Delhi SIR 2026
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Delhi SIR 2026: मतदाता सूची में गड़बड़झाला‘? कांग्रेस का बड़ा वार, चुनाव आयोग से पूछे तीखे सवाल!

दी यंगिस्तान, नई दिल्ली।

Delhi SIR 2026: दिल्ली की सियासत में एक बार फिर ‘वोटर लिस्ट’ को लेकर घमासान शुरू हो गया है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी (DPCC) के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने दिल्ली में चल रही दिल्ली मतदाता सूची पुनरीक्षण 2026 यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव आयोग अपनी वैधानिक जिम्मेदारियों का बोझ राजनीतिक दलों के कंधों पर डाल रहा है।

इस हाई-वोल्टेज विवाद की शुरुआत तब हुई जब यह बात सामने आई कि मतदाताओं के डेटा वेरिफिकेशन की जिम्मेदारी बूथ लेवल एजेंट (BLA) को सौंपी जा रही है। देवेंद्र यादव के निर्देश पर राजेश गर्ग ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को एक पत्र लिखकर स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं आई, तो यह निष्पक्ष चुनाव के सिद्धांतों के खिलाफ होगा। यूथ वोटर्स और राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा तेज है कि क्या चुनाव आयोग वाकई अपनी जवाबदेही से पीछे हट रहा है?

SIR प्रक्रिया में क्या है पेंच? बीएलए (BLA) पर बढ़ा दबाव

कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग ने बैठकों में बताया कि परिगणना फॉर्म (Enumeration Form) का वितरण तो सरकारी बीएलओ (BLO) करेंगे, लेकिन उन्हें भरकर वापस लाने और सत्यापित करने का जिम्मा राजनीतिक दलों के बीएलए (BLA) पर होगा।

मुख्य आपत्ति के बिंदु:

  1. कानूनी वैधता: मतदाताओं की जानकारी का सत्यापन करना BLO, AERO और ERO की सरकारी जिम्मेदारी है। इसे प्राइवेट या राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर नहीं डाला जा सकता।
  2. अंडरटेकिंग का दबाव: बीएलए से यह अंडरटेकिंग मांगी जा रही है कि वे डेटा की शुद्धता के लिए जिम्मेदार हैं।
  3. भविष्य के विवाद: यदि कल को लिस्ट में कोई गलती निकलती है, तो चुनाव आयोग इसका ठीकरा बीएलए पर फोड़ सकता है।

कांग्रेस का कहना है कि यह कदम “प्रशासनिक शॉर्टकट” जैसा लग रहा है, जो लोकतांत्रिक ढांचे के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

2002 का मास्टर रोल और मैपिंग का सिरदर्द

एक और बड़ा मुद्दा जो दिल्ली मतदाता सूची पुनरीक्षण 2026 को पेचीदा बना रहा है, वह है 2002 की मतदाता सूची को आधार (Master Roll) बनाना। कांग्रेस ने तर्क दिया है कि 2002 के बाद दिल्ली में बड़े पैमाने पर ‘परिसीमन’ (Delimitation) हुआ है। विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं बदल चुकी हैं।

ऐसे में बिना प्रॉपर ‘मैपिंग’ (पुराने क्षेत्र बनाम नए क्षेत्र) के नामों का मिलान करना नामुमकिन है। कांग्रेस ने मांग की है कि आयोग प्रिंटेड और सॉफ्ट कॉपी के रूप में मैपिंग डेटा उपलब्ध कराए ताकि डेटा एंट्री में कोई धांधली न हो सके।

फोटोयुक्त मतदाता सूची और पारदर्शिता की मांग

कांग्रेस की बूथ मैनेजमेंट कमेटी के चेयरमैन राजेश गर्ग ने पत्र में एक और महत्वपूर्ण मांग रखी है। उन्होंने कहा है कि जब वर्तमान फोटो वाली मतदाता सूची को ‘फ्रीज’ किया जाए, तो उसकी मुद्रित फोटोयुक्त प्रतियां राजनीतिक दलों को तुरंत मिलनी चाहिए।

ऐसा क्यों जरूरी है?

  • फर्जी वोटिंग पर लगाम: फोटो मिलान से डुप्लीकेट वोटर्स की पहचान आसान होती है।
  • युवा मतदाताओं का भरोसा: डिजिटल दौर में अगर डेटा पारदर्शी नहीं है, तो सिस्टम पर सवाल उठना लाजमी है।
  • सटीक सत्यापन: बिना फोटो वाली लिस्ट से वेरिफिकेशन प्रक्रिया अधूरी और संदिग्ध रहती है।

दिल्ली कांग्रेस का स्टैंड – निष्पक्षता से समझौता नहीं

देवेंद्र यादव ने साफ कर दिया है कि दिल्ली मतदाता सूची पुनरीक्षण 2026 केवल एक प्रशासनिक कवायद नहीं है, बल्कि यह दिल्ली के भविष्य का आधार है। कांग्रेस का मानना है कि चुनाव आयोग को अपनी वैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए खुद वेरिफिकेशन सुनिश्चित करना चाहिए, न कि राजनीतिक दलों को ‘जांच अधिकारी’ बनाना चाहिए।

कुल मिलाकर, दिल्ली मतदाता सूची पुनरीक्षण 2026 की राह इतनी आसान नहीं दिख रही। कांग्रेस के इन कड़े सवालों ने चुनाव आयोग को रक्षात्मक मुद्रा में ला खड़ा किया है। लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदाता सूची का शुद्ध होना अनिवार्य है, लेकिन क्या इसके लिए राजनीतिक दलों को जवाबदेह बनाना सही है? देवेंद्र यादव की यह मांग कि “मैपिंग डेटा साझा किया जाए” और “सत्यापन की जिम्मेदारी सरकारी तंत्र ही उठाए”, दिल्ली की चुनावी पारदर्शिता के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है। अब देखना यह है कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी इन मांगों पर क्या एक्शन लेते हैं।

Q&A Section

Q1. दिल्ली में SIR प्रक्रिया क्या है?

A-उत्तर: SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन, जिसके तहत घर-घर जाकर मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया जाता है ताकि फर्जी नाम हटाए जा सकें और नए वोटर्स जोड़े जा सकें।

Q2. मतदाता सूची सत्यापन के लिए कौन जिम्मेदार है?

उत्तर: कानूनी रूप से इसके लिए चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त BLO, AERO और ERO जिम्मेदार होते हैं।

Q3. कांग्रेस 2002 की मतदाता सूची का विरोध क्यों कर रही है?

उत्तर: विरोध 2002 की सूची से नहीं, बल्कि बिना मैपिंग के उसे आधार बनाने से है, क्योंकि परिसीमन के बाद विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं बदल चुकी हैं।

Q4. BLA और BLO में क्या अंतर है?

उत्तर: BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) एक सरकारी कर्मचारी होता है, जबकि BLA (बूथ लेवल एजेंट) राजनीतिक दल द्वारा नियुक्त प्रतिनिधि होता है।

Q5. क्या मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए फोटो अनिवार्य है?

उत्तर: हाँ, पारदर्शिता और सही पहचान सुनिश्चित करने के लिए फोटोयुक्त मतदाता सूची अब मानक प्रक्रिया है।

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