युवाओं समेत विद्यार्थियों के लिए अहम है जानकारी
दी यंगिस्तान, नई दिल्ली।
दिमाग तेज करें! क्या आप अपने मस्तिष्क की क्षमता को अधिकतम करना चाहते हैं? क्या आप एक अधिक सक्रिय, तेज और एकाग्र दिमाग चाहते हैं? आधुनिक जीवनशैली की चुनौतियों के बीच, हमारे मस्तिष्क को स्वस्थ और सक्रिय रखना सबसे बड़ी जरूरत बन गई है। स्वामी शैलेन्द्र सरस्वती ने इसी विषय पर प्रकाश डालते हुए ‘दिमाग को तेज़ बनाने के लिए 5 जरुरी बातें’ बताई हैं।
इन बातों का पालन करके आप न केवल अपनी एकाग्रता (concentration) और स्मरण शक्ति (memory) को बढ़ा सकते हैं, बल्कि जीवन में एक नई ऊर्जा और सक्रियता भी ला सकते हैं। स्वामीजी के ये सुझाव वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
सम्यक् भोजन: मस्तिष्क का ईंधन
स्वामीजी के अनुसार, पहली सबसे महत्वपूर्ण बात है सम्यक् भोजन।
- सोया हुआ मस्तिष्क: स्वामीजी बताते हैं कि जो लोग गरिष्ठ (भारी) भोजन करते हैं, उनका मस्तिष्क ‘सोया-सोया’ सा रहता है। भारी और तामसिक भोजन मस्तिष्क की सक्रियता को कम कर देता है।
- सक्रियता के लिए आहार: मस्तिष्क को पूरी तरह ‘जागृत’ और ‘थ्रो’ करने देने के लिए पौष्टिक, हल्का और सात्विक भोजन आवश्यक है। यह सुनिश्चित करता है कि आपके मस्तिष्क को सही पोषक तत्व (nutrients) मिलें, जो उसे पूरी क्षमता से कार्य करने में मदद करें।
- क्या करें: संतुलित, हल्का, और ताजा भोजन लें। प्रोसेस्ड फूड, अत्यधिक वसा (fat) और शर्करा (sugar) वाले खाद्य पदार्थों से बचें।
सम्यक् श्रम: शरीर और मस्तिष्क का सर्कुलेशन
दूसरी आवश्यक बात सम्यक् श्रम या शारीरिक मेहनत है।
- सर्कुलेशन का महत्व: शरीर के लिए मेहनत करना बहुत जरूरी है। शारीरिक श्रम से हमारे भीतर का रक्त संचार (circulation) बढ़ता है।
- मस्तिष्क में रक्त प्रवाह: जब शरीर में सर्कुलेशन बढ़ता है, तो मस्तिष्क में भी पर्याप्त रक्त संचार होता है। मस्तिष्क को ठीक से काम करने के लिए पर्याप्त और ऑक्सीजन युक्त रक्त की जरूरत होती है।
- आधुनिक जीवनशैली की चुनौती: स्वामीजी ने आधुनिक युग की जीवनशैली पर चिंता व्यक्त की है, जहाँ लोग शारीरिक मेहनत नहीं करते, सिवाय रिमोट कंट्रोल की बटन दबाने के। इस निष्क्रियता (inactivity) के कारण मस्तिष्क तक पर्याप्त और संयुक्त खून नहीं पहुंच पाता, जितना पहुंचना चाहिए।
- सुझाव: प्रतिदिन कम से कम 30-45 मिनट का मध्यम से तीव्र शारीरिक व्यायाम करें – जैसे तेज चलना, दौड़ना, योग या कोई खेल खेलना।
प्राणायाम: ऑक्सीजन की प्रचुरता
तीसरी महत्वपूर्ण बात है प्राणायाम।
- ऑक्सीजन की कमी: खासकर शहरों में रहने वाले लोग एयर-टाइट घरों में रहते हैं, जहाँ बाहर की ताजी हवा भीतर नहीं आ पाती, जिससे हवा में ऑक्सीजन की मात्रा कम रहती है।
- मस्तिष्क और ऑक्सीजन: यदि मस्तिष्क को पर्याप्त ऑक्सीजन (oxygen) नहीं मिलेगी, तो वह ठीक से एक्टिव नहीं हो पाएगा। ऑक्सीजन मस्तिष्क की कोशिकाओं (neurons) के लिए जीवनदायिनी है।
- उपाय: स्वामीजी जोर देते हैं कि हमें खुली जगह (open space) में बैठकर प्राणायाम करना चाहिए। प्राणायाम (जैसे अनुलोम-विलोम, भस्त्रिका) से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है और शरीर तथा मस्तिष्क को प्रचुर मात्रा में ऑक्सीजन मिलती है।
- निष्कर्ष: पर्याप्त भोजन मिले, शारीरिक मेहनत हो, और प्राणायाम के माध्यम से ऑक्सीजन की प्रचुरता हो – तभी हमारा शरीर और मस्तिष्क पूरी तरह सक्रिय हो सकते हैं।
आज्ञा चक्र पर ध्यान: तृतीय नेत्र का जागरण (Third Eye Activation)
