मौजा खैरपुर के पास सफदरजंग के मकबरे से कोई पांच मील के अंतर पर एक पुराने पुल के पास सिकंदर शाह लोदी का मकबरा है, जिसे शायद इब्राहीम लोदी ने बनवाया था। बादशाह की मृत्यु 1517 ई. में आगरा में हुई और लाश को वहां से दिल्ली लाकर दफन किया गया। मकबरे का गुंबद चिराग दिल्ली के मकबरे की तरह एक अहाते में बना हुआ है।

यह एक गहरे ढलवां किनारे पर स्थित है जिस पर सात दरों का पुल बांध दिया गया है। उस पर से जो सड़क जाती थी, वह फीरोजाबाद को सीरी और पुरानी दिल्ली से मिलाती थी। कब्र के सिरहाने जो चिरागदान का खंभा है, वह जैनियों के मंदिर का स्तंभ था। कब गच की बनी हुई है। गुंबद के अंदर तमाम चीनी का काम किया हुआ था। गुंबद की ऊंचाई 24 फुट है। ऊपर जाने को जीना है। गुंबद के पास ही एक बहुत बड़ी बावली बनी हुई है। पहले यहां अहाते में बाग भी लगा हुआ होगा। साथ में एक मस्जिद भी थी।

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