Bhola shankar kachori wale शाहदरा की भीड़ भरी गली। मुख्य मार्ग के दोनों तरफ कपड़ों, जनरल स्टोर की दुकानें। वाहनों की लंबी कतारों के बीच एक जगह ऐसी भी है जो चलते कदमों को रोक देती हैं Bhola shankar kachori wale। जहां चंद मिनटों के लिए मानों जाम का झाम खट्टी-मीठी चटनियों के स्वाद में घुल सा जाता है। सफर की थकान कचौड़ी के स्वाद के साथ ही काफूर हो जाती है। जी हां, यहां स्वाद का जादू है ही ऐसा। दरअसल, विगत 50 सालों से भी ज्यादा समय से खरबूजे के बीच, अंगुर, केला, पनीर से बनी मीठी चटनी जब आमचूर से बनी खट्टी चटनी के साथ कचौड़ी संग परोसी जाती है तो ग्राहक कुछ समय के लिए दुनियादारी भूल ही जाता है। शायद, यही वजह है कि सिर्फ दिल्लीवाले ही नहीं बल्कि विदेशों में भी पसंद करने वाले बहुतायत है।

50 साल से अधिक पुरानी दुकान

दुकान मालिक सतीश कुमार कहते हैं कि उनके पिता भोला शंकर ने यह दुकान खोली थी। भोला शंकर मूलरूप से अलीगढ़ के रहने वाले थे। सन 1959 में वो दिल्ली आए थे। नौकरी की तलाश उनकी गत्ते के एक फैक्ट्री तक ले गई जहां उन्हें मजदूरी का काम मिला। लेकिन यहां काम करते हुए ही उन्होंने कुछ अलग और अपना काम करने की ठानी और इस तरह जायके का सफर शुरू हुआ। सबसे पहले सिर पर बर्तन रखकर वो गलियों में घूम घूमकर बेचा करते थे। सतीश कहते हैं कि वो चाट बहुत अच्छा बनाते थे। लोग कालोनियों में उनका इंतजार करते रहते थे। खैर, काम चल निकला।

पिता लड़े चुनाव, बेटे ने संभाली दुकान

सतीश कहते हैं कि दुकान सन 1960 में खुल गई थी। उस समय दुकान पिता जी ही संभालते थे। सन 1996 में पिता जी ने चुनाव लड़ने का मन बनाया। उन्होंने शाहदरा से विधायकी के लिए पर्चा भी दाखिल कर दिया। इसके बाद वो चुनाव में व्यस्त हो गए और मैं दुकान संभालने लगा। हालांकि पिता जी चुनाव जीत नहीं पाए थे। इसके बाद के वर्षों में उनकी तबियत बिगड़ गई और सन 2002 में उनकी मौत हो गई।

खुल गई तीन दुकान

सतीश कहते हैं कि वर्तमान में छोटा बाजार में ही भोला शंकर कचौड़ी वाले नाम से तीन दुकानें खुल चुकी है। तीनों दुकानें भाईयों की ही है। बकौल सतीश उनके स्वर्गीय भाई पप्पू के बेटे सोनू और भाई राकेश कुमार की भी दुकान चल रही है। तीनों ही दुकानों पर कचौड़ी मिलती हैं लेकिन स्वाद लगभग सबका एक सा ही है। यही वजह है कि तीनों ही दुकानों पर लगभग हर समय खाने वालों की अच्छी खासी तादात दिखती है। दुकान सुबह 11 बजे खुल जाती हैं लेकिन शाम चार बजे तक पूरा स्टॉक खत्म हो जाता है। इसके बाद भी सामान तैयार होने से लेकर परोसने तक के दौरान ग्राहक यहां से टस से मस नहीं होते हैं।

कमाल की चटनी

कचौड़ी पूरी दिल्ली में मिलती है। कई जगह इसे आलू की सब्जी के साथ परोसा जाता है। लेकिन यहां कचौड़ी बड़े खास अंदाज में बनाई एवं परोसी जाती है। इसे खास बनाती है। यह चटनी आमचूर, मसाले, खरबूजे के बीज, आलू, कचौरी, अंगूर, पनीर, अनार के दाने और केला की चटनी का संयोजन होता है। कचौड़ी पर सबसे पहले आलू, मटर छोले, टमाटर रखते हैं। आलू, मटर और टमाटर भी दो बर्तनों में रखे हुए दिखते हैं। पूछने पर सतीश कहते हैं कि एक बर्तन में तीखा जबकि दूसरे में हल्का तीखा होता है। एवं फिर आमचूर से बनी खट्टी चटनी डालते हैं। इसके बाद सबसे उपर मीठी चटनी डालकर सर्व करते हैं। मसाले घर पर ही साबुत से बनाए जाते हैं।

25 साल पुराने ग्राहक

दुकान पर कई ऐसे ग्राहक मिलते हैं जो सालों से नियमित खाने आते हैं। ऐसे ही एक बुजुर्ग हरिप्रसाद कहते हैं कि वो 25 साल से ज्यादा समय से यहां खाने आ रहे हैं। कहते हैं कि भोला शंकर उनके मित्र हुआ करते थे। उन्हीं के समय से यहां कचौड़ी खाने आते थे। वो सिलसिला आज भी जारी है। हां, पहले तीखी कचौड़ी बनवाते थे अब हल्का तीखा खाते हैं। वहीं कई ऐसे युवा भी मिले जो कमला नगर, लक्ष्मी नगर से यहां कचौड़ी खाने आए थे। यहां दुकान पर खाने पर कचौड़ी का दाम 40 रुपये है जबकि पैक कराने पर 60 रुपये देने पड़ते हैं।

दुकान-भोला शंकर कचौड़ी वाले

स्थल- छोटा बाजार, शाहदरा।

समय-सुबह 11 बजे से रात आठ बजे तक।

नजदीकी मेट्रो- शाहदरा

————

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here