हिंदी सिनेमा को चाहने वाले गीता दत्त से अंजान नहीं हो सकते। बाबू जी धीरे चलना’, ‘पिया ऐसो जिया में समाय गयो रे’, और ‘ये लो मैं हारी पिया’ जैसे सैकड़ों गाने आज भी उन सुनहरे दिनों की याद दिलाते हैं। आज भी ये गाने लोगों की जुबां पर हैं। इन गानों को प्रसिद्ध गायिका गीता दत्त ने आवाज दी थी। गीता जी ने अपने करियर में 1417 गाने गाए। सन 1930 में जन्मीं गीता दत्त का 41 साल की उम्र में 20 जुलाई 1972 को निधन हो गया।

गीता दत्त के गानों की लता मंगेशकर भी मुरीद थी। हिंदी सिनेमा का एक दौर ऐसा भी रहा, जब यही दोनों गायिकाएं इंडस्ट्री की टॉप 2 सिंगर की लिस्ट में शुमार थी। आज हम आपको इन्हीं दोनों महान गायिकाओं की जिंदगी से जुड़ा किस्सा बता रहे हैं।

वरिष्ठ गुजराती लेखक रजनी पांड्या ने अपनी किताब में गीता दत्त और लता मंगेशकर से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा बताया है। दरअसल, साहब बीबी और गुलाम फिल्म, में गीता दत्त ने एक गाना गाया था। यह गाना हान्टेड था। जिसके बोल थे, जिया बुझा बुझा, नैना थके थके पिया धीरे धीरे चले आओ कोई दूर से आवाज़ दे चले आओ चले आओ,। इसका संगीत हेमंत कुमार ने दिया था।

खैर, यह फिल्म रिलीज हुई। गीता दत्त द्वारा गाए इस गाने को खूब पसंद किया गया। इस बीच हेमंत कुमार एक और फिल्म कर रहे थे। इस फिल्म का नाम था ‘20 साल बाद,। साहब बीबी और गुलाम की तरह ही एक गाना इस फिल्म में भी था।

हेमंत कुमार ने गाना गीता दत्त जी की आवाज में रिकार्ड कराने की सोची। गीता दत्त रिहर्सल में भी आयी। रिहर्सल के दौरान गाने की एक लाइन गीता दत्त ठीक से नहीं गा पा रही थी। ये लाइन थी, जरा मिलना नजर पहचान के, गीता जी ने कई बार कोशिश की लेकिन बात नहीं बनी। तब हेमंत कुमार ने उनसे माफी मांगी और गाना लता मंगेशकर की आवाज में रिकार्ड किया गया। फिल्म रिलीज हुई तो यह गाना कहीं दीप जले कहीं दिल सुपर हिट हुआ।

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