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क्या आपका मन भी आपको नचा रहा है?

दी यंगिस्तान, नई दिल्ली।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम शारीरिक रूप से चाहे कहीं भी हों, मानसिक रूप से हमेशा ‘विचारों के भंवर’ में फंसे रहते हैं। कभी पुराने दुखों का बोझ तो कभी भविष्य की चिंता—यही मन के बंधन हैं। स्वामी शैलेंद्र सरस्वती ने हाल ही में एक गहरा और प्रैक्टिकल नजरिया साझा किया है कि कैसे हम इस ‘मंकी माइंड’ (बंदर जैसा मन) की पहेली को सुलझा सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि हम समस्याओं को इसलिए नहीं सुलझा पाते क्योंकि हम उनमें डूबे रहते हैं। यदि हम थोड़ा ऊपर उठकर ‘विहंगम दृष्टि’ (पैनोरमिक व्यू) अपनाएं, तो वही समस्याएं बौनी नजर आने लगती हैं। जैसे अंतरिक्ष से देखने पर पृथ्वी की सीमाएं गायब हो जाती हैं, वैसे ही चेतना के ऊंचे धरातल पर मन के बंधन टूट जाते हैं। आइये जानते हैं वे 3 अचूक उपाय जो आपको विचारों के पार ले जा सकते हैं।

स्वामी शैलेंद्र सरस्वती के 3 क्रांतिकारी सूत्र

1. उच्चतर चेतना और सजगता (The Path of Awareness)

स्वामी जी के अनुसार, मन के अतिक्रमण का पहला तरीका है अपनी सजगता (Awareness) को बढ़ाना। जब आप अपने विचारों के प्रति पूरी तरह सजग हो जाते हैं, तो एक ‘निर्विचार स्थिति’ पैदा होती है।

  • कैसे काम करता है: जैसे ही विचार थमते हैं, मन स्वतः गायब हो जाता है।
  • उदाहरण: जैसे लहरों के शोर से बचने के लिए हेलीकॉप्टर से ऊपर उड़ जाना। जब आप ऊंचे उठते हैं, तो लहरों का प्रभाव खत्म हो जाता है।

2. हृदय की भावनाओं में डुबकी (The Path of Emotion)

यदि आप बहुत तार्किक (Logical) हैं और विचार पीछा नहीं छोड़ रहे, तो ‘भाव जगत’ में उतरें। प्रेम, करुणा और भक्ति ऐसी भावनाएं हैं जहाँ तर्क का कोई स्थान नहीं होता।

  • गहरी डुबकी: जैसे सागर की सतह पर तूफान हो, लेकिन गहराई में शांति होती है। अपनी भावनाओं की गहराई में उतरकर आप मन के शोर से बच सकते हैं।

3. इंद्रियों की संवेदनशीलता (Sensory Sensitivity)

यह विज्ञान भैरव तंत्र पर आधारित एक अत्यंत प्राचीन और सरल विधि है। अपनी पांचों इंद्रियों को इतना संवेदनशील बना लें कि विचार के लिए जगह ही न बचे।

  • प्रैक्टिकल प्रयोग: जब आप भोजन करें, तो केवल स्वाद में खो जाएं। जब फूल सूंघें, तो पूरी तरह महक बन जाएं। जब आप इंद्रियों के अनुभव में 100% मौजूद होते हैं, तो मन का हस्तक्षेप बंद हो जाता है।

हम बंधन में क्यों हैं? ‘खंभे को पकड़नेकी पहेली

स्वामी जी एक बहुत ही रोचक कहानी बताते हैं। एक व्यक्ति चिल्ला रहा था कि “खंभे ने मुझे पकड़ लिया है, मुझे बचाओ!” जबकि असलियत में उसने खुद खंभे को पकड़ रखा था। हमारे दुख, क्रोध और ईर्ष्या भी ऐसे ही हैं। हम कहते हैं कि “मुझे बहुत गुस्सा आता है,” जबकि सच यह है कि हम गुस्से को पकड़ कर बैठे हैं।

भारत के संदर्भ में महत्व: भारतीय दर्शन हमेशा से ‘साक्षी भाव’ (Witnessing) की बात करता है। स्वामी शैलेंद्र सरस्वती यही याद दिला रहे हैं कि आप किसी बंधन में नहीं हैं; आपकी ‘नासमझी’ ही आपका एकमात्र बंधन है।

जागने का समय यही है

निष्कर्ष यह है कि मन के सारे उलझाव हमारी अपनी पकड़ के कारण हैं। चाहे आप रेगिस्तान में रहें, बर्फ के घर में या किसी दुख भरी मनोभूमि में—वहां से हटने का निर्णय केवल आपका है। स्वामी शैलेंद्र सरस्वती के ये तीन उपाय—चेतना, भाव और इंद्रिय बोध—एक ऐसा कॉम्बो हैं जो किसी भी व्यक्ति को मानसिक गुलामी से आजाद कर सकते हैं। याद रखें, आप अद्वितीय (Unique) हैं, आपकी तुलना किसी से नहीं हो सकती। जैसे ही आप यह समझेंगे, मन का मालिक आप होंगे, मन आपका मालिक नहीं।

Q&A: मन और विचारों से जुड़े प्रमुख सवाल

Q1. क्या बिना ध्यान (Meditation) किए मन को शांत किया जा सकता है?

A-हाँ, स्वामी जी के अनुसार इंद्रियों की संवेदनशीलता बढ़ाकर (जैसे संगीत सुनना या स्वाद लेना) भी विचारों को थमाया जा सकता है।

Q2. मन के बंधन से तुरंत मुक्ति कैसे पाएं?

A-यह समझकर कि बंधन वास्तविक नहीं हैं। जैसे ही आप ‘पकड़’ छोड़ते हैं, आप मुक्त हो जाते हैं।

Q3. ‘मंकी माइंडको कैसे नियंत्रित करें?

A-विचारों से लड़ने के बजाय उनसे थोड़ी दूरी बनाएं और ‘विहंगम दृष्टि’ से उन्हें देखें।

Q4. क्या भावनाएं मन से अलग हैं?

A-हाँ, हृदय का तल मन के तार्किक तल से बहुत गहरा और शांत होता है।

Q5. स्वामी शैलेंद्र सरस्वती के अनुसार जीवन की सबसे बड़ी भूल क्या है?

A-दूसरों से तुलना करना और अपनी नकारात्मक स्थितियों को खुद पकड़ कर रखना।

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