2014 के लाेकसभा चुनाव प्रचारों में जमकर मैं हू चौकीदार नारा गूंजा। पीएम नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) ने भी चुनाव प्रचार के दौरान खूब यह नारा लगाया। मोदी ने कहा था कि वो देश के चौकीदार बनना चाहते हैं, न कि प्रधानमंत्री। राफेल पर रार के बीच कांग्रेस ने चौकीदार चोर है मुहिम छेड़ी। तब नरेंद्र मोदी ने एक वीडियो ट्वीट किया, जिसमें कई लोग ‘हां, मैं भी चौकीदार हूं’ (main bhi chowkidar campaign) बोलते दिख रहे थे।

पीएम ने कहा, ‘आपका चौकीदार देश की सेवा कर रहा है, लेकिन मैं अकेला नहीं हूं। जो भी भ्रष्टाचार और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ लड़ रहा है, चौकीदार है। ‘इसके बाद बीजेपी के सभी मंत्रियों और नेताओं ने अपने नाम के आगे चौकीदार लगाना शुरू कर दिया। अमित शाह, पीयूष गोयल, जेपी नड्डा और बाकी नेताओं ने ट्विटर पर अपने नाम के आगे ‘चौकीदार’ शब्द जोड़ा। इसके बाद से लाखों लोग ने मै भी चौकीदार हैशटैग से ट्वीट किया।

लेकिन क्या आपकाे पता है कि पहले और दूसरे लोकसभा चुनावों में चौकीदारों का अहम रोल था। 1952 एवं 1957 में हुए चुनावों में इन चौकीदारों के महत्व को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। चुनाव सकुशल सम्पन्न कराने एवं कानून व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने में इन चौकीदारों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया था। करीब डेढ़ लाख से ज्यादा चौकीदारों की तैनाती की गई थी। ये चौकीदार पूरे लगन से चुनाव को सकुशल संपन्न कराए।

विशेष ट्रेनिंग दी गई थी

दिल्ली अभिलेखागार विभाग में मौजूद पहले व दूसरे लोकसभा चुनाव संबंधी दस्तावेजों की मानें तो चुनाव मील का पत्थर साबित हुआ था। पहले चुनाव की तैयारियां सन 1947 के बाद से ही शुरू कर दी गई थी। दिल्ली में चुनाव कराने में कई दिक्कत थी, जिनमें सबसे बड़ी समस्या शरणार्थियों का मतदाता सूची में शामिल कराना था। सन 1947 से 51 के बीच बड़ी संख्या में शरणार्थी दिल्ली आए। ये दिल्ली के अलग अलग इलाकों में कैंप, झुग्गियां डाल बस गए। खैर, चुनावों के एलान के बाद पूरे देश में 132560 पोलिंग स्टेशन एवं 196084 बूथ बनाए गए। पत्येक अधिकारियों को 60 रुपये भत्ता दिया गया था। कुल 9 लाख कर्मचारी चुनाव डयूटी में लगे थे। इसमें 3,38,854 पुलिसकर्मी भी तैनात किए गए थे। यहां दीगर करने वाली बात है कि इसमें बड़ी संख्या चौकीदारों, होमगार्ड की भी थी।

दूसरे लोकसभा चुनाव में लॉ एंड आर्डर मेंटेन करने के लिए 273762 पुलिसकर्मियों के साथ ही 168281 चौकीदारों की भी तैनाती की गई थी। सुभाष आर्या कहते हैं कि हां चुनावों में इनकी तैनाती होती थी। क्यों कि तब पुलिसिया तंत्र इतना व्यापक नहीं था। गांव-देहातों में तो पुलिस लगभग न के बराबर ही होती थी। इसलिए चौकीदार तैनात किए जाते थे। इनका कितना व्यापक असर था लोगों की जिंदगी में इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि शाम के समय ये ही लालटेन जलाते एवं फिर सुबह होने के पहले बुझा देते थे। यह एक तरह से गांव की सुरक्षा का प्रतीक था। चुनाव के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए इन्हें तैनात करने का निर्णय लिया गया था एवं इसी के तहत विशेष ट्रेनिंग दी गई थी। मसलन, बात करने का तरीका, चुनाव बूथ के आसपास माहौल को नियंत्रित करने के लिए किस तरह व्यवहार किया जाए आदि सिखाया गया था। ये मतदाताओं से बड़े सलीके से बात करते एवं उन्हें चुनाव की पर्ची आदि दिलवाने में मदद भी करते थे।

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here