड से शुरू हुई यह यात्रा आने वाले वर्षों में पूरे भारत के परिवहन ढांचे को बदल सकती है।
Q&A
Q1: भारत की पहली बांस की इलेक्ट्रिक साइकल कब लॉन्च होगी?
A1: यह नवंबर 2025 में झारखंड स्थापना दिवस पर लॉन्च होगी।
Q2: इस ई-बाइक की अधिकतम गति कितनी है?
A2: इसकी अधिकतम गति 25 किलोमीटर प्रति घंटा है।
Q3: एक बार चार्ज करने पर यह कितनी दूरी तय कर सकती है?
A3: यह करीब 60 किलोमीटर तक चल सकती है।
Q4: इस साइकल की कीमत कितनी है?
A4: DIY मॉडल की कीमत ₹15,000 रखी गई है।
Q5: इसे चार्ज कैसे किया जा सकता है?
A5: यह मॉड्यूलर बैटरी और सौर ऊर्जा दोनों से चार्ज हो सकती है।
Q6: इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा लाभ क्या है?
A6: यह प्रोजेक्ट पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय कारीगरों का सशक्तिकरण और टिकाऊ परिवहन को बढ़ावा देगा।
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