दो पत्रकारों का सफर: कबाड़ से सजावट के सामान तक
दी यंगिस्तान, नई दिल्ली।
Shark Tank India: शार्क टैंक इंडिया के चौथे सीजन में एक ऐसा स्टार्टअप सामने आया, जिसने कबाड़ से सुंदर और उपयोगी चीजें बनाकर एक नया रुझान शुरू किया है। यह स्टार्टअप है “कवि” (Kavi), जो कबाड़ और विशेष रूप से कांच की बोतलों को अपसाइकिल करके घर की सजावट के सामान और अन्य उत्पाद बनाता है। इस स्टार्टअप की शुरुआत 2012 में नोएडा के रहने वाले अमित, उनकी पत्नी सौम्या और माधुरी ने की थी। अब यह स्टार्टअप ₹6 करोड़ के टर्नओवर तक पहुंच चुका है, जो पहले सिर्फ ₹2000 से शुरू हुआ था।
कवि की अनोखी शुरुआत
कवि एक सोशल इंपैक्ट स्टार्टअप है, जिसका उद्देश्य कचरे से नए उत्पाद बनाना और पर्यावरण को बचाना है। अमित और माधुरी पहले पत्रकार थे, लेकिन एक इवेंट में महंगे आर्टवर्क को देखकर उन्हें यह विचार आया कि वे भी कुछ ऐसा ही बना सकते हैं। उन्होंने कुछ प्रोडक्ट बनाकर फेसबुक पेज पर डाले और उम्मीद की थी कि लोग कमेंट करेंगे। लेकिन, लोग उन्हें खरीदने के लिए संपर्क करने लगे और इस तरह उनके बिजनेस की शुरुआत हो गई। शुरुआत में ही उन्होंने अपने उत्पाद ₹2500 में बेचे, और धीरे-धीरे उनकी पहचान बनने लगी।
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कवि की सफलता की कहानी
2017 में कवि के लिए किस्मत ने एक बड़ा मोड़ लिया। हैदराबाद में एक एग्जिबिशन के दौरान, जहां आने-जाने का खर्च एक कंपनी ने उठाया, उन्होंने 18 उत्पादों को वहां रखा और वह भी बिक गए। इस सफलता के बाद एक कंपनी ने 5000 प्रोडक्ट का ऑर्डर दे दिया। इसके लिए उन्होंने 3-4 फैक्ट्रियों की छत किराए पर लीं और वहां टेंट लगाकर ऑर्डर पूरा किया। यह ऑर्डर करीब ₹27 लाख का था और इसके बाद उनका बिजनेस लगातार बढ़ता गया।
बूटस्ट्रैप्ड कंपनी
कवि की कंपनी अभी पूरी तरह से बूटस्ट्रैप्ड है, यानी इन्हें बाहरी निवेश से कोई फंडिंग नहीं मिली है। कंपनी का 40-40% हिस्सा अमित और माधुरी के पास है, जबकि 20% की इक्विटी अमित की पत्नी सौम्या के पास है। कवि का मुख्य टारगेट ग्रुप 20 से 45 साल के लोग हैं, और कंपनी का रिपीट रेट 15% है। कंपनी का आधा बिजनेस B2B (Business to Business) है, जबकि बाकी B2C (Business to Customer) है। इस साल कंपनी का टारगेट ₹6 करोड़ का टर्नओवर है, जबकि पिछले साल कंपनी ने ₹3.56 करोड़ की बिक्री की थी।
कवि का शानदार योगदान
कवि ने अब तक 10 लाख कांच की बोतलों का पुनर्चक्रण किया है, और उनका विजन है कि एक भी कांच की बोतल लैंडफिल तक न पहुंचे। इसके लिए उन्होंने दिल्ली-एनसीआर में 200 रैग पिकर्स का नेटवर्क तैयार किया है, जो इन कांच की बोतलों को इकट्ठा करते हैं। इन रैग पिकर्स की कमाई भी इस स्टार्टअप से जुड़ने के बाद चार गुना बढ़ गई है।
शार्क टैंक इंडिया में फंडिंग का प्रयास
कवि के फाउंडर्स ने शार्क टैंक इंडिया में अपने स्टार्टअप के लिए 1.5% इक्विटी के बदले ₹60 लाख की फंडिंग की मांग की थी, लेकिन उन्हें फंडिंग नहीं मिली। रितेश अग्रवाल ने हालांकि 100 लैंप शेड का ऑर्डर दिया और कहा कि यदि उत्पाद अच्छे लगे तो और ऑर्डर भी देंगे। इसके अलावा, पीयूष ने सलाह दी कि फैक्ट्री में विशेष रूप से सक्षम व्यक्तियों को काम पर रखा जाए, जिससे बिक्री और बढ़ सकती है। अमन ने पोएट्री को हटाकर रीब्रांडिंग करने की सलाह दी, और अनुपम तथा नमिता ने भी डील से बाहर जाने का फैसला लिया।
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