पंडित अनिंदो चटर्जी (Pandit Anindo Chatterjee) दुनिया के एक महान तबला वादक हैं। पूरी दुनिया में इनका कोई सानी नहीं हैं। इन्होंने केवल 5 वर्ष की उम्र में उन्होंने लखनऊ घराने के उस्ताद अफक हुसैन खां से तबले की तालीम आरंभ की। इसके बाद 30 साल तक इन्होंने प्रख्यात तबला वादक पं. ज्ञान प्रकाश घोष के मार्गदर्शन में तबला वादन का सघन ज्ञान प्राप्त किया। आज अनिंदो हाजी विलायत खां साहब द्वारा स्थापित फखरुद्दीन घराने के वंशजों का नेतृत्व करते हैं। Pandit Anindo Chatterjee Biography

सन् 1954 में जनमे अनिंदो चटर्जी सन 1972 से एकल और संगत में अपने तबला वादन का देश-विदेश में प्रदर्शन करते आ रहे हैं। उन्होंने अनेक महान कलाकारों के साथ संगत की है, जिनमें प्रमुख हैं पं. निखिल बनर्जी (सितार), पं. बुद्धदेव दासगुप्ता (सरोद), अली अकबर खां (सरोद), पं. मल्लिकार्जुन मंसूर (गायन), बुद्धादित्य मुखर्जी (सितार), उस्ताद रईस खां (सितार), गंगूबाई हंगल (गायन), पं. हरिप्रसाद चौरसिया (बांसुरी), पं. शिवकुमार शर्मा (संतूर) इत्यादि।

महान् परफॉर्मर के अलावा अनिंदो तबला निर्माता, गुरु और शोधकर्ता भी हैं। विभिन्न तबला घरानों की विविधतापूर्ण शैलियों की जानकारी ने अनिंदो को एक श्रेष्ठ गुरु बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके अनेक शिष्यों ने राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई है, जिनमें भूषण मुंजा, अनिंदो गंगोपाध्याय, संजय झाला और अनिल दातार के नाम शामिल हैं।

अनिंदो हमेशा सफर में रहते हैं—आज यहां रिकॉर्डिंग, कल वहां वे दुनिया भर में घूमते रहते हैं। रात को आप उनसे कोलकाता में मिलते हैं तो अगले दिन वे रोम में कंसर्ट करते हैं और उसी दिन मॉस्को में। सच, तबले ने उन्हें शोहरत के शिखर पर पहुंचा दिया है और उन्होंने तबले को।

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