40 साल बाद जेपी दत्ता के बयान से हुआ खुलासा, पढ़िए रिपोर्ट!
दी यंगिस्तान, नई दिल्ली।
बॉलीवुड के ‘ही-मैन’ धर्मेंद्र न सिर्फ़ अपने दमदार अभिनय के लिए जाने जाते हैं, बल्कि उनके मानवीय फ़र्ज़ और दरियादिली के किस्से भी इंडस्ट्री में एक मिसाल हैं। हाल ही में एक ताजा रिपोर्ट सामने आई है जिसमें दिग्गज निर्देशक जे.पी.दत्ता ने अपनी कल्ट क्लासिक ‘गुलामी’ (1985) की मेकिंग का एक चौंकाने वाला सच उजागर किया है। यह धर्मेंद्र की दरियादिली ही थी, जिसने दत्ता साहब के करियर की पहली निर्देशित फिल्म को आर्थिक संकट के भंवर से निकालकर कामयाबी के शिखर तक पहुंचाया। 40 साल पहले हुआ यह वाकया, जब एक बड़े स्टार ने फिल्म को बचाने के लिए बिना फीस शूटिंग करने का अभूतपूर्व निर्णय लिया, आज भी धर्मेंद्र की महानता को दर्शाता है। जे.पी.दत्ता का यह बिग रिवील बताता है कि कैसे ‘गुलामी’ का बनना लगभग असंभव हो गया था, और केवल एक अभिनेता के विश्वास और व्यावसायिक नैतिकता ने इस प्रोजेक्ट को बचाया। यह कहानी सिर्फ एक फ़िल्म के निर्माण की नहीं, बल्कि रिश्तों और फ़र्ज़ की है।
जे.पी.दत्ता और धर्मेंद्र: ‘ज्वार भाटा‘ से शुरू हुआ अनोखा जुड़ाव
जे.पी.दत्ता और धर्मेंद्र का संबंध केवल ‘गुलामी’ तक सीमित नहीं था, बल्कि इसकी जड़ें पुरानी थीं। जे.पी.दत्ता ने बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर अपना पहला क्लैप शॉट 1973 में आई फ़िल्म ‘ज्वार भाटा’ के सेट पर दिया था। और वह क्लैप शॉट किसी और के लिए नहीं, बल्कि धर्मेंद्र के लिए ही था। यह शुरुआती जुड़ाव दोनों के बीच एक गहरा सम्मान पैदा कर चुका था। यह इत्तेफाक ही था जो आगे चलकर एक ऐतिहासिक सहयोग में बदल गया।
पिता ओ.पी.दत्ता से जुड़ा पुराना बॉलीवुड किस्सा
शूटिंग के दौरान, धर्मेंद्र ने जे.पी.दत्ता को एक और दिलचस्प संयोग बताया। उन्होंने कहा कि मुंबई में उन्होंने पहली बार जिस फ़िल्म की शूटिंग देखी थी, वह जे.पी.दत्ता के पिता, ओ.पी.दत्ता द्वारा निर्देशित ‘आंगन’ (1959) थी। यह कनेक्शन, जो दशकों पुराना था, जे.पी.दत्ता के परिवार के प्रति धर्मेंद्र के गहरे सम्मान को दर्शाता है, जिसने बाद में संकट के समय में एक अटूट विश्वास का रूप ले लिया।
विनोद खन्ना का सन्यास: जब ‘गुलामी‘ पर मंडराया पहला संकट
जे.पी.दत्ता मूल रूप से ‘गुलामी’ विनोद खन्ना के साथ बनाना चाहते थे और मुहूर्त भी शूट हो चुका था। लेकिन तभी विनोद खन्ना ने अप्रत्याशित रूप से सन्यास लेकर ओशो के पास अमेरिका जाने का फैसला किया। यह जे.पी.दत्ता के लिए एक बड़ा झटका था, क्योंकि उनकी एक और फिल्म ‘सरहद’ (जिसमें मिथुन चक्रवर्ती थे) भी रुक गई थी। ‘गुलामी’ जे.पी.दत्ता का ड्रीम प्रोजेक्ट था, जिसे वह किसी भी कीमत पर पूरा करना चाहते थे।
विनोद खन्ना के जाने के बाद, जे.पी.दत्ता के दिमाग में सबसे पहले धर्मेंद्र का नाम आया। स्क्रिप्ट सुनते ही धर्मेंद्र को कहानी पसंद आ गई और उन्होंने तुरंत हामी भर दी।
धर्मेंद्र का फ़र्ज़: आर्थिक तूफान और ‘बिना फीस शूटिंग‘ का साहसिक निर्णय
‘गुलामी’ की शूटिंग शुरू होने के कुछ ही दिन बाद, प्रोड्यूसर हबीब नाडियाडवाला पर बड़ा संकट आ गया। उनके पिता करीम नाडियाडवाला के निधन के बाद, हबीब गंभीर आर्थिक तंगी में आ गए। उन्होंने जे.पी.दत्ता को बताया कि फ़िल्म के राजस्थान शेड्यूल के लिए उनके पास सिर्फ तीन लाख रुपए बचे हैं।