चौथी बात आज्ञा चक्र (Ajna Chakra) पर ध्यान है, जो मुख्य रूप से वयस्कों (Adults) के लिए है।
- ध्यान का केंद्र: आज्ञा चक्र दोनों भौंहों (eyebrows) के मध्य (जिसे ‘तिलक’ या ‘टीका’ लगाते हैं) स्थित होता है। यह ध्यान और एकाग्रता का केंद्र है।
- एकाग्रता का विकास: स्वामीजी सलाह देते हैं कि इस बिंदु पर चंदन या टीके लगाकर, अपने मन और ध्यान को वहाँ एकत्र (Concentrate) करें। यह ध्यान मस्तिष्क की सूक्ष्म शक्तियों को जागृत करता है और एकाग्रता को बढ़ाता है।
- वैज्ञानिक आधार: यह क्षेत्र पीनियल ग्रंथि (Pineal Gland) से जुड़ा माना जाता है, जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। इस पर ध्यान करने से शांति और मानसिक स्पष्टता मिलती है।
- बच्चों के लिए विशेष: 7 से 15 साल के बच्चों के लिए, स्वामीजी ने ‘मिडब्रेन एक्टिवेशन’ (Midbrain Activation) प्रोग्राम का सुझाव दिया है। यह कार्यक्रम छोटी उम्र में बहुत ही असरदार होता है और 4 दिन में ही इतना सक्रिय कर सकता है कि बच्चे बिना आँख खोले पढ़ सकते हैं, चीजों का रंग जान सकते हैं। इसे “शिवनेत्र” या “थर्ड आई” क्षमता का विकास भी कहा जाता है।
पर्याप्त नींद: विश्राम और सक्रियता का संतुलन
पांचवी और सबसे महत्वपूर्ण बात है पर्याप्त नींद (Adequate Sleep)।
- नींद क्यों जरूरी है: मस्तिष्क को ठीक से कार्य करने के लिए ठीक से विश्राम (Rest) मिलना अत्यंत आवश्यक है।
- आधुनिक चुनौती: आधुनिक संचार माध्यमों (टेलीविजन, मोबाइल, व्हाट्सएप, फेसबुक) के कारण लोगों की नींद के घंटे कम हो गए हैं।
- विश्राम से सक्रियता: यदि मस्तिष्क को ठीक से विश्राम नहीं मिला, तो यह उत्तम ढंग से कार्य नहीं करेगा। इसका लहसुन (assimilation) नहीं होगा और एक्टिवेशन भी ठीक से नहीं हो पाएगा।
- निष्कर्ष: ठीक से सोने पर ही आप ठीक से ‘जाग’ पाएंगे। मस्तिष्क की मरम्मत (repair) और सूचनाओं के समेकन (consolidation) के लिए 7-9 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद (Quality Sleep) लेना सुनिश्चित करें।
मस्तिष्क को सक्रिय रखने का सूत्र
| क्र.सं. | आवश्यक बात | उद्देश्य |
| 1. | सम्यक् भोजन | मस्तिष्क को हल्का और सात्विक ईंधन देना। |
| 2. | सम्यक् श्रम | मस्तिष्क में पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन सर्कुलेशन बढ़ाना। |
| 3. | प्राणायाम | मस्तिष्क को प्रचुर मात्रा में ऑक्सीजन (ताजी हवा) प्रदान करना। |
| 4. | आज्ञा चक्र पर ध्यान | एकाग्रता और आंतरिक शक्ति को बढ़ाना (बच्चों के लिए मिडब्रेन एक्टिवेशन)। |
| 5. | पर्याप्त नींद | मस्तिष्क को विश्राम देना और सक्रियता के लिए तैयार करना। |
Q&A (सवाल-जवाब)
Q1: स्वामीजी ने दिमाग को तेज़ करने के लिए कितनी बातें बताई हैं?
A: स्वामी शैलेन्द्र सरस्वती ने दिमाग को तेज़ करने के लिए 5 जरुरी बातें बताई हैं।
Q2: गरिष्ठ भोजन मस्तिष्क पर क्या असर डालता है?
A: स्वामीजी के अनुसार, गरिष्ठ भोजन करने वालों का मस्तिष्क ‘सोया-सोया’ सा रहता है और पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाता।
Q3: प्राणायाम क्यों जरूरी है?
A: प्राणायाम से खुली हवा में प्रचुर मात्रा में ऑक्सीजन मिलती है, जो मस्तिष्क को ठीक से एक्टिव होने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
Q4: 7 से 15 साल के बच्चों के लिए स्वामीजी ने क्या विशेष सुझाव दिया है?
A: बच्चों के लिए उन्होंने ‘मिडब्रेन एक्टिवेशन’ प्रोग्राम का सुझाव दिया है, जो उनकी एकाग्रता और थर्ड आई क्षमता को सक्रिय करता है।
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