टीवी आदि में चल रहे जंक फूड के विज्ञापनों का बच्चों पर पड़ता है असर
दी यंगिस्तान, नई दिल्ली।
Kid: आप टीवी देख रहे हैं….इंटरनेट पर वीडियो देख रहे हैं…..अक्सर बड़े ब्रांडों के जंक फूड के विज्ञापन दिखाई देते हैं। ये विज्ञापन हर थोड़े समय के अंतराल पर आते हैं। बड़ों पर तो इन विज्ञापनों का असर नहीं होता लेकिन क्या आपको पता है कि छोटे बच्चे इन पांच मिनट के विज्ञापनों के चलते भी मोटे हो रहे हैं।
जी हां…यह सच है। यह हम नहीं बल्कि हाल ही में हुई एक शोध से इसकी पुष्टि हुई है। एक चौंकाने वाले अध्ययन में सामने आया है कि महज पांच मिनट का जंक फूड का विज्ञापन देखने के बाद बच्चों की भूख इतनी बड़ जाती है कि वे उस दिन 130 कैलोरी अतिरिक्त खाते हैं।
240 बच्चों पर किया गया शोध
यूरोपियन ओबेसिटी कांग्रेस, मलागा (स्पेन) में यह रिसर्च पेपर प्रस्तुत किया गया। इसमें मर्सीसाइड (UK) के 240 बच्चों (7 से 15 वर्ष) को शामिल किया गया।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ब्रांड-आधारित विज्ञापन, जो सिर्फ लोगो या नाम दिखाते हैं, बच्चों को प्रभावित करने में भी उतने ही सक्षम हैं जितने कि खाने की तस्वीरों वाले विज्ञापन।
क्या कहता है शोध?
रिसर्च के दौरान बच्चों को दो बार अलग-अलग दिन, 5-5 मिनट के जंक फूड विज्ञापन और गैर-खाद्य विज्ञापन दिखाए गए।
उसके बाद उन्हें स्नैक्स (अंगूर या चॉकलेट) और फिर दोपहर के खाने में मीठे, नमकीन और हेल्दी विकल्प दिए गए।
जिन बच्चों ने जंक फूड विज्ञापन देखा, उन्होंने औसतन 58 कैलोरी ज्यादा स्नैक्स और 73 कैलोरी ज्यादा लंच में खाया।

ब्रांड लोगो भी बच्चों की भूख बढ़ाते हैं
लिवरपूल विश्वविद्यालय की प्रोफेसर एम्मा बॉयलैंड के मुताबिक, यह पहली बार है जब सिद्ध हुआ है कि सिर्फ़ ब्रांडिंग (जैसे McDonald’s, KFC, Cadbury, Walkers, Domino’s) को देखने मात्र से भी बच्चे ज्यादा खाते हैं।
“यह दिखाता है कि ब्रांडिंग और भावनात्मक जुड़ाव बच्चों पर कितना गहरा असर डालते हैं — वो भी तब जब वे स्कूल जाने की उम्र तक भी नहीं पहुंचे होते।

रात के 9 बजे तक विज्ञापनों पर रोक
ब्रिटेन सरकार अक्टूबर 2025 से रात 9 बजे तक टीवी और ऑनलाइन जंक फूड विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने जा रही है।
लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इस नीति में एक बड़ी खामी है — क्योंकि ब्रांड-ओनली विज्ञापन (जो सिर्फ़ लोगो दिखाते हैं) अभी भी प्रसारित किए जा सकेंगे।
ओबेसिटी हेल्थ अलायंस की निदेशक कैथरीन जेनर ने कहा, “ये छोटे-छोटे कैलोरी अंतर भी बच्चों के स्वास्थ्य में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। अगर सरकार सच में बच्चों को जंक फूड से बचाना चाहती है, तो उसे इन ब्रांड विज्ञापनों पर भी सख्ती करनी होगी।
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