premanand ji maharaj
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प्रेमानंद जी द्वारा बताए मार्ग पर चलने से भागना भूल जाएगा आपका दिमाग!

दी यंगिस्तान, नई दिल्ली।

आज के डिजिटल युग में जहाँ हर 5 सेकंड में हमारा ध्यान भटकता है, वहीं संत श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज (प्रेमानंद जी महाराज) ने मन को वश में करने का एक ऐसा ‘मनोवैज्ञानिक सीक्रेट’ रिवील किया है, जिसकी चर्चा अब दुनियाभर के युवाओं के बीच हो रही है। लोग अक्सर शिकायत करते हैं कि वे ध्यान लगाने की कोशिश तो करते हैं, लेकिन मन किसी बेकाबू घोड़े की तरह भागता रहता है।

महाराज जी ने इस समस्या का जो समाधान दिया है, वह पारंपरिक तरीकों से बिल्कुल अलग और ‘शॉकिंग’ है। उन्होंने कहा कि मन को रोकने की कोशिश करना ही उसे और भटकाना है। 2026 की इस भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल में, जहाँ मेंटल हेल्थ एक बड़ा मुद्दा बन चुकी है, महाराज जी का यह मन को शांत करने का उपाय एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

दस्तखत मत करो”— महाराज जी की वो तकनीक जो हैरान कर देगी

महाराज जी ने एक गहरी बात कही है: मन तब तक कुछ नहीं बिगाड़ सकता जब तक आप उस पर अपने ‘सिग्नेचर’ यानी अपनी सहमति नहीं देते। अगर मन किसी गलत विचार की ओर भाग रहा है, तो उसे रोकने के बजाय उससे एक दूरी बना लें।

“मन भाग रहा है? उसे जाने दो। उससे कहो—तू जा, मैं नहीं आ रहा। मैं तो ‘राधा-राधा’ ही बोलूँगा।”

यह तकनीक मन के अहंकार को चोट पहुँचाती है। जब आप मन के साथ जाना बंद कर देते हैं और अपनी ज़ुबान से ‘राधा नाम’ का आश्रय लेते हैं, तो वह मन थक हारकर आपके पास वापस लौटने पर मजबूर हो जाता है।

जहाँ मन भागे, वहीं मैजिकखोजें

अगर आपका मन किसी इंसान या वस्तु की तरफ भाग रहा है, तो महाराज जी ने उसे शांत करने का एक और मास्टर-स्ट्रोक बताया है। उन्होंने कहा कि उस वस्तु या व्यक्ति को बुरा समझने के बजाय, उसमें ईश्वर की छवि देखने की कोशिश करें। जैसे ही आप अपने मन के ‘टारगेट’ को भगवान से जोड़ देते हैं, आपका भटकना ही ‘भजन’ बन जाता है।

यह मन को शांत करने का उपाय इसलिए खास है क्योंकि इसमें आपको अपनी इच्छाओं को मारना नहीं पड़ता, बल्कि उन्हें एक दिव्य दिशा (Divine Direction) देनी पड़ती है।

प्रेमानंद जी महाराज का यह दर्शन हमें सिखाता है कि मन को शांत करने का उपाय बाहरी शोर को बंद करना नहीं, बल्कि आंतरिक संवाद को बदलना है। “राधा राधा” सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि मन को साधने का एक मनोवैज्ञानिक टूल है। अगर आप भी अपनी चंचलता से परेशान हैं, तो आज से ही महाराज जी के इस ‘नो सिग्नेचर’ रूल को अपनाकर देखें। परिणाम आपको हैरान कर देंगे।

Q&A Section

Q1. महाराज जी के अनुसार मन को रोकना क्यों मुश्किल है?

A-क्योंकि मन पुराने संस्कारों के वशीभूत है। इसे जबरदस्ती रोकने के बजाय नाम जाप के नए संस्कार देने पड़ते हैं।

Q2. ‘राधा-राधानाम में ऐसी क्या शक्ति है?

A-महाराज जी कहते हैं कि यह नाम एक ऐसी फ्रीक्वेंसी पैदा करता है जो चंचल मन को तुरंत ‘सरेंडर’ करने पर मजबूर कर देती है।

Q3. क्या काम करते हुए भी मन शांत रह सकता है?

A-बिल्कुल! महाराज जी का सुझाव है कि शरीर काम में रहे और जीभ नाम जाप में, तो मन कभी अशांत नहीं होगा।

Q4. जब मन बहुत ज़्यादा परेशान हो तो पहला कदम क्या उठाएं?

A-सबसे पहले गहरी सांस लें और अपनी स्वीकृति मन से हटा लें। मन से कहें कि तू मेरा मालिक नहीं है।

Q5. क्या इस तरीके से फोकस (Focus) बढ़ता है?

A-हाँ, जब मन की फालतू ऊर्जा ‘नाम’ में लग जाती है, तो एकाग्रता अपने आप बढ़ने लगती है।

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