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सोशल मीडिया पर भी मिर्जापुर के चौथे सीजन को लेकर खूब बातें कर रहे दर्शक
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बिग बॉस ओटीटी में आने वाले हैं कई चर्चित मेहमान
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दिल्ली में हाथी, घोड़ा और पालकी की सवारी
पुराने समय में खूबसूरत हौंदोवाले हाथी होते थे बादशाह, बेगम की सवारी
हाथी
खूबसूरत हौदोंवाले हाथी बादशाहों, राजाओं, शहजादों और नवाबों की सवारी थे। शहजादियाँ भी...
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हर साल बस थोड़ा-सा बढ़ाएं SIP की रकम, पाएं 50 लाख से ज्यादा एक्स्ट्रा रिटायरमेंट फंड – जानिए ये कमाल का फार्मूला
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इस वायसराय के शासन में बंगाल में भूख से मर गए...
1943 ई. में लार्ड वेवल वाइसराय बनकर आया, जो 1947 तक रहा। यह हिंदुस्तान का पहला फौजी वाइसराय था। इसकी यादगार में दिल्ली के...
विकासशील देशों के लिए नजीर बना योगी का विकास ‘मॉडल’
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भारत-पाकिस्तान युद्ध 1965 को विस्तार से समझिए India Pakistan War 1965...
हमलावर मिशनरी भावना से अपने मकसद में जुटे हुए थे। उन्हें उम्मीद थी कि स्थानीय जनता से भी उन्हें भरपूर सहयोग मिलेगा, जिसे वे 'आजाद' करवाने आए थे। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। कश्मीरी इन घुसपैठियों की बातों में नहीं आए और इनसे दूर ही रहे। 8 अगस्त को घुसपैठिए श्रीनगर के बाहरी इलाकों तक पहुँच गए तो राज्य सरकार के हाथ-पाँव फूल गए। उसने भारत सरकार को राज्य में मार्शल लॉ लगाने का सुझाव दिया। केन्द्र ने इस सुझाव पर अमल करते हुए सेना को पूरे कश्मीर को अपने नियंत्रण में ले लेने के लिए कहा। लेकिन सेना के कमांडरों ने केन्द्र सरकार को ऐसा कोई कदम न उठाने की सलाह दी और उसे भरोसा दिलाया कि हालात इतने खराब नहीं थे जितने राज्य सरकार दिखाने की कोशिश कर रही थी।
कौन था बहादुर शाह जफर का 15वां बेटा, जिसे वो राजा...
बहादुर शाह जफर 15वें बेटे को क्यों बनाना चाहते थे बादशाह
अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर के शासन में सैकडों शहजादे तंगहाली का जीवन...
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जिस...
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1857 की क्रांति: दिल्ली पर कब्जे के बाद अक्टूबर और नवंबर महीने में अंग्रेज सिपाही हर जगह शाही खानदान के लोगों को ढूंढ़ते रहे।...
Loksabha chunav 2024: दिल्ली की सियासी जमीन और सियासतदान
Loksabha chunav 2024:देश के दिग्गज नेताओं को भाती रही है दिल्ली
लेखक: मनोज कुमार मिश्र (वरिष्ठ पत्रकार, स्तंभकार)
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