शालीमार बाग (1653 ई.)

यह बाग मौजा आजादपुर और बादली की सराय से आगे जाकर करनाल रोड पर बाएं हाथ पड़ता है। इसे शाहजहां ने 1653 ई. में बनवाया था।

कश्मीर जाते वक्त उसका पहला मुकाम इसी बाग में हुआ था। इसी बाग में औरंगजेब की ताजपोशी का जश्न हुआ था। 1857 के गदर में इसे तबाह कर दिया गया। 1803 ई. के बाद दिल्ली का रेजीडेंट गर्मी के दिनों में इस बाग में रहा करता था।

बाग के अंदर अब भी कश्मीर के शालीमार बाग के नमूने का एक अंदाजा देखने में आता है। अब यह वीरानगी की हालत में पड़ा हुआ है। लोगों को इस बात का पता ही नहीं है कि दिल्ली में भी कभी शालीमार बाग था। इसका रकवा 1075 बोधे का था। 1857 के गदर के बाद इसे नीलाम कर दिया गया था। इसकी मौजूदा हालत एक जंगल जैसी है गो दिल्ली के तरह-तरह के फलदार वृक्ष इसमें लगे हुए हैं- आम, अमरूद, जामुन, कमरख, फालसे आदि। पुराने जमाने की नहरें और फव्वारे सब टूट-फूट गए हैं। सिर्फ एक बारहदरी बाकी है, जो ईंट और लाल पत्थर की बनी हुई है। वह भी आज खस्ता हालत में है।

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