प्रदेश के 11 प्रमुख ईको-टूरिज्म स्थलों के संचालन एवं रख-रखाव हेतु आमंत्रण
दी यंगिस्तान, नई दिल्ली।
UP Tourism news: उत्तर प्रदेश ईको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड (UPETDB) प्रदेशभर में विकसित किए गए 11 विश्वस्तरीय ईको-टूरिज्म स्थलों के संचालन एवं रख-रखाव के लिए निवेशकों को आमंत्रित किया है।
इन परिसंपत्तियों का विस्तार अयोध्या, चित्रकूट, बलिया, बाराबंकी, ललितपुर, बांदा, जालौन, कुशीनगर, सीतापुर, महाराजगंज और मिल्कीपुर (अयोध्या ज़िला) तक फैला है। यह परियोजनाएँ प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक धरोहर और आधुनिक ईको-फ्रेंडली अवसंरचना का संगम हैं, जो भारत के अगले ईको-टूरिज्म आइकॉन बनने के लिए तैयार हैं।
उत्तर प्रदेश लगातार भारत में घरेलू पर्यटकों के आगमन में अग्रणी रहा है। बढ़ती ईको-फ्रेंडली और जिम्मेदार पर्यटन की मांग को देखते हुए राज्य ने निम्न प्रमुख स्थलों पर ईको-टूरिज्म अवसंरचना विकसित की है:
• अयोध्या (फ़्लोटिंग रेस्तरां)
• अयोध्या (उधेला झील)
• बलिया (मेरितार गांव – सुरहा ताल बर्ड सेंचुरी)
• बाराबंकी (बगहर झील)
• सीतापुर (अज्जेपुर झील)
• कुशीनगर (सोहरौना ताल)
• चित्रकूट (रामनगर झील एवं मड़फ़ा किला)
• जालौन (पचनदा – पाँच नदियों का संगम)
• ललितपुर (ककरावल जलप्रपात)
• बांदा (पर्यटक सुविधा केन्द्र, कालिंजर किला)
• महाराजगंज (देवदह ईको-टूरिज्म साइट)
निवेशकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
• तैयार अवसंरचना: झील घाट, अम्फीथिएटर, वॉच टावर, कैफ़े, फ़्लोटिंग रेस्तरां, वेलनेस जोन आदि पहले से निर्मित।
• विशाल पर्यटक आधार: यूपी में वर्ष 2024 में लगभग 65 करोड़ पर्यटक आए थे। अयोध्या, वाराणसी, चित्रकूट, बुंदेलखंड, कुशीनगर सहित अन्य स्थलों पर बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचे थे।
• पहले निवेश का लाभ: नए और अनछुए ईको-टूरिज्म स्थलों पर विशेष संचालन का अवसर।
• राजस्व स्रोत: टिकटिंग, बोटिंग, जलपान, ईको-स्पोर्ट्स, वेलनेस रिट्रीट, सांस्कृतिक कार्यक्रम और स्मृति चिन्ह बिक्री।
• सरकारी सहयोग: ब्रांडिंग, मार्केटिंग सपोर्ट
• समुदाय भागीदारी: स्थानीय स्वयं सहायता समूह (SHG), कारीगर और युवाओं के साथ साझेदारी।
• 15 वर्ष की रियायत अवधि: प्रदर्शन के आधार पर अतिरिक्त 15 वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है।
• ओपन बिडिंग: etender.up.nic.in पर उच्चतम प्रीमियम (H1 बोलीदाता) को आवंटन।
ईको-टूरिज्म गंतव्य और उनके लाभ
1. पचनदा, जालौन – पाँच नदियों का संगम
• यमुना, चम्बल, सिंध, पहुज और कुँवारी नदियों का संगम; डॉल्फ़िन आवास।
• राजस्व: बोटिंग, नदी पर्यटन, वेलनेस कैंप, क्राफ़्ट बाज़ार।
2. रामनगर झील, चित्रकूट – प्रकृति और अध्यात्म का संगम
• रणिपुर टाइगर रिज़र्व व धार्मिक स्थल समीप।
• राजस्व: टिकटिंग, योग शिविर, सांस्कृतिक कार्यक्रम।
