शिक्षा में रामत्व

प्रगति मैदान में चल रहे विश्व पुस्तक मेला world book fair में भारतीय शिक्षण मण्डल, दिल्ली प्रान्त के प्रकाशन विभाग द्वारा ‘शिक्षा में रामत्व’ विषयक परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री युवराज मलिक जी विशिष्ट अतिथि थे। भारतीय शिक्षण मण्डल दिल्ली प्रान्त के अध्यक्ष श्री अजय सिंह जी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।

विश्व पुस्तक मेला world book fair में शिक्षा में रामत्व

वक्ता के रूप में प्रो. रचना विमल जी ( सत्यवती कालेज, दिल्ली विश्विद्यालय) तथा डॉ. ऋषि मोहन भटनागर जी, उपाध्यक्ष भारतीय शिक्षण मंडल दिल्ली प्रांत उपस्थित थे। प्रो. प्रकाश चंद कांडपाल जी ने कार्यक्रम की भूमिका रखी। डॉ. सुशील तिवारी जी ने परिचर्चा का संचालन किया।
सभी गणमान्य वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि यदि शिक्षा को अपनी सार्थकता सिद्ध करनी है तो उसके भीतर रामत्व का समावेश अनिवार्य है। श्रीराम के जीवन से संदेश और प्रेरणा लेकर हम विभिन्न चुनौतियों से पार पा सकते हैं। शिक्षा अपना वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा कर पाएगी जब वह जन-जन को ‘सा विद्या या विमुक्तये’ का संस्कार देगी। त्रेतायुग में भारत ज्ञान और विज्ञान दोनों ही स्तरों में समृद्ध था। हमें इस अपनी इस ज्ञान परंपरा से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में भारतीय शिक्षण मण्डल के अनेक पदाधिकारियों के साथ विशाल मात्रा में लोगों की उपस्थित रही। परिचर्चा के उपरांत भारतीय शिक्षण मण्डल के कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष मिलिंद सुधाकर मराठे जी से आत्मीय भेंट की। शिक्षा में सुधार के संबंध में भारतीय शिक्षण मंडल द्वारा किए जा रहे कार्यों से उन्हें अवगत कराया और उनका मार्गदर्शन प्राप्त किया।

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