₹60 करोड़ के फंड से नवाचार और उत्पाद विकास को मिलेगा बढ़ावा; जानें कैसे आवेदन करें!
दी यंगिस्तान, नई दिल्ली।
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) ने पुनर्गठित रिसर्च प्रमोशन स्कीम 2025: लैब टू मार्केट की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य लैब प्रोटोटाइप से बाजार के लिए तैयार उत्पादों तक विचारों को आगे बढ़ाकर भारत के अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को बदलना है।
योजना को एआईसीटीई के अध्यक्ष प्रो. टी.जी. सीताराम ने लॉन्च किया। इस दौरान उपाध्यक्ष डॉ. अभय जेरे और सदस्य सचिव प्रो. राजीव कुमार भी मौजूद रहे।
यह नई योजना एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, रेयर अर्थ मिनिरल्स, दिव्यांगता प्रबंधन आदि जैसे उभरते क्षेत्रों में वास्तविक दुनिया के प्रभाव के साथ शोध पर केंद्रित है। इस योजना के लिए एआईसीटीई ने पॉलिटेक्निक संस्थानों के लिए 10 करोड़ रुपये के समर्पित आवंटन सहित कुल 60 करोड़ रुपये का कोष निर्धारित किया है। एआईसीटीई-अनुमोदित संस्थानों के चयनित संकाय सदस्यों को टेक्नोलॉजी रेडिनेस लेवल (टीआरएल)-6 (लैब टेस्टिंग) और टीआरएल-7 (फील्ड टेस्टिंग) के दायरे वाली परियोजनाओं के लिए 50 लाख रुपये तक की राशि प्रदान की जाएगी।
योजना को लांच करते हुए एआईसीटीई के अध्यक्ष प्रो. टी.जी. सीताराम ने कहा कि इस योजना के माध्यम से, हमारा लक्ष्य अपने संस्थानों में नवाचार और उत्पाद विकास की एक मजबूत संस्कृति को बढ़ावा देना है। स्कूल-स्तरीय पहल से लेकर संकाय नेतृत्व वाले शोध तक, हम प्रतिभाओं की एक पाइपलाइन तैयार कर रहे हैं जो राष्ट्रीय प्राथमिकताओं की पूर्ति कर सकती है।
रेयर अर्थ एंड क्रिटिकल मिनिरल्स, एडवांस्ड मैटेरियल्स, अंतरिक्ष और रक्षा जैसे केंद्रित डोमेन भारत के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि यह योजना न केवल परिवर्तनकारी विचारों को बढ़ावा देगी बल्कि कपिला योजना जैसी पहलों के माध्यम से पेटेंट फाइलिंग में भी सहायक होगी। चयनित शोधकर्ताओं को बूटकैंप कार्यशालाओं में शामिल होने का भी अवसर मिलेगा।”
एआईसीटीई के उपाध्यक्ष डॉ. अभय जेरे ने परिषद द्वारा हाल में शुरू की गई पहलों के समग्र दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह योजना यह सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है कि अनुसंधान प्रयोगशाला स्तर पर न रुके। इसे वास्तविक दुनिया के समाधानों की ओर ले जाना चाहिए। यह छात्रों के लिए हाल ही में शुरू की गई एआईसीटीई रिसर्च इंटर्नशिप योजना का पूरक है। वह कार्यक्रम छात्रों को अनुसंधान में शुरुआती रूप से शामिल करता है, और यह योजना संकाय को उच्च प्रभाव वाली परियोजनाओं का नेतृत्व करने के लिए सशक्त बनाती है। इसमें छात्र शोध सहायक के रूप में योगदान करते हैं और संकाय सार्थक परिणाम प्राप्त करते हैं। यह दोहरा दृष्टिकोण ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था बनने के हमारे राष्ट्रीय लक्ष्य का समर्थन करता है और हमारे विकसित भारत के दृष्टिकोण में योगदान देता है।
योजना के लिए ऑनलाइन पोर्टल 9 जून, 2025 को खुलेगा और 31 जुलाई, 2025 तक आवेदन किया जा सकेगा। वित्त पोषण के अलावा एआईसीटीई शोधकर्ताओं को अपने इन्क्यूबेशन सेंटर, आईडिया लैब्स, आईपीआर और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कार्यशालाओं तक पहुँच प्रदान करेगा।
अनुसंधान अनुदान निम्नलिखित उभरते क्षेत्रों में 2 से 3 वर्ष की अवधि के लिए होगा:
1- एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सुपर कंप्यूटिंग और क्वांटम कंप्यूटिंग)
2- एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग
3- एडवांस्ड मैटेरियल्स, रेयर अर्थ एंड क्रिटिकल मिनिरल्स
4- एग्रोटेक और खाद्य प्रसंस्करण
5- एआई और डेटा साइंस
6- ब्लू/ग्रीन इकोनॉमी
7- साइबर फिजिकल सिस्टम्स और साइबर सिक्योरिटी
8- डिजाइन थिंकिंग और इनोवेशन
9- डिजिटल ट्विन्स
10- आपदा प्रबंधन और लचीला बुनियादी ढाँचा
11- ऊर्जा, स्थिरता और जलवायु परिवर्तन
12- हेल्थ केयर और मेड टेक
13- हाइड्रोजन ऊर्जा
14- विनिर्माण और इंडस्ट्री 4.0
15- नेक्स्ट जेन कम्युनिकेशन और सिग्नल प्रोसेसिंग
16- सेमीकंडक्टर
17- स्मार्ट सिटीज
18- स्मार्ट मोबिलिटी
19- अंतरिक्ष और रक्षा
20- कोई अन्य उभरता हुआ प्रौद्योगिकी क्षेत्र
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