3. सोहरौना ताल, कुशीनगर – बौद्ध धरोहर से जुड़ी आर्द्रभूमि
• वैश्विक बौद्ध तीर्थस्थल कुशीनगर के निकट।
• राजस्व: बर्डवॉचिंग, बोटिंग, कार्यक्रम आयोजन।
4. देवदह, महाराजगंज – ग्रामीण पर्यटन केन्द्र
• नेपाल सीमा से नज़दीक; स्थानीय मेले व ग्रामीण संस्कृति।
• राजस्व: फूड स्टॉल, नौकायन, हस्तशिल्प।
5. बगहर झील, बाराबंकी – तीर्थ + प्रकृति
• महादेवा मंदिर के समीप 84 हेक्टेयर झील।
• राजस्व: बर्डवॉचिंग, फूड कोर्ट, आयोजन।
6. अज्जेपुर झील, सीतापुर – धार्मिक सर्किट कनेक्टर
• नैमिषारण्य तीर्थ के पास।
• राजस्व: कैफ़े, बोटिंग, योग केन्द्र।
7. फ़्लोटिंग रेस्तरां, अयोध्या – प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी
• सरयू नदी पर वातानुकूलित रेस्तरां।
• राजस्व: भोजन, सांस्कृतिक प्रदर्शन, कार्यक्रम।
8. पर्यटक सुविधा केन्द्र, कालिंजर किला, बांदा – धरोहर गेटवे
• कॉटेज, विवाह/इवेंट पैवेलियन, योग रिट्रीट।
• राजस्व: आवास, कार्यक्रम, भोजन।
9. उधेला झील, मिल्कीपुर (अयोध्या) – नेचर एंड वेलनेस एस्केप
• ईको-कॉटेज, ट्रेल्स, बर्डवॉचिंग।
• राजस्व: लॉजिंग, योग शिविर, फूड कोर्ट।
10. ककरावल जलप्रपात, ललितपुर – एडवेंचर और प्रकृति पर्यटन
• प्राकृतिक झरना व पगडंडियाँ।
• राजस्व: ट्रेकिंग, वेलनेस, इको-स्टे।
11. मेरितार झील (सुरहा ताल), बलिया – पक्षी प्रेमियों का स्वर्ग
• साइबेरियन पक्षी, औषधीय पौधे।
• राजस्व: बर्डवॉचिंग, त्योहार आयोजन, वेलनेस।
मुख्य सरल निवेश शर्तें
• अवधि: 15 वर्ष (प्रदर्शन आधारित विस्तार योग्य)।
• नियंत्रण: संचालन, रखरखाव, विपणन व आय सृजन।
• सहूलियत: तैयार अवसंरचना + सरकारी मार्केटिंग सपोर्ट।
न्यूनतम योग्यता
• हॉस्पिटैलिटी/पर्यटन/ईको-टूरिज्म में अनुभव।
• पर्याप्त वित्तीय क्षमता व संचालन क्षमता।
• पर्यावरण, सुरक्षा व वैधानिक अनुपालन।
विस्तृत जानकारी एवं निविदा दस्तावेज़ हेतु देखें:
👉 etender.up.nic.in
संपर्क करें:
उत्तर प्रदेश ईको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड (UPETDB)
वैश्विक पर्यटन ब्रांड के भविष्य में निवेश- पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि यह केवल ईको-टूरिज्म में निवेश नहीं है—यह सतत यात्रा, स्थानीय आजीविका और उत्तर प्रदेश के वैश्विक पर्यटन ब्रांड के भविष्य में निवेश है। हम निवेशकों और ऑपरेटर्स को आमंत्रित करते हैं कि वे इन स्थलों को भारत के सबसे प्रशंसित ईको-टूरिज्म प्रतीकों में बदलने में भागीदार बनें।
- Tata Sierra EV 30 जून को होगी Reveal, 5 जरूरी सवाल जो हर buyer को पूछने चाहिए
- Delhi Hotel Fire: Flourish Stay के मालिक लवकेश बजाज का निकला पुराना क्रिमिनल रिकॉर्ड
- Delhi Malviya Nagar Fire: 21 लोगों की मौत, जानिए पूरा मामला
- Maruti Swift Hydrogen Launch: पानी से चलेगी कार? जानें सच
- Goa Statehood Day: प्रधानमंत्री मोदी के संदेश से राज्य में उत्साह की लहर, CM प्रमोद सावंत ने जताया आभार






