मकबरा जैबुन्निसा बेगम (1702 ई.)

जैबुन्निसा औरंगजेब की बड़ी लड़की थी। इसकी मृत्यु 1702 ई. में हुई। इसका मकबरा औरंगजेब के जमाने में दिल्ली शहर के काबुली दरवाजे के बाहर, जहां तीस हजारी का मैदान है, बनाया गया था, मगर रेल की सड़क निकालने से वह मिसमार कर दिया गया। यह आलमगीर की पहलौंठी की बेटी थी। इसकी मां का नाम नवाब दिलरस बानो बेगम था।

इसके जन्म पर शाही तरीके से जश्न मनाया गया। बेशुमार जवाहरात लुटाए गए। मुद्दत तक गरीबों को इनाम तकसीम किए गए। इसने बड़े होकर फारसी और अरबी में काफी महारत हासिल कर ली थी। वह अरबी के शेर कहा करती थी। फिर वह फारसी की तरफ झुक गई। दीवाने मखफी इसकी यादगार है।

यह बहुत सादा मिजाज थी और बड़ी मिलनसार थी। औरंगजेब अपनी विद्वान बेटी को बहुत चाहता था। इसने शादी नहीं की। जब इसकी मृत्यु हुई तो बाप की आंखों में आंसू निकल ही आए। जैबुन्निसा से जुडी एक कहानी बहुत ही प्रचलित है। कहते हैं कि इन्हें इश्क हो गया था। औरंगजेब को जब इसका पता चला तो उसने सलीमगढ किले में जैबुन्निसा को कैद करा दिया। यहां 20 साल तक जैबुन्निसा कैद में रही। इस दौरान वो शेर ओ शायरी लिखती थी, और यहीं दम तोडा।

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