ओशो ने बताया-वर्तमान में जीना ही क्यों है साधकों के लिए सफलता की सबसे बड़ी चाबी?
दी यंगिस्तान, नई दिल्ली।
Osho Birthday: महान विचारक ओशो ने अपने ओशो साधकों के लिए एक बड़ा खुलासा किया है, जो आज की लाइफ का सबसे बड़ा सच है। ओशो कहते हैं कि हमारी सबसे बड़ी प्रॉब्लम यह है कि हम यहाँ हैं, लेकिन हमारा दिमाग हमेशा अतीत में अटका हुआ है। सच तो यह है कि दुनिया और अस्तित्व (Existence) हमेशा वर्तमान में हैं, लेकिन हम उस अतीत में अटके हैं जो बीत चुका है।
ओशो समझाते हैं कि जब हम उस बीते हुए कल से चिपके रहते हैं, तो हमारा वर्तमान में जीना मुश्किल हो जाता है। इससे हमारा कनेक्शन वास्तविकता से टूट जाता है और भयानक दुःख, यानी नर्क पैदा होता है। ओशो ने साफ़ कहा कि अगर हम वर्तमान से नहीं जुड़ पाते, तो हम ईश्वरत्व से भी नहीं जुड़ सकते, क्योंकि वर्तमान ही ईश्वरत्व है।
समय तेज़ी से बदल रहा है, और इसके साथ ही जीवन मूल्य भी बदलने बेहद ज़रूरी हैं। ओशो के अनुसार, हर दिन बदलते समय के साथ बदलाव को स्वीकार करना और पुरानी मान्यताएं छोड़ना ही असल ज़िंदगी है।
जीवन मूल्य: क्या सच में बदलते हैं समय के साथ?
ओशो अपने प्रवचन में यह सवाल उठाते हैं कि क्या जीवन मूल्य भी समय के साथ बदल जाते हैं? ओशो कहते हैं कि हाँ, निश्चित रूप से! सब कुछ बदलता है। क्योंकि परिवर्तन जीवन का नियम है। जो चीज़ें वैदिक ऋषि के समय में सही थीं, वे आज सही नहीं हो सकतीं।
ओशो उदाहरण देते हैं कि पुराने समय में आशीर्वाद दिया जाता था: ‘तुम्हारे ढेर सारे बच्चे हों!’ लेकिन आज यह श्राप बन जाएगा! ओशो के अनुसार, आज धरती पर लोगों का इतना बोझ है कि अब जन्म नियंत्रण (Birth Control) सबसे बड़ी ज़रूरत है।
जन्म नियंत्रण: ओशो ने दिया जवाब, क्या यह हिंसा है?
ओशो साधकों के लिए इस उलझन को सुलझाते हैं कि क्या जन्म नियंत्रण करना शारीरिक हिंसा है, क्योंकि इससे एक आत्मा को जन्म लेने से रोक दिया जाता है।
ओशो ने सीधे कहा: वह आत्मा जो पैदा नहीं हुई, वह किसी और दरवाज़े पर दस्तक देगी! क्या आप ही अकेले ज़िम्मेदार हैं? ओशो पूछते हैं कि क्या यही एकमात्र धरती है? वैज्ञानिक कहते हैं कि पचास हज़ार से ज़्यादा ऐसी धरती हैं जहाँ जीवन है। ओशो कहते हैं, जो पूरे ब्रह्मांड को चला रहा है, वह उनका भी ध्यान रखेगा। आप बस अपनी समस्याएँ सुलझाएँ, वही काफ़ी है।
महावीर के जूते: ओशो ने बताया जब परंपराएं बोझ बनती हैं
ओशो बताते हैं कि कैसे परंपराएँ समय के साथ बेमानी हो जाती हैं। ओशो ने जैन धर्म के नियम का उदाहरण दिया। महावीर ने भिक्षुओं को नंगे पैर चलने को कहा था, क्योंकि उस समय चमड़े के जूते शारीरिक हिंसा थे और सड़कें मिट्टी की थीं।
लेकिन ओशो कहते हैं कि आज? जैन साधु कोलतार और सीमेंट की गरम सड़कों पर चलते हैं, पैरों में छाले पड़ते हैं, फिर भी वे कपड़े के टुकड़े लपेटकर चलते हैं। उन्हें नंगे पैर इसलिए चलना पड़ता है क्योंकि यह उनके शास्त्रों में लिखा है! ओशो चुनौती देते हैं कि अब कपड़ा, रबर जैसे अहिंसक जूते उपलब्ध हैं, लेकिन वे नहीं बदलते। ओशो मज़ाकिया अंदाज़ में कहते हैं कि अगर महावीर वापस लौटें, तो वह टाई पहनें या नहीं, जूते ज़रूर पहनेंगे!
