तेलंगाना के बीरधर वीर शेट्टी की सफलता की कहानी
दी यंगिस्तान, नई दिल्ली।
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किसान के बेटे की सफलता की कहानी
Business Idea: तेलंगाना के गंगापुर गांव के रहने वाले बीरधर वीर शेट्टी की कहानी कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। एक साधारण किसान के बेटे से लेकर करोड़पति बनने तक का उनका सफर वाकई प्रेरणादायक है। आइए, जानते हैं कि कैसे उन्होंने मिलेट (बाजरा) की खेती को अपना जुनून बनाया और इसे एक सफल व्यवसाय में बदल दिया।
कैसे शुरू किया सिर्फ 20 हजार से बिजनेस?
पढ़ाई कम, लेकिन सपने बड़े
बीरधर वीर शेट्टी का जन्म एक किसान परिवार में हुआ था। उनकी पढ़ाई सिर्फ नौवीं कक्षा तक ही हो पाई क्योंकि उनके गांव के आसपास कोई स्कूल नहीं था। पढ़ाई छोड़ने के बाद उन्होंने ट्रक हेल्पर का काम शुरू किया और बाद में ट्रक ड्राइवर बन गए। उस समय उनके पास 11 एकड़ जमीन थी, लेकिन वह हमेशा कुछ अलग करने का सपना देखते थे।
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जीवन का टर्निंग पॉइंट
2006 में बीरधर ICRISAT (इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर द सेमी-एरिड ट्रॉपिक्स) में ड्राइवर और जनरल असिस्टेंट के रूप में काम करने लगे। यहां उन्हें कृषि वैज्ञानिकों के साथ काम करने का मौका मिला और उन्होंने किसानों की जिंदगी बेहतर बनाने के लिए नई कृषि तकनीकों के बारे में सीखा। 2009 में महाराष्ट्र के बीड जिले की एक यात्रा ने उनकी जिंदगी बदल दी। वहां उन्होंने गरीबी और खाद्य समस्याओं को करीब से देखा और मिलेट की खेती करने का फैसला किया।
20,000 रुपये से शुरू किया सफर
2009 में बीरधर ने सिर्फ 20,000 रुपये के निवेश से हैदराबाद में अपनी पहली बाजरा रोटी की दुकान खोली। उनकी बाजरे की रोटियां लोगों को बहुत पसंद आईं और धीरे-धीरे उनका व्यवसाय बढ़ने लगा। उन्होंने ICRISAT से मिले ज्ञान का इस्तेमाल करके स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के लिए बाजरा आधारित उत्पाद बनाने शुरू किए।
1 करोड़ रुपये का कारोबार
आज बीरधर वीर शेट्टी के पास कई सफल उद्यम हैं, जिनमें भवानी फूड्स, एसएस एग्रो फूड्स और स्वावलंबन एग्री फाउंडेशन शामिल हैं। ये कंपनियां भारत के आठ राज्यों में फैली हुई हैं और 40 से ज्यादा लोगों को रोजगार देती हैं। उनके पास मिलेट प्रोसेसिंग यूनिट, मल्टी-पल्स यूनिट, बायोमास पेलेट यूनिट और एक वॉटर प्लांट है। इन सभी का कुल टर्नओवर 1 करोड़ रुपये से ज्यादा है।
किसानों की मदद के लिए समर्पित
2016 में बीरधर ने स्वावलंबन एग्री फाउंडेशन की स्थापना की। यह संस्था किसानों को बाजरा की खेती और उसके मूल्य संवर्धन के लिए प्रशिक्षित करती है। उन्होंने हजारों किसानों को प्रशिक्षण दिया है, जिससे उनकी आय में काफी बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा, उन्होंने महिलाओं और किसानों के लिए स्वयं सहायता समूह भी बनाए हैं, जो उन्हें अपने उत्पादों को संसाधित करने और बेचने में मदद करते हैं।
मिलोविट ब्रांड के तहत बाजरा उत्पाद
बीरधर की कंपनियां मिलोविट ब्रांड के तहत बाजरा आधारित कई उत्पाद बनाती हैं, जैसे रोटी, मल्टीग्रेन लड्डू, बिस्कुट और स्नैक्स। ये उत्पाद दिल्ली, हैदराबाद, वारंगल, महबूबनगर और सदाशिवपेठ में पांच आउटलेट्स के जरिए बेचे जाते हैं। उनके उत्पादों की खास बात यह है कि इनमें वैल्यू एडिशन होता है, जिससे किसानों को अधिक मुनाफा होता है और उन्हें बड़े बाजारों तक पहुंचने में मदद मिलती है।
पुरस्कार और सम्मान
बीरधर वीर शेट्टी को मिलेट की खेती और किसानों की मदद के लिए कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। उनकी मेहनत और लगन ने न सिर्फ उनकी जिंदगी बदली, बल्कि हजारों किसानों की जिंदगी में भी सुधार लाया है।
सीख: किसान भी बन सकते हैं करोड़पति
बीरधर वीर शेट्टी की कहानी हमें सिखाती है कि अगर हम मेहनत करें और अपने सपनों पर विश्वास रखें, तो कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। उन्होंने साबित किया कि शिक्षा और संसाधनों की कमी भी आपके सपनों को रोक नहीं सकती, अगर आपमें जुनून और लगन हो।
क्या आप भी खेती से बिजनेस करना चाहते हैं?
अगर आप भी मिलेट बिजनेस या किसी एग्री स्टार्टअप की योजना बना रहे हैं, तो हमें कमेंट में बताएं! यह कहानी आपको प्रेरित कर सकती है!
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