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भयंकर ठंड और जहरीली हवा का दोहरा वार: दिल्ली में हेल्थ इमरजेंसी जैसे हालात

दी यंगिस्तान, नई दिल्ली।

दिल्ली-NCR में कड़ाके की ठंड (Cold Wave) और दमघोंटू प्रदूषण (Air Pollution) ने मिलकर एक ऐसा चक्रव्यूह रच दिया है, जो स्वस्थ लोगों को भी बीमार बना रहा है। दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में अस्पताल की ओपीडी और इमरजेंसी में हृदय रोग और सांस की बीमारियों वाले मरीजों की संख्या में 30-40% का उछाल आया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल मौसम का बदलाव नहीं, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य संकट है।

दिल्ली का AQI (Air Quality Index) लगातार ‘गंभीर’ श्रेणी में बना हुआ है। जब इस जहरीली हवा के साथ बर्फीली हवाएं मिलती हैं, तो यह सीधे हमारे फेफड़ों और दिल पर हमला करती हैं। AIIMS के कार्डियोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. राजीव नारंग के अनुसार, इस मौसम में न केवल पुराने मरीज परेशान हैं, बल्कि नए केस भी तेजी से रिपोर्ट हो रहे हैं।

ठंड में क्यों बढ़ जाता है हार्ट अटैक का खतरा?

सर्दियों के दौरान हमारे शरीर की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव आता है। डॉ. राजीव नारंग ने बताया कि जब बाहर का तापमान गिरता है, तो शरीर का तापमान बनाए रखने के लिए हमारी रक्त वाहिकाएं (Blood Vessels) सिकुड़ जाती हैं। इस प्रक्रिया को ‘वैसोकन्स्ट्रिक्शन’ कहते हैं।

जब नसें सिकुड़ती हैं, तो हृदय को रक्त पंप करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिससे ब्लड प्रेशर (BP) अचानक बढ़ जाता है। डॉ. नारंग के अनुसार, “सर्दियों में नमक का अधिक सेवन और कम पानी पीना आग में घी का काम करता है।” जिन लोगों का बीपी पहले कंट्रोल में था, उनका भी रीडिंग अब 140/90 mmHg से ऊपर जा रहा है, जो सीधे तौर पर हार्ट अटैक के जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है।

सांस की नली का सिकुड़ना: ब्रोंकोस्पैजम का खतरा

सिर्फ दिल ही नहीं, आपके फेफड़े भी खतरे में हैं। AIIMS में मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. संजीव सिन्हा ने एक चौंकाने वाली जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ठंडी हवा के संपर्क में आने से ब्रोंकोस्पैजम (Bronchospasm) हो सकता है। यह वह स्थिति है जिसमें नाक से ठंडी हवा अंदर जाते ही सांस की नली संकरी हो जाती है या पूरी तरह बंद हो जाती है।

सीओपीडी (COPD) और अस्थमा के मरीजों के लिए यह जानलेवा साबित हो सकता है। डॉ. सिन्हा ने कहा कि “क्रोनिक ब्रोंकाइटिस और एम्फीसेमा से जूझ रहे मरीजों को इस समय सबसे ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि प्रदूषण के कण फेफड़ों की गहराई तक जाकर सूजन पैदा कर रहे हैं।”

बुजुर्गों और बच्चों के लिए सेफ जोनक्या है?

जेरियाट्रिक मेडिसिन विभाग के डॉ. अभिजीत आर. राव ने बुजुर्गों (Senior Citizens) को सुबह की सैर से पूरी तरह बचने की सलाह दी है। उन्होंने सुझाव दिया कि बुजुर्गों को अपनी दिनचर्या सुबह 11 बजे के बाद, धूप निकलने पर ही शुरू करनी चाहिए। वहीं, बाल रोग विशेषज्ञ प्रो. राकेश लोढ़ा ने कहा कि छोटे बच्चे ठंड के प्रति बेहद संवेदनशील होते हैं। उन्हें कई परतों में गर्म कपड़े पहनाना और प्रदूषण से बचाना अनिवार्य है।

Cold Wave and Air Pollution in Delhi का यह दौर अभी कुछ और हफ्तों तक जारी रहने की उम्मीद है। विशेषज्ञों की राय स्पष्ट है: इस समय ‘वीरता’ दिखाने के बजाय ‘सावधानी’ दिखाना बेहतर है। घर के अंदर रहें, नियमित बीपी चेक करें और हाइड्रेटेड रहें। दिल्ली की यह जहरीली और बर्फीली हवा आपके शरीर के सिस्टम को बिगाड़ सकती है, इसलिए मास्क पहनें और धुंध वाले समय में बाहर न निकलें। स्वस्थ रहें, क्योंकि बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है।

Q&A Section

प्रश्न 1: सर्दियों में बीपी अचानक क्यों बढ़ जाता है?

उत्तर: ठंड के कारण रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं, जिससे हृदय पर दबाव बढ़ता है और ब्लड प्रेशर हाई हो जाता है।

प्रश्न 2: दिल्ली के प्रदूषण में एक्सरसाइज करने का सबसे अच्छा समय क्या है?

उत्तर: जब AQI हाई हो, तो सुबह या देर शाम बाहर न निकलें। सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच जब धूप हो, तभी बाहर जाना सुरक्षित है।

प्रश्न 3: क्या प्रदूषण से निमोनिया भी हो सकता है?

उत्तर: हाँ, ज्यादा ठंड और प्रदूषण के कारण इम्यूनिटी कम हो जाती है, जिससे फेफड़ों में संक्रमण और निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है।

प्रश्न 4: हार्ट पेशेंट्स को ठंड में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

उत्तर: नमक कम खाएं, पानी पर्याप्त पिएं और अपना ब्लड प्रेशर हफ्ते में कम से कम दो बार जरूर चेक करें।

प्रश्न 5: बच्चों को प्रदूषण से बचाने के लिए क्या करें?

उत्तर: बच्चों को घर के अंदर रखें, उन्हें गर्म तरल पदार्थ दें और बाहर जाते समय मास्क का प्रयोग सुनिश्चित करें।

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