Yogmaya Temple: दिल्ली के अस्तित्व से भी पुराना है इस मंदिर का इतिहास, पांडवों से है गहरा नाता

दी यंगिस्तान, नई दिल्ली।

राजधानी दिल्ली के महरौली में कुतुब मीनार के पास स्थित Yogmaya Temple Delhi न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह दिल्ली के जीवित इतिहास का एक प्रमाण भी है। माना जाता है कि जब दिल्ली का अस्तित्व ‘इंद्रप्रस्थ’ के रूप में भी नहीं था, तब से यह मंदिर यहाँ मौजूद है। स्थानीय मान्यताओं और हिंदू ग्रंथों के अनुसार, इस मंदिर की स्थापना स्वयं पांडवों ने महाभारत युद्ध के बाद की थी।

आज के आधुनिक दौर में भी योगमाया मंदिर अपनी प्राचीन साख बनाए हुए है। हाल ही में हेरिटेज कंजर्वेशन के नए डेटा बताते हैं कि यह दिल्ली के उन गिने-चुने 5 मंदिरों में से एक है जो महाभारत काल के माने जाते हैं।

पांडवों और श्रीकृष्ण से जुड़ा पौराणिक संबंध

भागवत पुराण के अनुसार, योगमाया वही दैवीय शक्ति हैं जिन्होंने कंस के कारागार में श्रीकृष्ण की रक्षा की थी।

  • विजय का प्रतीक: कहा जाता है कि खांडव प्रस्थ (पुरानी दिल्ली का क्षेत्र) को जलाकर जब अर्जुन और कृष्ण निवृत्त हुए, तो इस महान विजय और भगवान की योग शक्ति के सम्मान में पांडवों ने यहाँ मंदिर बनवाया।
  • तोमर राजपूतों का योगदान: बाद में, जब तोमरवंशीय राजा अनंगपाल ने लाल कोट (महरौली) में दिल्ली बसाई, तो वे चंद्रवंशी होने के नाते देवी योगमाया के अनन्य भक्त बन गए और मंदिर का विस्तार किया।

मुगल काल और वर्तमान स्वरूप (1827 का इतिहास)

आज जो हम मंदिर का ढांचा देखते हैं, वह बहुत प्राचीन नहीं बल्कि 1827 में पुनर्निर्मित किया गया है।

  • अकबर द्वितीय का काल: मुगल सम्राट अकबर द्वितीय के शासनकाल में लाला सेठमल ने इस मंदिर का वर्तमान स्वरूप बनवाया था।
  • वास्तुकला: मंदिर का अहाता 400 फुट मुरब्बा है, जिसके चारों कोनों पर बुर्जियां बनी हैं। मंदिर के गर्भगृह में कोई मूर्ति नहीं है, बल्कि एक काले पत्थर की गोलाकार पिंडी है, जो संगमरमर के कुंड में स्थापित है।

फूलवालों की सैर: हिंदू-मुसलमान एकता का प्रतीक

इस मंदिर की सबसे खास बात यहाँ आयोजित होने वाला वार्षिक उत्सव फूलवालों की सैर है।

“यह उत्सव करीब 150 साल पहले मुगल काल में शुरू हुआ था। इसमें हिंदू और मुसलमान मिलकर भाग लेते हैं। बुधवार को योगमाया मंदिर में फूलों का पंखा चढ़ाया जाता है और अगले दिन कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की दरगाह पर चादर।”

यह परंपरा आज भी दिल्ली की ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ को जीवित रखे हुए है।

दिल्ली की विरासत का केंद्र

Yogmaya Temple Delhi History हमें याद दिलाती है कि दिल्ली की जड़ें कितनी गहरी हैं। यह स्थान देवी के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में गिना जाता है, जहाँ सात्विक पूजा होती है और मांस-मदिरा का चढ़ावा पूरी तरह वर्जित है। यदि आप दिल्ली के वास्तविक इतिहास और आध्यात्मिकता को करीब से देखना चाहते हैं, तो महरौली का यह मंदिर आपकी लिस्ट में जरूर होना चाहिए।

FAQ Section

Q1. योगमाया मंदिर दिल्ली में कहाँ स्थित है?

A-यह दक्षिण दिल्ली के महरौली इलाके में कुतुब कॉम्प्लेक्स के पास स्थित है।

Q2. क्या योगमाया मंदिर पांडवों ने बनवाया था?

A-हाँ, पौराणिक कथाओं के अनुसार महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने ही इस स्थान पर देवी की स्थापना की थी।

Q3. मंदिर के दर्शन का समय क्या है?

A-मंदिर आमतौर पर सुबह 5:00 बजे से रात 8:30 बजे तक खुला रहता है। श्रावण मास में यहाँ विशेष मेला लगता है।

Q4. फूलवालों की सैर उत्सव कब शुरू हुआ?

A-यह 19वीं शताब्दी की शुरुआत में अकबर द्वितीय के समय में शुरू हुआ था और आज भी सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक है।

Q5. क्या मंदिर में फोटोग्राफी की अनुमति है?

A-मंदिर के मुख्य गर्भगृह के अंदर फोटोग्राफी वर्जित हो सकती है, परिसर में आप अनुमति लेकर फोटो ले सकते हैं।

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