‘संस्कारवान कर्मठ युवा – स्वर्णिम विकसित भारत’ की थीम पर पीजीडीएवी सांध्य कॉलेज में वार्षिक सांस्कृतिक उत्सव का आयोजन
दी यंगिस्तान, नई दिल्ली।
pgdav college: हमें समाज में जो अच्छी बातें सीखने को मिलती हैं या समाज से जो मिलता है उसे सभी की भलाई के लिए समाज में पुनः लौटाना चाहिये। इस प्रकार के विचार दिल्ली विश्वविद्यालय के पीजीडीएवी (सांध्य) कॉलेज में वार्षिक सांस्कृतिक उत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में पधारे डी डी न्यूज़ के प्रसिद्ध पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने कहे।
उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि आप सभी ऊर्जा के स्रोत हैं। आपको ही स्वयं अपने समाज व देश का नवनिर्माण करना है। आप अपने दायित्वों का निर्वहन ठीक प्रकार से करें। उनहोंने भगत सिंह, सुखदेव जैसे सैकडों बलिदानियों के बलिदान को याद करके युवाओं में देश के प्रति प्रेम व समर्पण पर बल दिया।
विशिष्ट अतिथि के रूप में पंजाबी सिनेमा की प्रसिद्ध प्रोड्यूसर एवं एक्ट्रेस रवनीत कौर ने कहा कि आप जो भी काम करें वह दिल से लगन लगाकर करें। चाहे जितनी कठिन परिस्थिति आ जाये कभी पीछे मुड़कर ना देखें। मैंने भी अपने जीवन में बहुत उतार-चढ़ाव देखे हैं परंतु कभी हार नहीं मानी। इसलिए आज निरन्तर आगे बढ रही हूँ। आप सभी अपने काम के प्रति हमेशा ईमानदार रहें।

महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर रवीन्द्र कुमार गुप्ता ने कहा कि हमारा कॉलेज भारतीय संस्कृति व परम्पराओं को बढाने और उनका संरक्षण करने का प्रयास करता है। इसी कड़ी में हम कॉलेज के वार्षिक सांस्कृतिक उत्सव को ‘संस्कारवान कर्मठ युवा – स्वर्णिम विकसित भारत’ की थीम पर मना रहे हैं। जब युवा संस्कारवान कर्मठ होगा तभी विकसित भारत बनेगा। इसमें आप सभी छात्र अपना योगदान दें।
इस सांस्कृतिक कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. उदिता अग्रवाल ने कहा कि हम अपनी सांस्कृतिक विरासत को ध्यान में रखकर विभिन्न प्रतियोगिताओं और कार्यक्रमों के द्वारा छात्रों की प्रतिभा का विकास करते हैं। उन्होंने बताया कि इस सांस्कृतिक कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि यहां अनेक प्रतियोगिताओं के साथ रामचरितमानस की चौपाइयों व भजन गायन की प्रतियोगिता भी रखी गई। रामचरितमानस युवाओं के चरित्र के निर्माण में सहायक है।

इस वार्षिक उत्सव में जो भी कार्यक्रम किए गए उनके नाम उसमें हुए कार्यक्रमों से मिलते-जुलते रहे। जैसे सामूहिक गायन के लिए सुर संगम, फोक डांस के लिए संस्कृति व माटी की थाप, वादन के लिए झंकार, वाद-विवाद के लिए विमर्श, हिंदी कविता के लिए काव्यम, संस्कृतगीत के लिए गीत गायन, पोस्टर मेकिंग के लिए चित्रांजलि, चित्रकला के लिए कलाविरासत, फोटोग्राफी के लिए स्वर्णचित्र, शास्त्रीय डांस के लिए ताल, युगल ताल, फोक सिंगिंग के लिए लोक गायन, आलाप, रंगोली के लिए रंगधरा, योग के लिए योगोत्सव, फेस पेंटिंग के लिए मुख्य अलंकरण, फिल्म मेकिंग के लिए चित्र छाया आदि मनमोहक शब्दों का प्रयोग किया गया।
यह कार्यक्रम कॉलेज की सांस्कृतिक समिति कलांजलि द्वारा छात्र यूनियन के संयुक्त तत्वावधान में ‘प्रवाह 2025’ के रूप में दोदिवसीय वार्षिक सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाया गया। इसमें 28 प्रतियोगिताओं में विश्वविद्यालय के 1200 से अधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लिया जो कार्यक्रम की सफलता को दर्शाता है। उद्घाटन समारोह में कॉलेज की छात्रा तनिष्का ने गायत्री मंत्र व सारा ने गणेश वंदना प्रस्तुत करके उद्घाटन सत्र का आरंभ किया।

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