NVIDIA और ओपनएआई को टक्कर देने आया नया AI मॉडल, Reinforcement Learning से बदलेगा गेम!
दी यंगिस्तान, नई दिल्ली।
टेक्नोलॉजी की दुनिया में चीन ने एक और बड़ा कदम बढ़ाया है। ‘डीप सीक’ (Deep Seek) नामक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल ने न केवल OpenAI के GPT-4 और Google Gemini को चुनौती दी है, बल्कि इसकी लागत और कार्यक्षमता ने पूरी इंडस्ट्री को चौंका दिया है।
क्या है ‘डीप सीक’ और क्यों बना सुर्खियों में?
चीन के एक हेज फंड द्वारा शुरू किया गया यह AI मॉडल एक साइड प्रोजेक्ट के रूप में विकसित किया गया था। इसका उद्देश्य था वीकेंड पर बेकार पड़े GPU का उपयोग करना। लेकिन इसकी अनोखी क्षमता ने इसे टेक्नोलॉजी जगत के लिए गेम चेंजर बना दिया।
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‘डीप सीक’ बनाम GPT-4: क्या है अंतर?
| विशेषता | Deep Seek AI | GPT-4 |
| लर्निंग प्रोसेस | Reinforcement Learning + Supervised Learning | Supervised Learning |
| लागत | कुछ मिलियन डॉलर | 100 मिलियन डॉलर |
| लॉन्चिंग रणनीति | रणनीतिक दिन (ट्रंप के शपथ ग्रहण के दिन) | नियमित लॉन्च |
| कार्यक्षमता | ज्यादा प्रभावी और किफायती | महंगा और डेटा केंद्रित |
टेक्नोलॉजी जगत में चीन की रणनीतिक चाल?
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘डीप सीक’ का लॉन्च महज टेक्नोलॉजी ब्रेकथ्रू नहीं, बल्कि एक रणनीतिक कदम भी हो सकता है। इसका लॉन्च उसी दिन हुआ जिस दिन डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी राष्ट्रपति पद की शपथ ली, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में इसकी टाइमिंग को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
क्या यह ओपनएआई और NVIDIA के लिए खतरे की घंटी?
OpenAI और NVIDIA जैसी दिग्गज कंपनियां अब तक AI टेक्नोलॉजी में लीड कर रही थीं। लेकिन ‘डीप सीक’ की किफायती लागत और अत्यधिक कार्यक्षमता इसे भविष्य में सबसे शक्तिशाली AI बना सकती है।
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विशेषज्ञों की राय:
- टेक एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह AI मॉडल न केवल सस्ता है बल्कि ज्यादा एडवांस्ड भी।
- आने वाले समय में इसका इस्तेमाल डेटा साइंस, ऑटोमेशन और रिसर्च सेक्टर में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।
- चीन की इस तकनीक से अमेरिका और अन्य पश्चिमी देश सतर्क हो सकते हैं।
क्या ‘डीप सीक’ AI इंडस्ट्री की दिशा बदल देगा?
इस नए AI मॉडल का तेजी से विकास इसे इंडस्ट्री में अगला बड़ा खिलाड़ी बना सकता है। क्या यह OpenAI और Google को पीछे छोड़ देगा? आने वाले वर्षों में इसका प्रभाव देखने लायक होगा।
डीप सीक का प्रभाव सिर्फ टेक कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा। इसकी लागत और कार्यक्षमता देखते हुए यह भविष्य में AI के गेम को पूरी तरह बदल सकता है। क्या यह ChatGPT और Google Gemini के लिए खतरे की घंटी है? क्या अमेरिका और पश्चिमी देशों को इससे चिंता होनी चाहिए? यह देखना दिलचस्प होगा।
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