शेख नासिरुद्दीन महमूद खानदान चिश्ती के दिल्ली के सबसे आखिरी बुजुर्ग थे। यह हजरत निजामी के सबसे बड़े खलीफाओं में से थे। यह बड़े विद्वान, पवित्र और ईश्वर भक्त थे। यह इस्लाम धर्म के प्रचारक भी थे। जब मखदूम जहांनियां सैयद जलाल मक्का के दर्शनों को गए तो काबा के शरीफ ने इनसे पूछा कि अब जब कि सब संत समाप्त हो चुके हैं, दिल्ली में पवित्र आत्माओं में अब कौन माना जाता है। मखदूम ने उत्तर दिया- नासिरुद्दीन महमूद, और कहा– बस वही एक दिल्ली का चिराग है।

मोहम्मद तुगलक से इनकी भी अनबन थी। उसने इन्हें कष्ट दिए और इन्होंने धैर्यपूर्वक उन्हें सहन किया। फीरोज शाह इनका बड़ा मुरीद था। इनके जीवन काल में ही उसने 1350 ई. में इनकी दरगाह का गुंबद बना दिया था। 1356 ई. में इनकी मृत्यु हो गई और उसी गुंबद में इनको दफन किया गया। इनको एक जालंधरी फकीर ने, जो इनके पास खैरात मांगने आया था, खंजर घोपकर मार डाला था।

 उस वक्त इनकी आयु 82 वर्ष की थी। यह मौजा खिड़की के पास रहा करते थे। जिस कमरे में यह रहते थे, इन्हें उसी में दफन किया गया और इनके साथ इनका सारा सामान इनका झुब्बा, आसा प्याला और बोरिया जो नमाज के काम आता था और जिसे इनके गुरु निजामुद्दीन ने दिया था दफन कर दिया गया। इनका मकबरा एक अहाते के अंदर है, जो 180 फुट लंबा तथा 104 फुट चौड़ा है और 12 फुट ऊंचा है।

इस अहाते का बड़ा हिस्सा और कस्बे के गिर्द की फसील मोहम्मद शाह बादशाह ने 1729 ई. में बनवाई थी। दरगाह का सदर दरवाजा इनकी मृत्यु के बाइस वर्ष बाद 1378 ई. में फीरोज शाह ने बनवाया था, जिस पर एक बड़ा गुंबद है। यह दरवाजा दरगाह के उत्तर-पश्चिम के कोनों में है। इस गुंबद के 12 दर हैं, जिनमें संगखारा के स्तंभ लगे हुए हैं। सब दरों में लाल पत्थर की जालियां लगी हुई हैं। गुंबद चूने और पत्थर का बना हुआ है। गुंबद के अंदर सुनहरा कटोरा लटका हुआ है।

अकबर शाह सानी के जमाने में उसके लड़के शाहजादे मिर्जा गुलाम हैदर ने इस गुंबद के गिर्द लाल पत्थर की जाली लगवा दी थी। इस मकबरे में और बहुत-सी कब्रें हैं, जो खास-खास व्यक्तियों की हैं। गुंबद का फर्श संगमरमर का है और मजार के चारों तरफ संगमरमर का कटारा लगा हुआ है। इस दरगाह के पास चिराग दिल्ली की बस्ती आबाद है। इस बस्ती के गिर्द मोहम्मद शाह बादशाह ने फसील बनवा दी थी, जिसमें चार दरवाजे और एक खिड़की है। चिराग दिल्ली कालका जी के मंदिर से करीब दो मील के अंतर पर कालका- मालवीय नगर – कुतुब रोड पर सड़क के किनारे पड़ती है।

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