स्वामी शैलेन्द्र सरस्वती
स्वामी शैलेन्द्र सरस्वती

क्या आपका मन ही आपको बीमार कर रहा है? शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का गहरा राज!

दी यंगिस्तान, नई दिल्ली।

स्वामी शैलेन्द्र सरस्वती: आज 2026 में तकनीक और चिकित्सा विज्ञान ने अभूतपूर्व प्रगति कर ली है। हमने पिछले 60 वर्षों में संक्रमण और विटामिन की कमी से होने वाली लगभग 25 बड़ी बीमारियों को जड़ से खत्म कर दिया है। लेकिन एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आ रहा है—अस्पताल बढ़ रहे हैं, दवाइयां बेहतर हो रही हैं, फिर भी बीमारियां कम नहीं हो रही। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के बीच का संतुलन बिगड़ चुका है। स्वामी शैलेन्द्र सरस्वती बताते हैं कि आज की अधिकांश बीमारियां शरीर से नहीं, बल्कि हमारे मन, हमारी धारणाओं और हमारे ‘स्व-सम्मोहन’ (Self-hypnosis) से पैदा हो रही हैं। यह केवल एक विचार नहीं, बल्कि एक ऐसा ‘पेंडेमिक’ है जो डिप्रेशन, एंग्जायटी और अनिद्रा के रूप में पूरी दुनिया को जकड़ चुका है।

बीमारियों का नया विज्ञान: मेडिसिन बनाम मेडिटेशन

ओशो के प्रसिद्ध प्रवचन ‘मेडिसिन और मेडिटेशन’ का संदर्भ देते हुए स्वामी शैलेन्द्र सरस्वती समझाते हैं कि इन दोनों शब्दों का मूल अर्थ ‘हीलिंग’ या चिकित्सा है। अंतर केवल इतना है कि मेडिसिन बाहर से हीलिंग करती है और मेडिटेशन भीतर से।

आज के दौर में 50% बीमारियां ऐसी हैं जिन्हें केवल गोलियों से ठीक नहीं किया जा सकता। यदि किसी को विटामिन की कमी है, तो दवा काम करेगी। लेकिन यदि किसी को चिंता (Anxiety) की वजह से एसिडिटी या पेप्टिक अल्सर है, तो दुनिया की कोई भी एंटासिड उसे स्थाई आराम नहीं दे सकती। जब तक ‘चिंता’ का मानसिक उपचार नहीं होगा, शरीर का घाव भरता रहेगा और फिर से उभरता रहेगा।

एक्टोडर्म का रहस्य: त्वचा और मस्तिष्क का गहरा नाता

विज्ञान कहता है कि जब गर्भ में भ्रूण का विकास होता है, तो ‘एक्टोडर्म’ नाम की कोशिका परत से ही मस्तिष्क (Brain) बनता है और उसी से त्वचा (Skin) भी। यही कारण है कि मानसिक तनाव का सीधा असर हमारी स्किन पर दिखता है। सोरायसिस या क्रोनिक इचिंग जैसी कई त्वचा संबंधी बीमारियां वास्तव में ‘मानसिक’ होती हैं। स्वामी जी एक स्किन स्पेशलिस्ट का उदाहरण देते हैं जो मजाकिया लहजे में कहते हैं कि उनका मरीज कभी मरता नहीं और कभी ठीक नहीं होता, क्योंकि इलाज केवल बाहर से हो रहा है, जबकि जड़ भीतर मन में छिपी है।

कैंसर और मौत पर मन की जीत: अनीता मुरजानी का उदाहरण

अनीता मुरजानी की प्रसिद्ध घटना का जिक्र है, जिन्हें अंतिम चरण का कैंसर था। अपनी ‘नियर डेथ एक्सपीरियंस’ (NDE) में उन्हें अहसास हुआ कि उनका कैंसर किसी बाहरी वायरस से नहीं, बल्कि उनके ‘डर’ से पैदा हुआ था। जैसे ही उन्होंने अपने मन से उस डर को निकाला, मात्र 15 दिनों में उनका शरीर पूरी तरह कैंसर मुक्त हो गया। यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के अटूट संबंध का सबसे बड़ा प्रमाण है।

अटेंशन सीकर और हिस्टीरिया: जब मन रचता है नाटक

कभी-कभी हमारा अवचेतन मन बीमार होने का नाटक करता है ताकि हमें अपनों का ध्यान (Attention) मिल सके। इसे चिकित्सा विज्ञान में ‘हिस्टीरिया’ कहा जाता है। इसमें मरीज को असली दौरे जैसे लक्षण महसूस होते हैं, लेकिन शारीरिक रूप से वह स्वस्थ होता है। बच्चों में स्कूल न जाने के डर से पेट दर्द होना या अंधापन महसूस होना इसी श्रेणी में आता है। यहाँ दवा की नहीं, बल्कि मनस्थिति बदलने की जरूरत होती है।

संकल्प और लंबी उम्र का राज

अंततः, हमारा जीवन हमारी मान्यताओं का प्रतिबिंब है। जॉर्ज बर्नार्ड शॉ का उदाहरण हमें सिखाता है कि अगर हम खुद को 60 साल में बूढ़ा मान लेंगे, तो शरीर जवाब दे देगा। लेकिन अगर मन जवान है और संकल्प शक्ति मजबूत है, तो 80 की उम्र में भी पर्वतारोहण संभव है। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए हमें अपने भीतर झांकना होगा। हमें केवल औषधियों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी विल पावर और ध्यान (Meditation) को जीवन का हिस्सा बनाना होगा। स्वस्थ रहने का एकमात्र तरीका है—भीतर से हीलिंग।

Q&A Section

प्रश्न 1: साइकोसोमैटिक (Psychosomatic) बीमारी क्या होती है?

उत्तर: यह ऐसी बीमारी है जो मन के तनाव, डर या गलत धारणाओं से शुरू होती है और शरीर पर शारीरिक लक्षणों (जैसे अल्सर, बीपी, हार्ट बीटिंग) के रूप में प्रकट होती है।

प्रश्न 2: क्या ध्यान (Meditation) से कैंसर जैसी बीमारियां ठीक हो सकती हैं?

उत्तर: स्वामी जी और अनीता मुरजानी के उदाहरणों के अनुसार, यदि बीमारी का मूल कारण मानसिक डर है, तो सकारात्मक सोच और ध्यान से शरीर की रिकवरी में चमत्कारिक मदद मिल सकती है।

प्रश्न 3: त्वचा की बीमारियां मानसिक तनाव से कैसे जुड़ी हैं?

उत्तर: भ्रूण विज्ञान के अनुसार, मस्तिष्क और त्वचा दोनों ‘एक्टोडर्म’ से बनते हैं। इसलिए मानसिक उथल-पुथल का सीधा प्रभाव त्वचा की कोशिकाओं पर पड़ता है।

प्रश्न 4: डिप्रेशन को पेंडेमिकक्यों कहा गया है?

उत्तर: क्योंकि आज डिप्रेशन और एंग्जायटी किसी वायरस की तरह पूरी दुनिया में फैल चुके हैं, जिसका इलाज केवल बाहरी दवाओं से संभव नहीं है।

प्रश्न 5: हिस्टीरिया और मिर्गी के दौरे में क्या अंतर है?

उत्तर: मिर्गी एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है जिसमें मरीज को चोट लग सकती है। हिस्टीरिया एक मानसिक स्थिति है जहाँ व्यक्ति अवचेतन रूप से ध्यान आकर्षित करने के लिए बीमार होने का अनुभव करता है।

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