कभी डीजल से चलने वाली डबल डेकर बसें अब इलेक्ट्रिक अवतार में होंगी लांच
दी यंगिस्तान, नई दिल्ली।
दिल्ली की सड़कों पर जल्द ही इलेक्ट्रिक डबल डेकर बसें लौटने वाली हैं। ये बसें न केवल शहर के सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक बनाएंगी, बल्कि पुराने समय की यादें भी ताज़ा करेंगी, जब लाल रंग की ऊँची बसें राजधानी की पहचान हुआ करती थीं।
वास्तव में, ये बसें केवल आम यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि कई बड़े सेलिब्रिटी और फिल्म इंडस्ट्री के सितारों के लिए भी यादगार रही हैं। बॉलीवुड की महान अभिनेत्री श्रीदेवी, अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर ने भी दिल्ली की इन डबल डेकर बसों में यात्रा की थी।
डबल डेकर बसों का सुनहरा इतिहास
डबल डेकर बसें मुख्यतः ब्रिटिश लेलैंड से आयात की गईं और 1970–1980 के दशक में राजधानी का अभिन्न हिस्सा बन गई थीं। ये बसें कई प्रमुख रूटों पर चलती थीं, जैसे:
- सरोजिनी नगर – करोल बाग
- जामा मस्जिद – क़ुतुब रोड
- केंद्रीय टर्मिनल – देव नगर
- शादिपुर डिपो – सेंट्रल टर्मिनल
हर बस में लगभग 70–100 यात्री सफ़र कर सकते थे। ऊपरी डेक से दिल्ली का विहंगम दृश्य और ऐतिहासिक स्थल दिखाई देते थे। किराया बेहद किफ़ायती था; जामा मस्जिद से क़ुतुब रोड तक केवल 15 पैसे।
मीडिया प्रोफ़ेशनल चंद्रशेखर नैलवाल कहते हैं, “डबल डेकर बसें सिर्फ़ सफ़र का साधन नहीं थीं, बल्कि राष्ट्रीय राजधानी में सार्वजनिक परिवहन की पहचान और यात्रियों के बीच सामूहिक अनुभव का प्रतीक थीं।”
सेलिब्रिटी अनुभव और आम यात्रियों की यादें
डबल डेकर बसों ने न केवल आम यात्रियों का मनोरंजन किया, बल्कि कई बड़े सितारों की यात्रा का भी हिस्सा बनीं।
- श्रीदेवी, जब दिल्ली में फिल्म शूटिंग के लिए आती थीं, अक्सर इन बसों में सफ़र किया करती थीं।
- अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर ने भी अपने दिल्ली दौरे के दौरान डबल डेकर बसों में सफ़र का आनंद लिया।
- बच्चों और युवाओं के लिए ऊपरी डेक की सीटें विशेष आकर्षण का केंद्र थीं।
- जेएनयू और जामिया विश्वविद्यालय के छात्र अक्सर शाम के समय ऊपरी डेक पर सफ़र का आनंद लेते थे।
पर्यटकों के लिए ये बसें लाल क़िला, इंडिया गेट, जंतर मंतर और राजपथ का दृश्य देखने का अनूठा अवसर प्रदान करती थीं। यह अनुभव केवल सफ़र का नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक यात्रा का प्रतीक भी था।
चुनौतियां कम नहीं
1980 के दशक में कई कारणों से डबल डेकर बसों का संचालन मुश्किल हो गया।
- बढ़ता ट्रैफ़िक जाम और संकरी सड़कें।
- फ्लाईओवर और नीचे लटकते तार।
- महँगे और दुर्लभ स्पेयर पार्ट्स।
- अतिरिक्त स्टाफ़ की आवश्यकता, जैसे ऊपरी डेक के लिए दूसरा कंडक्टर।
1984 में मारुति 800 जैसी निजी कारें सस्ती हुईं, और लोगों की बसों पर निर्भरता कम हुई। वहीं, मेट्रो योजनाएँ भी शुरू हुईं। इन कारणों से 1989 में डबल डेकर बसों का संचालन बंद कर दिया गया।
फिर भी, ये बसें दिल्लीवासियों और सेलिब्रिटीज़ की यादों में हमेशा जीवित रहीं।
इलेक्ट्रिक डबल डेकर बसों का आधुनिक अवतार
आज डीटीसी इलेक्ट्रिक डबल डेकर बसों के माध्यम से इस विरासत को पुनर्जीवित करना चाहता है।
- ये बसें पूरी तरह इलेक्ट्रिक और पर्यावरण अनुकूल होंगी।
- पुराने लाल रंग और “सुविधा” सेवा की यादें आधुनिक तकनीक के साथ जीवंत होंगी।
- ऊपरी डेक से दिल्ली का विहंगम दृश्य, ऐतिहासिक स्थलों का अनुभव और आरामदायक सफ़र यात्रियों को आकर्षित करेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल पुरानी यादों का नॉस्टैल्जिया और आधुनिक सुविधा का संगम पेश करेगी।
डबल डेकर बसें: पर्यटक आकर्षण
पर्यटक इन बसों से लाल क़िला, इंडिया गेट, जंतर मंतर और राजपथ का आनंद ले सकते हैं। इलेक्ट्रिक बसों की धीमी गति और शांत ऑपरेशन से यात्रियों को आरामदायक और रोमांचक अनुभव मिलेगा।
साथ ही, स्कूल और कॉलेज के छात्र इन बसों के माध्यम से शैक्षिक और सांस्कृतिक अनुभव भी प्राप्त कर सकते हैं।
FAQs
Q1. डबल डेकर बसें कब लौटेंगी?
A1. डीटीसी ने इलेक्ट्रिक बसों के परीक्षण और रूट निर्धारण की योजना शुरू कर दी है। जल्द ही ये सड़कों पर दिखाई देंगी।
Q2. इन बसों की क्षमता कितनी होगी?
A2. प्रत्येक इलेक्ट्रिक डबल डेकर बस में 80–100 यात्री सफ़र कर सकेंगे।
Q3. क्या ये बसें पर्यावरण अनुकूल हैं?
A3. हाँ, ये पूरी तरह इलेक्ट्रिक और दिल्ली की वायु गुणवत्ता सुधारने में मदद करेंगी।
Q4. क्या ये बसें रोज़मर्रा के सफ़र के लिए भी होंगी?
A4. हाँ, ये दिल्लीवासियों के लिए नियमित परिवहन विकल्प और पर्यटकों के लिए आकर्षक अनुभव दोनों प्रदान करेंगी।
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