जिस जमाने में यह इमारत अपनी असली हालत में थी तो इसकी लंबाई 550 फुट और चौड़ाई 300 फुट थी। इसकी चारदीवारी के अंदर एक सिलसिला मकानों और दालानों का था, जिनकी बाबत बर्नियर ने लिखा है कि वह महल इंग्लिस्तान के शाही महल से मिलता-जुलता था। केवल इतना अंतर है कि यह दोमंजिला नहीं है और दालान अलहदा-अलहदा है।

इस महल के कमरे बहुत खुले हुए और चौड़े थे, जिनकी कुर्सी साढ़े तीन फुट थी। इन स्थानों में वे दरबारी और उमरा रहते थे, जिनकी बैठक होती थी। ईद वगैरह बड़े त्योहार पर ये स्थान बड़ी शान के साथ सजाए जाते थे। खंभों पर किमखाब और दरों में रेशमी और मखमली पर्दे लगाए जाते थे। फर्श बढ़िया से बढ़िया कालीनों से सजाया जाता था।

1857 ई. के बाद इस महल के अहाते के तमाम मकान और दीवारें गिराकर जमीन के बराबर कर दिए गए। अब उनका कोई नामो-निशान बाकी नहीं है। अब यहां दीवाने आम का बड़ा भारी दालान अकेला खड़ा है, यह वास्तव में पूर्वी दीवार से मिले हुए सहन का मध्य है। इस दालान के सीधी तरफ एक फाटक था, जिसमें से एक दूसरे सहन में जा निकलते थे। इसके बाएं हाथ वलीअहद के महलात थे, जिन्हें गिराकर सपाट मैदान कर दिया गया है।

दीवाने आम के महल की भी हालत खराब हुए बिना न रही। इसका सोने का काम जगह-जगह से खुरच डाला गया और पच्चीकारी के काम में जो कीमती पत्थर और नगीने जड़े हुए थे, वे भी निकाल लिए गए, मगर जो बचा है वह भी देखने योग्य है। यह तमाम इमारत लाल पत्थर की बनी हुई है। चबूतरा चार फुट ऊंचा है और दालान अस्सी फुट लंबा और चालीस फुट चौड़ा है। बुर्जियों की ऊंचाई छोड़कर छत की ऊंचाई तीस फुट है। यह दालान तीन तरफ से खुला हुआ है। केवल एक ओर दीवार है। छत सपाट है, जिसके तीन ओर चौड़ा छज्जा है।

दालान के अंदर सात-सात दरों की तीन कतारें हैं। हर एक दर में चार-चार खंभे छह-छह फुट के अंतर पर हैं, जिन पर बंगड़ेदार महराबें पछील की दीवार से शुरू होकर इमारत तक हैं। दालान के आगे बरामदे में बड़े-बड़े दस खंभे हैं, जिनकी महराबें इसी प्रकार की हैं। दालान के तीन ओर सीढ़ियां हैं- पांच सामने की ओर और सात-सात इधर-उधर।

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