अनाधिकृत कॉलोनियों की तर्ज पर गांवों के नियमितीकरण की मांग; थान सिंह यादव ने कहा- अधिकारों से वंचित हैं ग्रामीण
दी यंगिस्तान, नई दिल्ली।
दिल्ली पंचायत संघ ने राजधानी के गांवों के अस्तित्व और ग्रामीणों के अधिकारों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। संघ ने केंद्र और दिल्ली सरकार से पुरजोर मांग की है कि जिस प्रकार 1511 अनाधिकृत कॉलोनियों को ‘जहां है, जैसा है’ के आधार पर नियमित किया गया है, उसी तर्ज पर दिल्ली के गांवों को भी “गांव जैसे है, गांव जहां तक है” के आधार पर पूर्ण मालिकाना हक दिया जाए।
दिल्ली पंचायत संघ के प्रमुख थान सिंह यादव ने इस संबंध में केंद्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर, मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता और क्षेत्र के विभिन्न सांसदों को ज्ञापन भेजकर अपनी मांगें स्पष्ट की हैं।
जल्द बुलाई जाएगी महापंचायत
थान सिंह यादव ने बताया कि गांवों के लंबित मुद्दों पर चर्चा करने और भविष्य की रणनीति तय करने के लिए जल्द ही एक बड़ी पंचायत बुलाई जाएगी। उन्होंने कहा कि 1511 कॉलोनियों को नियमित करने का निर्णय स्वागत योग्य है, लेकिन वर्षों से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे मूल ग्रामीणों और किसानों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पंचायत संघ की प्रमुख मांगें:
ज्ञापन के माध्यम से संघ ने सरकार के सामने 10 सूत्रीय एजेंडा रखा है, जिसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- लाल डोरा विस्तार: लाल डोरा और विस्तारित लाल डोरा क्षेत्र को पूर्ण मालिकाना हक मिले।
- टैक्स से मुक्ति: गांवों को हाउस टैक्स, कन्वर्जन शुल्क और अन्य सभी करों से मुक्त रखा जाए।
- बुनियादी ढांचा: गांवों की फिरनी (मुख्य मार्ग) को कम से कम 100 फुट चौड़ा किया जाए और समुचित पार्किंग व खेल के मैदान विकसित हों।
- किसानों का हित: अधिग्रहित भूमि का मुआवजा बढ़ाया जाए और भूमिहीन परिवारों को आवासीय प्लॉट दिए जाएं।
- नियमों में छूट: गांवों पर लागू जटिल भवन उपनियमों (Building Bye-laws) को तत्काल हटाया जाए।
संघ का कहना है कि यदि सरकार इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेती है, तो इससे दिल्ली के ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को नई दिशा मिलेगी और ग्रामीणों को उनका खोया हुआ सम्मान वापस मिल सकेगा।
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