पर्यावरण संरक्षण की अलख जगा रहे भोलू, सोशल मीडिया पर हुए वायरल
दी यंगिस्तान, नई दिल्ली।
business Idea: क्या आपने कभी सोचा है कि घर के कबाड़, जिसे आमतौर पर हम कचरे की तरह फेंक देते हैं, उससे लाखों की कमाई की जा सकती है? ये बात सुनने में शायद थोड़ी अजीब लगे, लेकिन दिल्ली के ध्यान चंद स्टेडियम में आयोजित आदि महोत्सव में एक शख्स ने यही साबित कर दिया है।
उड़ीसा से आए भोलू बत्रा ने घर सजाने के लिए ऐसे डेकोरेटिव आइटम तैयार किए हैं, जो वेस्ट मटेरियल और रद्दी से बनते हैं। और यह रद्दी सिर्फ बेकार सामान नहीं, बल्कि सुंदर और आकर्षक डेकोरेटिव आइटम्स में बदल जाते हैं, जिन्हें देख कर कोई भी हैरान हो जाएगा।
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कैसे हुआ यह सब?
भोलू बत्रा ने यह अनोखा काम पर्यावरण को बचाने के उद्देश्य से शुरू किया था। उनके मुताबिक, लोग अक्सर अपने घरों से रद्दी या वेस्ट मटेरियल जैसे पुराने कागज, प्लास्टिक, बॉटल्स और अन्य सामान को फेंक देते हैं, जो न सिर्फ पर्यावरण के लिए नुकसानदायक होते हैं, बल्कि बेकार भी होते हैं।
भोलू ने इन चीजों को इको-फ्रेंडली और एंटीक लुक वाले डेकोरेटिव आइटम्स में बदल दिया।
डेकोरेटिव आइटम्स की खासियत
भोलू के बनाए गए डेकोरेटिव आइटम्स कागज, कांच और अन्य वेस्ट मटेरियल से तैयार होते हैं। इनमें पेन स्टैंड, फूलदान, बुद्ध की मूर्ति, कांच के फ्रेम, और अनगिनत डिज़ाइनों में मूर्तियां शामिल हैं। ये आइटम्स देखने में पुराने ज़माने के एंटीक पीस जैसे लगते हैं और घर की सजावट के लिए परफेक्ट होते हैं।
इनकी एक और खासियत यह है कि ये जल्दी नहीं टूटते। सामान्य शोपीस और सजावटी आइटम्स जो आसानी से गिरने पर टूट जाते हैं, भोलू के आइटम्स गिरने के बाद भी सुरक्षित रहते हैं, क्योंकि ये इको-फ्रेंडली और मजबूत होते हैं।
रोजगार का अवसर
भोलू बत्रा ने सिर्फ खुद को नहीं, बल्कि अपनी आर्ट और क्रिएटिविटी के जरिए कई महिलाओं को रोजगार देने का काम भी किया है। वर्तमान में उनके साथ 25 से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हैं, जो इन डेकोरेटिव आइटम्स को बनाने का काम करती हैं।
इस तरह उन्होंने न केवल पर्यावरण के लिए एक सकारात्मक कदम उठाया, बल्कि अपने आसपास के समुदाय को भी रोजगार प्रदान किया।
कितनी हैं कीमत
भोलू के बनाए गए डेकोरेटिव आइटम्स की कीमत 200 रुपए से शुरू होती है और 4000 रुपए तक जा सकती है। ये आइटम्स हर घर में खूबसूरती बढ़ाने का काम करते हैं और साथ ही घर के वातावरण को इको-फ्रेंडली बनाते हैं।
भोलू बत्रा का यह प्रयास न केवल समाज और पर्यावरण के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह साबित करता है कि अगर किसी के पास हुनर और इरादा हो, तो वह कबाड़ से भी अपना और दूसरों का भविष्य संवार सकता है। उनकी यह प्रेरणादायक कहानी न केवल डेकोरेटिव आइटम्स के शौकिनों के लिए है, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए है, जो रचनात्मकता और प्रयास के साथ कुछ नया करना चाहता है।
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