लेखक–मनोज दुबे, वरिष्ठ पत्रकार

बीते 75 वर्षों में उत्तर प्रदेश ने इस देश की राजनीति को सजाया, संवारा और नई दिशा दी है। भारतीय राजनीति की धुरी कहे जाने वाले उत्तर प्रदेश के पन्ने जब भी पलटे जाएंगे, तो यहां सामाजिक और राजनीतिक बदलाव की असंख्य प्रयोगशालाएं देखने को मिलेंगी। लेकिन राजनीति का ‘पावर हाउस’ बने रहने के बावजूद लंबे समय तक यह राज्य अपने सांस्कृतिक और आर्थिक विकास से महरूम रहा। जातिवाद, भाई-भतीजावाद और अपराध ने अपनी जड़ें इतनी गहरी जमा ली थीं कि उस समय की स्थिति देखकर लगता था जैसे यह राज्य इससे निकलने का साहस ही नहीं जुटा पा रहा है।

एक दौर ऐसा था कि उत्तर प्रदेश की दशा और दिशा देखकर जन कवि धूमिल ने लिखा था- भाषा में भदेस हूं, इतना कायर हूं कि उत्तर प्रदेश हूं। लेकिन अब उत्तर प्रदेश बदल रहा है। चुनावों में जातिवाद, भाई-भतीजावाद और अपराध का टूटता गठजोड़ यहां के लोगों की बदलती सोच को परिलक्षित कर रहा है। इसका सकारात्मक परिणाम भी दिख रहा है। आज उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश का ग्लोबल हब बनने की दिशा में बढ़ चुका है। बेहतर कानून व्यवस्था और राज्य के विकास के लिए स्पष्ट नीति हो तो कैसे किसी राज्य का कायाकल्प हो सकता है, इसका उदाहरण उत्तर प्रदेश बनकर उभरा है।

यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि योगी माडल उत्तर प्रदेश के चहुंमुखी विकास को गति दे रहा है। यही वजह है कि आज देश के दूसरे राज्य भी खुले मन से कह और स्वीकार रहे हैं कि एक नए उत्तर प्रदेश का सृजन हो रहा है। इस नए उत्तर प्रदेश में आधुनिकता एवं परंपरा का सम्मिश्रण है, जो जनता को पसंद आ रहा है। एक तरफ अयोध्या, काशी, मथुरा और प्रयागराज को सांस्कृतिक रूप से समृद्ध कर पर्यटन एवं व्यवसाय से जोड़ा जा रहा है, तो दूसरी तरफ एक्सप्रेस-वे का जाल बिछाकर औद्योगिक क्रांति का मार्ग प्रशस्त किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश विदेशी निवशकों की पहली पसंद बन रहा है। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार है। ऐसे में इस राज्य का निवेशकों की पसंद बनना लाजिमी है। तमाम समाचार पत्र बता रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में 24 से ज्यादा देशों ने 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि फरवरी में होने वाले ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-23 से राज्य में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और बढ़ेगा। उत्तर प्रदेश के विकास पर केंद्र और राज्य,  दोनों सरकारों के ध्यान दिए जाने से निवेशकों का आत्मविश्वास बढ़ा है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश में सिंगापुर, अमेरिका, जापान, यूके, कनाडा, जर्मनी और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की कंपनियां निवेश कर रही हैं।

विदेशी कंपनियों की बढ़ती दिलचस्पी को देखते हुए प्रदेश सरकार का भी आत्मविश्वास बढ़ा है और सरकार ज्यादा से ज्यादा निवेश जुटाने में लगी हुई है। फरवरी में उत्तर प्रदेश में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के माध्यम से योगी सरकार ने 10.4 लाख करोड़ रुपये का भारी निवेश सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा है। निवेशक केवल उत्तर प्रदेश की ओर ही रुख करें, इसके लिए इन्वेस्टर्स समिट से पहले सरकार लगभग दो दर्जन नीतियों में व्यापक बदलाव भी कर रही है। इसके अलावा नई औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति लाकर योगी सरकार ने निवेशकों को और ज्यादा आकर्षित करने की कोशिश की है।

प्रदेश में बड़े पैमाने पर निवेशकों के आने से यहां के युवाओं को रोजगार के अवसर भी खूब मिलेंगे और ऐसा होने से सरकार को रोजगार के मुद्दे पर विपक्ष के तानों से कुछ हद तक मुक्ति मिलेगी। इसमें कोई शक नहीं कि कानून व्यवस्था और प्रदेश के बुनियादी ढ़ांचे को दुरुस्त करने में योगी सरकार सफल साबित हुई है। लेकिन इस सच से भी इन्कार नहीं किया जा सकता कि युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए अभी काफी प्रयास करने बाकी हैं। अच्छी बात यह है कि सरकार इस दिशा में गंभीरता से सोच रही है और ईमानदारी पूर्वक प्रयास भी कर रही है। यही वजह है कि नीतियों में ऐसे संशोधन किए गए हैं कि निवेश तो बढ़े ही, रोजगार के अवसर भी ज्यादा पैदा हों और बेरोजगारी जैसे मुद्दे से आगामी लोकसभा चुनाव में सरकार को दो-चार न होना पड़े। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश देश की आर्थिक प्रगति के पथ पर ‘ग्रोथ इंजन’ की भूमिका निभाने का सामर्थ्य रखता है। उनके नेतृत्व में बदलती उत्तर प्रदेश की छवि को देखते हुए ही केंद्र सरकार ने उम्मीद जताई है कि उत्तर प्रदेश का विकास देश के विकास को आगे बढ़ाएगा। वर्तमान समय में चीन में निवेश करने वाली अधिकतर कंपनियां भारत की ओर देख रही हैं। ऐसे में सरकार का प्रयास उत्तर प्रदेश को विकास के पंख लगा सकता है।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट पर नजर डालें तो इस वर्ष 2022 में अब तक 23 फीसद यूरोपिय कंपनियां चीन से बाहर निकल चुकी हैं। ये कंपनियां एशिया में वियतनाम, इंडोनेशिया और भारत में आ रही हैं। हाल के दिनों में यूरोपिय कंपनियों का भारत आने का सिलसिला भी बढ़ा है। क्योंकि इनको भारत का बड़ा बाजार मिल रहा है। ऐसे में आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट सरकार की आकांक्षाओं को मूर्त रूप देने की दिशा में बेहतर मंच साबित हो सकता है। सरकार भी इस बात को अच्छी तरह जानती है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश सरकार के कई मंत्री विदेश दौरे पर हैं। ये मंत्री विभिन्न देशों का दौरा कर वहां की सरकार और उद्योग जगत के दिग्गजों को उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित कर रहे हैं।

इस नए दौर में भारत और अमेरिका के रणनीतिक संबंध भी काफी मजबूत हुए हैं। उत्तर प्रदेश को इसका सीधा लाभ लेने का प्रयास करना चाहिए। प्रदेश को आर्थिक गति प्रदान करने के लिए योगी सरकार को स्थानीय उद्योग पर भी ध्यान देने की जरूरत है। सरकार अगर स्थानीय उद्यमियों को वित्तीय प्रोत्साहन उपलब्ध कराकर उनके उत्पाद की ब्रांडिंग पर ध्यान दे तो यह सेक्टर रोजगार सृजन का भी बड़ा माध्यम साबित होगा। 25 करोड़ की आबादी वाले देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के विकास के लिए बड़े दृष्टिकोण की जरूरत है।

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