ओशो की चेतावनी: परिवर्तन ही जीवन है
ओशो साफ चेतावनी देते हैं कि जो प्रजातियाँ समय के साथ बदलती हैं, केवल वही जीवित रहती हैं। यही परिवर्तन जीवन का नियम है।
ओशो के अनुसार, हमारा देश इसलिए मृत या अतीत का कब्रिस्तान बन गया है, क्योंकि यहाँ बदलाव नहीं होता। यहाँ आज कुछ नहीं है, बस अतीत ही अतीत है। ओशो कहते हैं, हमें विज्ञान और तकनीक के कारण इस धरती को स्वर्ग बनाने का मौका मिला है, लेकिन हमारी पुरानी मान्यताएं हमें नर्क से बाँधे रखती हैं।
ओशो ने ओशो साधकों के लिए कहा कि इस सड़ी हुई, बदबूदार अतीत की लाश को ढोना बंद करो और वर्तमान में जीना सीखो, क्योंकि यही जीवन है।
भूतकाल छोड़ो, वर्तमान को चुनो
ओशो का संदेश साफ़ है: परिवर्तन जीवन का नियम है और यही बदलाव जीवन को नया, ताज़ा और आनंदमय रखता है।
ओशो कहते हैं कि हमें इस सड़ी हुई, बदबूदार भूतकाल की लाश को ढोना बंद करना होगा। अपनी आँखें खोलो, क्योंकि वर्तमान में जीना ही एकमात्र सत्य है। अगर हम वर्तमान से जुड़ नहीं सकते, तो हम ईश्वरत्व से भी जुड़ नहीं सकते।
ओशो के विचार हमें सिखाते हैं कि अगर हमें इस धरती को स्वर्ग बनाना है, तो जीवन मूल्य को आज के समय के हिसाब से बदलना होगा। पुरानी मान्यताओं को छोड़कर, वर्तमान को चुनिए, नहीं तो आपकी ज़िंदगी एक बदबूदार, पुराना कब्रिस्तान बन जाएगी।
Q&A Section
Q: ओशो के विचार में वर्तमान में जीना क्यों ज़रूरी है?
A: ओशो के अनुसार, अस्तित्व (Existence) हमेशा वर्तमान में होता है। अतीत में अटके रहने से हम वास्तविकता से कट जाते हैं, जिससे दुःख (नर्क) पैदा होता है।
Q: ओशो के अनुसार क्या धार्मिक जीवन मूल्य (Jeevan Mulya) बदलना सही है?
A: हाँ, ओशो कहते हैं कि जीवन मूल्य समय की देन होते हैं। अगर हम उन्हें नहीं बदलते, तो वे आज की ज़रूरतों (जैसे जन्म नियंत्रण) के सामने बेमानी और हानिकारक हो जाते हैं।
Q: ओशो के अनुसार भूतकाल से मुक्ति कैसे पाई जा सकती है?
A: ओशो कहते हैं कि अपनी पुरानी मान्यताओं और परंपराएँ पर सवाल करें और यह स्वीकार करें कि जो नियम कभी ज़रूरत थे, वे आज बोझ बन चुके हैं।
Q: ओशो ने महावीर के भिक्षुओं को नंगे पैर चलने के नियम को क्यों पुरानी मान्यताएं कहा?
A: ओशो के अनुसार, महावीर के समय चमड़े के जूते शारीरिक हिंसा थे, लेकिन आज अहिंसक जूते उपलब्ध हैं। नियम को न बदलना, बदलते समय के साथ बदलाव को न अपनाने का उदाहरण है।
Q: ओशो साधकों के लिए वर्तमान से जुड़ना क्यों ज़रूरी है?
A: ओशो कहते हैं कि अगर आप वर्तमान से नहीं जुड़ते, तो आप ईश्वरत्व से भी नहीं जुड़ सकते, क्योंकि वर्तमान ही ईश्वरत्व है।
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