जे.पी.दत्ता ने हबीब से कहा कि इस शेड्यूल को तभी पूरा किया जा सकता है जब एक्टर्स की फीस फ़िलहाल रोक दी जाए। यह ज़िम्मेदारी जे.पी.दत्ता ने खुद ली और वह सीधे धर्मेंद्र के पास पहुँचे। धर्मेंद्र एक सप्ताह की शूटिंग कर चुके थे और जे.पी.दत्ता के डायरेक्शन सेंस को पहचान चुके थे। धर्मेंद्र की प्रतिक्रिया अभूतपूर्व थी।
“जब जे.पी.दत्ता ने उन्हें सारी स्थिति से अवगत कराया, तो धर्मेंद्र फौरन बिना पैसे आगे की शूटिंग करने को तैयार हो गए। उन्होंने कहा कि सारा पैसा फिल्म पर खर्च किया जाए, फीस बाद में ले लेंगे।”
यह फैसला केवल सहयोग नहीं था, बल्कि धर्मेंद्र के उस पेशेवर फ़र्ज़ का प्रदर्शन था, जिसकी आज के बॉलीवुड में मिसालें कम मिलती हैं।
नसीरुद्दीन शाह, स्मिता पाटिल समेत अन्य कलाकारों का सामूहिक सहयोग
जब यूनिट के अन्य दिग्गज कलाकारों—स्मिता पाटिल, मिथुन चक्रवर्ती, नसीरुद्दीन शाह, अनिता राज और रीना रॉय—को पता चला कि धर्मेंद्र ने फीस न लेने का फैसला किया है, तो सभी ने इसका समर्थन किया। धर्मेंद्र के इस त्याग ने एक सामूहिक सहयोग की भावना पैदा की, जिससे राजस्थान शेड्यूल सफलतापूर्वक पूरा हो सका। जे.पी.दत्ता ने इस बात पर जोर दिया कि ‘गुलामी’ अगर पूरी बनी तो वह सिर्फ और सिर्फ धर्मेंद्र के अटूट विश्वास और समर्थन की वजह से। यह एक नई मिसाल थी कि कैसे बॉलीवुड के बड़े स्टार्स संकट में एक साथ खड़े हो सकते हैं।
धर्मेंद्र द्वारा ‘गुलामी’ के निर्माण के दौरान निभाया गया यह फ़र्ज़ केवल एक फिल्मी किस्सा नहीं है, बल्कि एक प्रेरणादायक दस्तावेज़ है। यह बताता है कि एक सच्चा कलाकार अपने काम को किसी भी व्यावसायिक लाभ से ऊपर रखता है। धर्मेंद्र ने जे.पी.दत्ता के सपने को बचाने के लिए जो त्याग किया, उसने जे.पी.दत्ता के करियर की मजबूत नींव रखी और उन्हें ‘बॉर्डर’ जैसी फिल्मों के लिए तैयार किया। आज, 40 साल बाद भी, यह धर्मेंद्र की दरियादिली भारतीय सिनेमा में एक चमकते सितारे की तरह है, जिसका प्रभाव आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक मजबूत नैतिक मानक तय करता है। यह किस्सा हमेशा धर्मेंद्र की महानता की याद दिलाएगा।
Q&A Section:
Q1: ‘गुलामी‘ फिल्म पर आर्थिक संकट आने पर धर्मेंद्र ने क्या फैसला लिया था?
A: धर्मेंद्र ने फिल्म के प्रोड्यूसर हबीब नाडियाडवाला को आर्थिक संकट से उबारने के लिए, बिना किसी फीस के राजस्थान शेड्यूल की बाकी शूटिंग करने का फैसला लिया था।
Q2: जे.पी.दत्ता के पिता ओ.पी.दत्ता का धर्मेंद्र से क्या कनेक्शन था?
A: धर्मेंद्र ने जे.पी.दत्ता को बताया था कि उन्होंने मुंबई में सबसे पहले जिस फ़िल्म की शूटिंग देखी थी, वह जे.पी.दत्ता के पिता ओ.पी.दत्ता द्वारा निर्देशित ‘आंगन’ (1959) थी।
Q3: ‘गुलामी‘ से पहले जे.पी.दत्ता किसे मुख्य भूमिका में लेना चाहते थे?
A: ‘गुलामी’ से पहले जे.पी.दत्ता ने विनोद खन्ना को मुख्य भूमिका में लेने की योजना बनाई थी और मुहूर्त भी शूट कर लिया था, लेकिन विनोद खन्ना ने सन्यास ले लिया था।
Q4: धर्मेंद्र के बिना फीस काम करने के बाद अन्य कलाकारों की क्या प्रतिक्रिया थी?
A: जब स्मिता पाटिल, मिथुन चक्रवर्ती और नसीरुद्दीन शाह जैसे अन्य बड़े कलाकारों को धर्मेंद्र के फैसले का पता चला, तो वे सब भी बिना पैसों के राजस्थान शेड्यूल की शूटिंग पूरी करने के लिए तैयार हो गए थे।
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