आर्थिक असमानता दूर करने, ग्रामीण आबादी को सशक्त करने में मददगार साबित हो रहा ओडीओपी

उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ की हड्डी साबित हो रहा ओडीओपी

संजीव कुमार मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार

कोविड 19 महामारी ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है। कोरोना काल में ना केवल विकसित बल्कि विकासशील देश अर्थव्यवस्था के कई मोर्चे पर जूझ रहे हैं। अर्थव्यवस्था के झटकों और मंदी की आहट के बीच सभी देश महामारी के नकारात्मक असर से उबरने की कवायद में जुटे हुए हैं। इन सबके बीच इंडोनेशिया के बाली में हुए जी-20 शिखर सम्मेलन से दुनिया को एक उम्मीद की किरण दिखी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शिखर सम्मेलन के प्रतिनिधियों को ओडीओपी (एक जिला, एक उत्पाद) योजना के उत्पाद उपहार स्वरूप दिए। ओडीओपी उत्पादों की वैश्विक स्तर पर चर्चा हो रही है। उत्पादों से इतर ओडीओपी योजना अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर जूझ रहे विकासशील देशों के लिए संजीवनी का काम कर सकती है। यह महात्मा गांधी के विकास की संकल्पना के पैमाने पर भी खरा उतरता है। महात्मा गांधी विकास का ऐसा मॉडल चाहते थे जिसमें गांव-गांव तक उद्योग हो। गरीब-अमीर के बीच असमानता खत्म हो और प्रत्येक व्यक्ति के पास रोजगार हो। ओडीओपी योजना ने हर हाथ को हुनर दिया है। यूपी की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की है। साल 2023 यूपी के लिए महत्वपूर्ण है। फरवरी महीने में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट आयोजित होगी। भारत की अध्यक्षता में जी-20 शिखर सम्मेलन भी इसी साल आयोजित होगा। जी 20 से संबंधित कई महत्वपूर्ण बैठक ग्रेटर नोएडा, आगरा, लखनऊ में होंगी। इन बैठकों के जरिए ओडीओपी उत्पादों को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने के लिए योगी सरकार अभी से तैयारी कर रही है। योगी का विकास मॉडल विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था को गति दे सकता है। इस विकास मॉडल में कानून व्यवस्था की स्थिति दुरुस्त मिलेगी, ढांचागत सुविधाएं सही मिलेंगी ही लेकिन इसमें ओडीओपी की भूमिका बहुत ही अहम होगी।

इस तरह हुई थी शुरुआत

जापान ने 1979 में ओवीओपी (वन विलेज, वन प्रोडक्ट) लागू किया था। महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के मकसद से ओइटा के गर्वनर ने इसे शुरू किया था। बाद में कई अन्य देशों ने भी इसे अपनाया, खासकर विकासशील देशों ने। थाईलैंड, इंडोनेशिया ने भी इसे फेरबदल के साथ लागू किया। थाईलैंड ने बैक टू विलेज नाम से एवं इंडोनेशिया ने वन टैम्बन वन प्रोडक्ट नाम से इस योजना को शुरू किया था। हालांकि दोनों ही देशों में यह योजना परवान नहीं चढ सकी। सन 2018 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में एक जिला एक उत्पाद का शुभारंभ किया था। इसके तहत प्रत्येक जिले के प्रसिद्ध उत्पादों को चिन्हित किया गया। भारतीय जीडीपी में 8.79 प्रतिशत का योगदान देने वाले उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में ओडीओपी ने अहम रोल निभाया। यूपी में 90 लाख एमएसएमई यूनिट हैं। यूपी की अर्थव्यवस्था में एमएसएमई का योगदान 80 प्रतिशत तक है। यूपी ने 1 ट्रिलियन इकोनॉमी का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए ओडीओपी को और अधिक मजबूत करना जरूरी है। ओडीओपी के तहत यूपी के प्रत्येक जिले के खास उत्पाद चिन्हित किए गए हैं। इन उत्पादों के प्रोडक्शन एवं निर्यात पर सरकार ध्यान देती हैं। उत्तर प्रदेश का निर्यात लगातार बढाने में ओडीओपी सहायक साबित हुई है। इसकी वजह से निर्यात 2015-16 में 81,218 करोड़ से बढ़कर 2019-20 में 1,20,356 करोड़ हो गया। 48 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई। फिलहाल नेपाल, इंडोनेशिया, दक्षिण एशियाई देशों में निर्यात हो रहा है। सरकार के प्रयासों से ओडीओपी के उत्पाद अब ऑनलाइन भी उपलब्ध है।

योगी सरकार इसे लेकर संजीदा है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में इस क्षेत्र में निवेशकों की दिलचस्पी जगाने, ऐसी उम्मीद है। सरकार ग्लोबल समिट के प्रचार के लिए 20 देशों में रोड शो करेगी। इसमें थाईलैंड भी शामिल है। इसके अलावा जापान, जर्मनी, मैक्सिको, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया आदि देशों में भी रोड शो होगा। ओडीओपी को गांव-गांव तक पहुंचा होगा। इससे गांवों के हुनरमंद युवाओं को जोड़ना होगा ताकि युवाओं का पलायन रोका जा सके। योगी सरकार ने इस दिशा में कुछ प्रयास किए हैं लेकिन बात इतने भर से नहीं बनेगी। बडे कदमों की दरकार होगी। योगी आदित्यनाथ कई बार अपने संबोधनों में कहते हैं कि सरकार ओडीओपी को प्रोत्साहित करने के लिए गंभीर प्रयास कर रही है। इसके पहले प्रोत्साहन के अभाव और आधुनिक तकनीक नहीं होने के चलते कारीगर निराश हो गए थे। वो शहरों की तरफ पलायन कर रहे थे। जिसका यूपी के विकास पर दुष्परिणाम पडा। कोरोना काल में 40 लाख कारीगर शहर छोड गांव आए तो सरकार ने स्किल मैपिंग की। रोजगार दिया, जिसका नतीजा है कि ओडीओपी सफलता की नित नई कहानी लिख रही है। हालांकि, अभी मंजिल बहुत दूर है। प्रत्येक युवा को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए और प्रयासों की दरकार है।

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