delhi jal board
delhi jal board

27 साल बाद दिल्ली की सत्ता पर काबिज हुई बीजेपी से उम्मीदें ज्यादा

दिल्ली जल बोर्ड में करप्शन… अब नाले का का रूप ले चुका है, जिसकी बज़बज़ाहट और बदबू अभी पहले से ज़्यादा दुर्गंध दे रही है। दिल्ली जलबोर्ड, साफ पीने का साफ पानी भले ही मुहैया न करा पाये, लेकिन करप्शन के गटर का जल लोगों के घरों और उनके ज़ेहन में सप्लाई जरूर कराता रहेगा। लगभग 7 महीने से दिल्ली में बीजेपी की सरकार है। वो लगातार दिल्ली में विकास करने का दावा कर रही है। पिछली सरकारों के काले-कारनामों को उजागर कर रही है। लेकिन जलबोर्ड रुपी यमुना में फैले करप्शन रूपी ‘कालिया’ का कालमर्दन करने में अभी नाकाम साबित हो रही है।

AAP’ का पाप बीजेपी के गले की फांस!

दिल्ली में इसबार 27 साल बाद बीजेपी की वापसी हुई है। उसने नाकों चने चबाकर 48 सीटें जीतकर सत्ता का स्वाद चखा है। मई 2025 में 100 दिन का रिपोर्ट कार्ड देकर धूमधाम से जश्न भी मनाया गया, लेकिन सच्चाई ये है कि जीती हुई 48 सीट पर 48 विकास के काम नहीं दिखाई पड़ते। संतरी और मंत्री दोनों सड़क से गायब हैं। धांधली और लूट अनवरत जारी है। पिछली सरकारों की तरह अभी भी हर विभागों में करप्शन, लूट और बेईमानी भरी पड़ी है, जिसे नाथने की इच्छाशक्ति सरकार के किसी मंत्री में दिखाई नहीं पड़ती।

BJP “GOOD GOVERNANCE” की बात करती है। जनता बीजेपी के सुशासन के एजेंडे को देख रही है। दिल्ली में खूब विकास हो रहा है… रिपोर्ट्स पर रिपोर्ट्स बन रहीं हैं, लेकिन करप्शन है की जाने का नाम ही नहीं ले रहा है। हाय रे… विकास! और हाय रे… ससुरा करप्शन! सच मानिए। जनता की शिकायतें अछूतों जैसी कचरे के डिब्बे में पड़ी हैं, जिन्हें कोई नेता और अधिकारी छुना नहीं चाहता है। आप शिकायतों पर शिकायतें करते जाइए, 2-3 महीने बाद उल्टी सीधी रिपोर्टं लग जाएगी। आपकी समस्या का समाधान हो या न हो, पर कागजों में शिकायतों का समाधान हो जाएगा। अधिकारियों को यह बात बख़ूबी मालूम है, कोई बार-बार शिकायतें नहीं करता…एक-दो बार ही तो करता है… और कायदे से फटकार मिल गई, तो फिर वो अपनी किस्मत और सरकार को कोस कर चुप बैठ जाता है। ऐसी धारणा के पीछे मेरी भी एक गहरी पीड़ा है, जिसे मैं पिछले कई महीनों से ज़ी रहा हूं। जल बोर्ड में लगातार अपनी शिकायत को लेकर लगातार गुहार लगा रहा हूं और विभाग में बैठे नुमाइंदों को बता भी रहा हूं कि समझ जाइए जनाब!… बीजेपी की सरकार है…!!!

नवंबर 2024 जलबोर्ड की लापरवाही का मामला

मेरा नाम विधु शेखर उपाध्याय है और मैं दिल्ली के जीवन नगर का निवासी हूं। मुझे दिल्ली में रहते हुए लगभग 15 साल हो गए हैं। नवंबर 2024 में मुझे 8590/ रुपये का भारी भरकम बिल पकड़ा दिया गया था। पूछताछ की तो पता चला कि यह बिल मीटर रीडर की गलत रीडिंग के चलते बना था। मीटर में क्रास रीडिंग आ रही थी। उसने 623 की जगह 723 नोट कर बिल जनरेट कर दिया। इस बिल को लेकर 1916 पर कई बार शिकायत की। जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, फिर मैंने PGMS पर 17 फरवरी 2025 को लिखित शिकायत दर्ज करायीGrevience NO. (DEL/20252178955)

3 महीने बाद “30 मई 2025 को ZRO लाजपत नगर,  ममता कुंद्रा ने रिपोर्ट सौंपी, जिसमें कहा गया ‘Case is under process with MR. It will be Updated soon.’ 

