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मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार का भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा कदम

दी यंगिस्तान, नई दिल्ली।

साल 2025 के आखिरी दिन दिल्ली सरकार के लोक निर्माण विभाग (PWD) ने एक बहुत बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। लेटेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली PWD ने अपने पुराने और जटिल कानूनी विवादों को सुलझाने के लिए अब केंद्र सरकार के Delhi PWD Arbitrators (मध्यस्थों) के पैनल का इस्तेमाल करने का फैसला किया है। यह कदम तब उठाया गया है जब विभाग के कई प्रोजेक्ट्स सालों से आर्बिट्रेशन (मध्यस्थता) के चक्कर में फंसे हुए थे, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हो रहा था। इस ‘मेजर अपडेट’ का सीधा असर उन ठेकेदारों पर पड़ेगा जो कानूनी खामियों का फायदा उठाकर दावों को खींचते थे।

भ्रष्टाचार और लेटलतीफी पर लगाम

जानकारी के अनुसार, PWD मंत्री ने विभाग को निर्देश दिया है कि वे पिछले 20 सालों के उन सभी मामलों का गहन ऑडिट करें, जिनमें 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि शामिल है। अक्सर देखा गया है कि लोकल लेवल पर नियुक्त मध्यस्थों के फैसले विभाग के पक्ष में नहीं रहते थे। अब केंद्र (CPWD) के अनुभवी विशेषज्ञों के आने से प्रक्रिया में Legal Transparency आएगी।

एक और बड़ा बदलाव यह है कि विभाग ने भविष्य के सभी टेंडरों से आर्बिट्रेशन क्लॉज (Clause 25) को ही हटा दिया है। यानी अब नए प्रोजेक्ट्स में कोई भी विवाद होने पर मामला सीधे कोर्ट जाएगा, ‘पर्दे के पीछे’ की मध्यस्थता खत्म होगी। लेकिन जो पुराने केस पहले से चल रहे हैं, उन्हें निपटाने के लिए अब केंद्र के अधिकारियों की निष्पक्षता का सहारा लिया जाएगा। इसके लिए एक सख्त SOP (Standard Operating Procedure) भी लागू की गई है, जिससे अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।

Delhi PWD Arbitrators के जरिए केंद्र की मदद लेना दिल्ली सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को दर्शाता है। यह फैसला न केवल दिल्ली के टैक्सपेयर्स का पैसा बचाएगा, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने में भी मदद करेगा। साल के अंत में लिया गया यह फैसला 2025 में दिल्ली की सड़कों और बिल्डिंग प्रोजेक्ट्स के लिए एक नई और पारदर्शी शुरुआत साबित होगा।

Q&A Section

Q-क्या पुराने मामलों के लिए नए नियम लागू होंगे?
A- हाँ, पुराने लंबित मामलों को सुलझाने के लिए अब केंद्र के पैनल से मध्यस्थ लिए जाएंगे।

Q-20 साल के ऑडिट का क्या मतलब है?
A-विभाग यह चेक करेगा कि पिछले 2 दशकों में किन मामलों में अधिकारियों की लापरवाही से सरकार को वित्तीय चोट लगी।

Q-क्या नए ठेकेदारों को आर्बिट्रेशन का मौका मिलेगा?

A-नहीं, नए टेंडर्स में विवाद होने पर अब सीधे हाई कोर्ट या संबंधित अदालत जाना होगा।

Q-इस बदलाव की मुख्य वजह क्या है?

A-भ्रष्टाचार को खत्म करना और सार्वजनिक धन (Public Funds) की बर्बादी रोकना।

Q-SOP क्या है?

A-यह एक गाइडलाइन है जिसके तहत अगर PWD केस हारता है, तो जिम्मेदार अधिकारी की जांच की जाएगी।

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