लग्जरी कारों के शौकीनों के लिए बड़ी खुशखबरी!
दी यंगिस्तान, नई दिल्ली।
भारत के लग्जरी कार मार्केट के लिए एक बहुत बड़ा अपडेट सामने आया है। लंबे समय से अटका हुआ India–EU FTA (भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता) अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार, भारत और यूरोपीय संघ के बीच इस डील पर सहमति लगभग बन चुकी है, जिससे विदेशी लग्जरी कारों की कीमतों में भारी गिरावट आने की उम्मीद है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की भारत यात्रा के दौरान इस समझौते को आधिकारिक रूप से सील किया जा सकता है। यह खबर न केवल ऑटोमोबाइल प्रेमियों के लिए बल्कि पूरे भारतीय बाजार के लिए एक गेम-चेंजर साबित होने वाली है, क्योंकि इससे प्रीमियम यूरोपीय ब्रांड्स की पहुंच मध्यम और उच्च-मध्यम वर्ग तक आसान हो जाएगी।
इंपोर्ट ड्यूटी में ऐतिहासिक कटौती की तैयारी
वर्तमान में भारत में पूरी तरह से निर्मित (CBU) कारों पर भारी भरकम इंपोर्ट ड्यूटी लगाई जाती है। यह ड्यूटी वर्तमान में 70% से लेकर 110% तक है, जिससे विदेशी कारों की कीमत भारत में लगभग दोगुनी हो जाती है। लेकिन India-EU FTA के तहत, इस पीक ड्यूटी को शुरुआती तौर पर घटाकर 40% करने का प्रस्ताव है।
शुरुआती चरण में, यह रियायत सालाना लगभग 2 लाख कारों तक सीमित हो सकती है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह ड्यूटी कटौती मुख्य रूप से उन कारों पर लागू होगी जिनकी कीमत 15,000 यूरो (लगभग 16.3 लाख रुपये) से अधिक है। इसका मतलब है कि Mercedes-Benz, BMW, और Audi जैसे ब्रांड्स की एंट्री-लेवल से लेकर हाई-एंड लग्जरी कारें भारतीय बाजार में काफी किफायती हो जाएंगी।
किसे मिलेगा फायदा और किसे करना होगा इंतज़ार?
इस डील का सीधा फायदा उन ग्राहकों को मिलेगा जो यूरोपीय देशों से इंपोर्ट की गई गाड़ियों को खरीदना चाहते हैं। हालांकि, यहाँ एक छोटा सा पेंच भी है। भारत सरकार ने अपने घरेलू इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) मैन्युफैक्चरर्स और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को सुरक्षित रखने के लिए इलेक्ट्रिक कारों को फिलहाल इस कम ड्यूटी स्ट्रक्चर से बाहर रखा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कम से कम अगले 5 वर्षों तक इलेक्ट्रिक व्हीकल्स पर यह रियायत नहीं मिलेगी। सरकार चाहती है कि विदेशी कंपनियां भारत में ही अपनी ईवी यूनिट्स स्थापित करें, न कि सिर्फ उन्हें असेंबल करके बेचें। यह कदम भविष्य की मोबिलिटी को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, ताकि भारत वैश्विक ईवी हब बन सके।
भारतीय अर्थव्यवस्था और ऑटो मार्केट पर प्रभाव
India-EU FTA केवल कारों के बारे में नहीं है, बल्कि यह भारत के ग्लोबल ट्रेड प्रोफाइल को भी मजबूती प्रदान करेगा। लग्जरी कारों की कीमतें कम होने से बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिसका सीधा लाभ उपभोक्ताओं को बेहतर फीचर्स और कॉम्पिटिटिव प्राइसिंग के रूप में मिलेगा। इसके अलावा, यूरोपीय कंपनियों के लिए भारत एक आकर्षक मार्केट बन जाएगा, जिससे भविष्य में निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। पीएम मोदी और उर्सुला वॉन डेर लेयेन के बीच होने वाली यह शिखर वार्ता भारत के आर्थिक हितों के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है।
कुल मिलाकर, India-EU FTA का फाइनल होना लग्जरी सेगमेंट के लिए एक ‘फ्रेश रिपोर्ट’ की तरह है जो बाजार में नई जान फूंक देगा। हालांकि ईवी खरीदारों को थोड़ा और इंतज़ार करना होगा, लेकिन पेट्रोल और डीजल इंजन वाले प्रीमियम मॉडल्स के दाम जल्द ही काफी नीचे आने वाले हैं। यह समझौता न केवल भारत और यूरोप के संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, बल्कि भारतीय सड़कों पर अब और भी अधिक प्रीमियम कारें देखने को मिलेंगी।
Q&A Section
Q-India-EU FTA के बाद लग्जरी कारें कितनी सस्ती होंगी?
A-इंपोर्ट ड्यूटी 70-110% से घटकर 40% तक आने की उम्मीद है, जिससे कारों की ऑन-रोड कीमत में लाखों की कमी आ सकती है।
Q-क्या इस डील से इलेक्ट्रिक कारें भी सस्ती होंगी?
A-नहीं, घरेलू निवेश को बचाने के लिए कम से कम शुरुआती 5 सालों तक ईवी पर पुरानी ड्यूटी ही लागू रहेगी।
Q-यह नियम किस कीमत वाली कारों पर लागू होगा?
A-यह रियायत मुख्य रूप से 15,000 यूरो (लगभग 16.3 लाख रुपये) से अधिक की CBU यूनिट्स पर लागू होने की संभावना है।
Q-कौन से ब्रांड्स को सबसे अधिक फायदा होगा?
A-यूरोपीय ब्रांड जैसे Mercedes-Benz, BMW, Audi, Volkswagen और Porsche को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
Q-यह समझौता कब तक लागू हो सकता है?
A-शिखर सम्मेलन के दौरान औपचारिक हस्ताक्षर के बाद, अगले कुछ महीनों में इसके प्रावधान लागू किए जा सकते हैं।
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