4 जुलाई 2025 को उसी मामले को लेकर मैंने फिर से शिकायत की। इस बार मैंने सीधे CM से कंप्लेन की, लेकिन  बदमाशी की इंतहां देखिए। 16/07/2025 को ZRO ममता कुंद्रा ने 10 दिन के भीतर ही नई भ्रामक और गुमराह करने वाली रिपोर्ट लगाकर देकर, फिर से मामले से पल्ला झाड़ लिया। इस बार रिपोर्ट में कहा गया‘Previous bill was on reading basis The consumer is written there was a faulty meter. The MI will visit’ और शिकायत क्लोज कर दी गई।

मैंने इस नई रिपोर्ट पर 25/07/25 को फिर से आपत्ति जाहिर की। और पूरे सबूत को पोर्टल पर लोड किया एक-एक चीज बकायदा एक्सप्लेन की, लेकिन नतीज़ा वही ढाक के तीन पात। इस बार 28/07/2025 को 3 दिन के भीतर ही 3 लाइन की रिपोर्ट लगाकर केस क्लोज कर दिया गया। ZRO साहिबा ममता कुंद्रा ने इस बार लिखा The site will be visited by ZRO Mamata Kundra. पर मज़े की बात यह है कि आज तक साइट पर कोई गया ही नहीं। न MI ना ही ZRO और ना ही Meter Reader.

  इसी बीच 18 जुलाई 2025 मैं खुद जल बोर्ड भी गया। एक हैंड रिटेन कंप्लेन रिसीव कराकर आया। ZRO को गलत मीटर रीडिंग से जुड़े सबूत भी दिखाए। वो फोन पर बिजी थीं। उन्होंने मुझे MI रणधीर झा से मिलने की सलाह दी। लेकिन वहां पर भी ना कोई सुनवाई होनी थी और न हुई। न्याय की आस लगाए आज भी मेरी वह शिकायत सरकारी कोने में पड़ी कहीं सिसक रही है।

कुछ सवाल जो ZRO से पूछे जाने चाहिए?

1. ZRO कह रही है कि रीडिंग सही है और बिल उसी के आधार पर बना है। लेकिन मीटर में क्रास रीडिंग आ रही है फिर क्रांस रीडिंग का बिल कैसे बना दिया? (दिसंबर 2024 ….मई 2025 और जुलाई 2025 की रीडिंग की फोटो है उससे वैरिफाई की जाए)

2. 10 जून 2024 के बाद सीधे 28 नवंबर 2024 में रीडिंग ली जाती है क्यूं? इस बीच रीडर क्या कर रहा था? (नवंबर और फरवरी के बिल से इसे वैरिफाई किया जा सकता है।)

3. रीडिंग 503 से जंप करके सीधे 723 नोट की जाती है। बीच वाली 600 की सिरीज़ पूरी तरह से गायब है?

4. अगर सबकुछ ठीक है फिर 5 महीने से मेरा पानी का बिल क्यों नहीं आ रहा है? मेरे मीटर की रीडिंग क्यों नहीं ली जा रही है? इस बीच अगर दोबारा कई महीनों का भारी-भरकम बिल मुझे फिर से थमा दिया गया, तो इसकी भरपाई कौन करेगा? 

5. पिछले कई सालों से पानी का बिल जीरो आ रहा है, फिर अचानक नवंबर 220 यूनिट कैसे दर्ज कर ली गई? (सबूत के तौर पर पिछले एक साल का बिल का चेक किया जाए)

6. अगर नवंबर 2024 में ही 723 यूनिट रीडिंग थी… फिर मई 2025 में 701 यूनिट और जुलाई में 720 यूनिट कैसे हो सकती है। (मेरे फोन से ली गई मीटर इमेज से इसकी पुष्टि की जा सकती है।) 

7. बार-बार मीटर बदलने की शिकायत पर अब तक कार्रवाई क्यूं नहीं हुई

8. ZRO साहिबा ने अधिकारियों से झूठ क्यूं बोला कि वो साइट विजिट करेंगी? और अब तक MI और ZRO ने साइट विजिट क्यूं नहीं किया?

9. आला अधिकारियों को गुमराह करने पर ZRO और MI का 15 दिन वेतन क्यूं नहीं काटा जाना चाहिए। उन्हें काम से एक हफ्ते के लिए सस्पेंड क्यूं नहीं किया जाना चाहिए?

“Justice delayed is Justice denied” मामूली सा दिखने वाला मामला अगर समय से नहीं सुलझाया गया तो वो बड़ा अपराध बनकर सामने आता है। यह भी कुछ ऐसा ही है। दिखने में ये मामला मामूली सा दिखता है। लेकिन दिनोंदिन अब ये बड़ा बनता जा रहा है। ऐसे न जाने कितने छोटे मामलों से दिल्ली की जनता जूझ रही है। वो समस्या का समाधान चाहती है। पिछली सरकार से बेहतर कामकाज और प्रबंधन चाहती है। लेकिन सरकार में बैठे नौकरशाह सुनने को तैयार नहीं है। फिर सुशासन का सपना कैसे साकार होगा? ऐसे मामले सरकार के प्रबंधन और उसकी कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हैं। अभी वक्त है सरकार को जवाबदेही तय करनी होगी। बेलगाम अधिकारियों पर नकेल कसनी होगी। उनके भीतर कार्रवाई का भय पैदा करना होगा। सही मायने में तभी दिल्ली मुस्कुराएगी।

(नोट- यह लेखक के निजी विचार है।)

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here