-1948 में शुरू हुआ था दिल्ली को चना भटूरे का स्वाद चखाने वाला रेस्टोरेंट

राजधानी के जायके का सफर। जिसमें हर दिन जायकों की लंबी फेहरिस्त जुड़ती जाती है। विविधता ऐसी कि नार्थ इंडियन, मुगलई ही नहीं इटैलियन, अमेरिकन समेत अन्य देशों का जायका यहां आसानी से उपलब्ध है। कदम-कदम पर रेस्टोरेंट स्वाद के शौकीनों को लुभाते हैं। लेकिन स्वाद के मामले में चंद गिने चुने रेस्टोरेंट ही ऐसे हैं, जिन्होंने दिल्लीवासियों का भरोसा कभी नहीं तोड़ा। उन्हीं में शामिल है, कनॉट प्लेस स्थित एंबेसी रेस्टोरेंट जो अपनी स्थापना के 70 साल सेलिब्रेट कर रहा है। दिल्ली को चना भटूरे का स्वाद चखाने वाला यह रेस्टोरेंट आज भी बड़ी शान से वही पुराना स्वाद परोस रहा है। शायद यही वजह है कि आज भी ना सिर्फ दिल्ली को जीने की चाह रखने वाले लोग बरबस ही रेस्टोरेंट चले आते हैं।

मन मोह लेती भव्यता

कनॉट प्लेस डी ब्लॉक में आलीशान गलियारे से गुजरते हुए कलात्मकता लिए हुए अंग्रेजी की लिखावट आकर्षित करती है। द एंबेसी के मुख्य गेट पर ही बोर्ड लगा हुआ है। बड़े दरवाजे के ठीक उपर एक बोर्ड लगा हुआ है, जिस पर रेस्टोरेंट के सन 1948 से खुले होने की बात लिखी है। अंदर प्रवेश करते ही लुटियंस की भव्यता आंखों में समा जाती है। ऊंचे छत, छत पर सफेद एलईडी लाइटों की जगमगाहट, लकड़ी पर खूबसूरत नक्काशी, विस्तृत स्पेस, शांत माहौल में जायके का लुत्फ उठाते लोग। यहां का माहौल ही कुछ ऐसा है कि दिल मानों ठहर सा जाता है।

दोस्ती की मिसाल

रेस्टोरेंट मालिक सुनील मलहोत्रा बताते हैं कि वर्ष 1948 में रेस्टोरेंट की स्थापना हुई थी। दरअसल, वो गर्मियों के दिन थे। कराची में दो दोस्त पीएन मलहोत्रा और जी के घई ने जिंदगी की नई शुरूआत का फैसला लिया। कराची में दोनो का रेस्टोरेंट था। उन्होंने अपना सब कुछ छोड़ दिया। और भारत में बसने का निर्णय लिया और फिर क्या था। दोनों दोस्त अपनी दोस्ती की मिठास लिए दिल्ली पहुंच आए। यहां उन्होंने रेस्टोरेंट खोलने का मन बनाया और जगह सीपी चुनी। इस तरह एंबेसी रेस्टोरेंट अस्तित्व में आया और रेस्टोरेंट के साथ ही दोनों दोस्तों ने जायके के सफर की शुरूआत की।

खाने पर चर्चा

रेस्टोरेंट की सुबह एवं रात भी काफी लोकप्रिय है। यहां सुबह अखबारों की हेडलाइंस पर चर्चा करते बहुतेरे दोस्त आपको मिल जाएंगे। काफी की चुस्की संग खबर की चर्चा यहां बहुत मशहूर है। यह चलन काफी पुराना है। रेस्टोरेंट पदाधिकारी कहते हैं कि कनॉट प्लेस में आफिस ज्यादा है। लोग अपने दोस्तों संग आते हैं एवं फिर कॉफी पीते हुए राजनीतिक बहस करते है। वहीं रात का नजारा भी कमोबेश ऐसा ही होता है। खाना खाते हुए देश दुनिया के ज्वलंत मुद्दो पर चर्चा करते लोगों को आसानी से देखा जा सकता है।

सबसे पहले चखाया चना, भटूरा

एम्बेसी रेस्टोरेंट का चना, भटूरा बहुत ही लोकप्रिय है। ऐसा कहा जाता है कि जब ये रेस्टोरेंट खुला था तो सबसे पहले मेन्यू में चना, भटूरा ही शामिल था। दिल्ली को चना भटूरे का स्वाद चखाने का श्रेय भी एंबेसी रेस्टोरेंट को ही जाता है। 70 साल बाद में भी यहां चना, भटूरा मिलता है। भटूरा इस कदर क्रिस्पी होता है कि एक बार खाने के बाद बार बार यहां आने का मन करता है। जबकि छोले के स्वाद को शब्दों में बयां करना मुश्किल है। पदाधिकारी बताते हैं कि आज भी उसी तर्ज पर चना, भटूरा बनाया जाता है जैसे रेस्टोरेंट खुलने के बाद बनाया जाता था। यही वजह है कि लोग काफी पसंद करते हैं। यहां का समोसा भी काफी प्रसिद्ध है।

मेन्यू जो पसंद आए

सुबह यहां वेजिटेबल समोसा मिलता है। साथ ही चना समोसा, पकौड़ा, चना, भटूरा, एग पकौड़ा, एंबेसी वेज रोल यहां का जबरदस्त है। यहां एक नॉन वेज और वेज क्लब भी है। वेज में थ्री लेयर टोस्टेड सैंडविच है। बर्गर भी यहां कम स्वादिष्ट नहीं है। ग्रीन टी, मसाला टी, असम और दार्जिलिंग टी, कॉफी, कैपेचिनो यहां की बहुत ही स्वादिष्ट है। यहां दाल वडा बर्गर, चिकेन बर्गर, आलू बोंडा बर्गर, समोसा पैटी बर्गर भी चखा जा सकता है। पीनट्स और अमेरिकन कॉर्न चाट, आलू चाट भी लोग पपसंद करते है। साथ ही एंबेसी सिग्नेचर टिक्का, तंदूरी पनीर, हरी मिर्च का पनीर टिक्का, कार्न सीक कबाब भी बेहतरीन है।

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