अंग्रेजों के इस निर्णय के चलते 1857 की क्रांति में मुगलों ने लिया हिस्सा?

1857 की क्रांति: ब्रितानिया हुकूमत ने मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर के बेटे मिर्जा जवां बख्त को जब तख्त पर बैठने नहीं दिया तो इसके दूरगामी परिणाम निकले। इससे दिल्ली में शहजादों की उम्मीद की आखरी किरण को भी बुझाकर कि वह कभी जफर के जानशीन नहीं हो सकते, अंग्रेज़ों ने ऐसे हालात पैदा कर दिए कि अब किसी को भी यह डर नहीं रहा कि वह कुछ खो देंगे। और सब इस पर तैयार हो गए कि अपने हालात बेहतर करने के लिए वह कुछ भी कर सकते हैं। यह एक ऐसी विनाशकारी ग़लती थी जिसकी भारी कीमत उनको जल्द ही देनी थी ।

दिल्ली की बढ़ती हुई बेचैनी का एक प्रदर्शन मिर्ज़ा फख़रू की मौत के आठ महीने बाद हुआ। मार्च 1857 में सवेरे-सवेरे एक इश्तहार (जिसे थियो ने कागज़ का गंदा टुकड़ा कहकर–जिस पर नंगी तलवार और ढाल बनी थी–ख़ारिज कर दिया) जामा मस्जिद की पिछली दीवार पर चिपका दिया गया।” उसमें लिखा था कि ईरान के बादशाह की तरफ से ऐलान किया जाता है कि एक ब्रिटिश मुहिम की फौज को ईरानी सिपाहियों ने ज़बर्दस्त शिकस्त दी है और अब ईरानी फ़ौजों ने अफ़गान सरहद को पार कर लिया है और हिरात से हिंदुस्तान की तरफ रवाना हो रही हैं ताकि दिल्ली को ईसाइयों की हुकूमत से निजात दिला सकें।

“इंशाअल्लाह वह वक्त दूर नहीं है जब मैं हिंद की सरजमीन पर कदम रखूंगा और वहां के बादशाह और रिआया दोनों को खुश कर दूंगा। जिस तरह अंग्रेज़ों ने उनको आराम और खुराक दोनों से महरूम कर दिया है, उसी तरह में उनकी खुशहाली बढ़ाने की कोशिश करूंगा। और सब लोग आगाह हों कि हमको किसी के धर्म पर ऐतराज नहीं होगा। 6 मार्च तक, 900 ईरानी सिपाही अपने अफसरों के साथ हिंदुस्तान पहुंच जाएंगे। अभी भी दिल्ली में 500 ईरानी सिपाही भेस बदलकर मौजूद हैं। इस अरसे में मुसलमानों को ईसाइयों की किसी तरह मदद करनी चाहिए न उनसे अच्छा सुलूक करना चाहिए और यह भी जरूरी है कि जहां तक मुमकिन हो वह आपस में एक-दूसरे के वफादार रहें।

यह इश्तहार तीन घंटे तक लगा रहा और वहां एक बड़ा मजमा उसको पढ़ने के लिए जमा हो गया जब तक थियो मैटकाफ ने जो वहां से गुज़र रहा था उसे देखकर फाड़ न डाला। लेकिन अगले दिन उसका पूरा मजमून दरबार के अख़बार ‘सिराजुल अख़बार’ में प्रकाशित कर दिया गया। जिससे शहर भर में एक जोश की लहर दौड़ गई। हालांकि अख़बार ने इस ख़बर की सदाकत सच्चाई और ईरानी फौजों का अंग्रेज़ों पर फतेह पाने की हकीकत पर सवाल उठाया।

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