दिल्ली सरकार ने एक सौ साल से अधिक आयु वाले 18 वृक्षों को दिया है हैरीटेज ट्री का दर्जा

कई बार उजड़ी और फिर बसी दिल्ली में डेढ़ दर्जन पेड़ भी यहां के एक शताब्दी पुराने इतिहास की गवाही देते हैं। बेजुबान होने के बावजूद जब भी कोई इनके करीब जाता है तो ऐसा लगता है मानो यह पेड़ उससे बहुत कुछ कहना चाह रहे हों। अपना सालों-दशकों लंबा सुख-दुख बांटना चाह रहे हों। जी हां, हम बात कर रहे हैं दिल्ली के विभिन्न इलाकों में लगे उन 18 पेड़ों की, जिन्हें गत दिल्ली सरकार ने हैरीटेज ट्री अर्थात विरासत वृक्ष का दर्जा दिया है। दरअसल, प्राकृतिक विरासत की पहचान करने और उसे शहर के गौरवशाली इतिहास एवं सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की दिशा में दिल्ली सरकार ने अलग- अलग जगहों पर करीब एक सौ साल पहले लगाए गए इन पेड़ों को ‘विरासत वृक्ष’ का दर्जा दिया है।

यह है योजना

दिल्ली सरकार की योजना है कि इन वृक्षों के बारे में तमाम जानकारी देने वाली एक सूचना पट्टिका बनवाकर वहां लगाई जाएगी। इन वृक्षों के आसपास के इलाके को विशेष रूप से सजाया संवारा जाएगा। इन वृक्षों का पारिस्थितिकी और वनस्पति मूल्य भी लोगों को बताया जाएगा। ये वृक्ष क्यों लगाए गए थे, इनकी क्या महत्ता है, यह जानकारी भी दी जाएगी। पेड़ को नुकसान नहीं पहुंचाया जाए, इस बाबत भी चेतावनी दी जाएगी।

विभिन्न शासकों के समय में लगाए गए थे यह पेड़

छठी शताब्दी ईसा पूर्व अस्तित्व में आई दिल्ली में लोदी, खिलजी, तुगलक, ब्रिटिश आदि कई शासकों में राज किया। उन्होंने अनेक ऐतिहासिक इमारतों के साथ-साथ मंदिरों और मस्जिदों का निर्माण कराया। इनके चलते जामुन, पिलखन, शहतूत, कदम्ब आदि दिल्ली के बहुत से देशी पेड़ों को काटा भी गया। आज जो बचे हुए पेड़ हैं, वह तेजी से शहरीकरण के चलते खत्म नहीं हो जाए, इसीलिए सरकार उनका संरक्षण कर रही है।

ऐसे किया गया चयन

आस्ट्रेलिया के कुछ पर्यावरण वैज्ञानिक सन 2012 में दिल्ली आए थे और यहां कई महीने रुके थे। इसी दौरान उन्होंने बहुत से पेड़ लगाए और उनकी एक सूची बनाई। दिल्ली के पर्यावरण विभाग ने इसी सूची में से इन 18 पेड़ों को शॉर्टलिस्ट किया है। पर्यावरणविद प्रदीप कृष्णन ने भी इस काम में खासा योगदान दिया है। दिल्ली सरकार ने पर्यावरण प्रेमियों और विशेषज्ञों से सुझाव भी मांगे हैं तथा ऐसे विरासत वृक्षों के बारे में जानकारी देने को कहा है, जिन्हें सूची में जोड़ा जा सके।

एनएसडी का बड़ अर्थात बरगद कलाकारों के संघर्ष का साथी

राष्ट्रीय नाटय विद्यालय में स्थित बड़ का पेड अपने आप में बहुत सी यादें समेटे है। इसी पेड़ के नीचे विभिन्न रंगकर्मी और फिल्म कलाकार घंटों बैठे रहा करते थे। कभी साथियों के साथ सुख-दुख बांटते तो कभी भविष्य के सपने बुनते। इन कलाकारों में आशीष विद्यार्थी, नसीरूददीन शाह, ओमपुरी, नवाजुददीन सिदिदकी इत्यादि के नाम खासतौर पर उल्लेखनीय हैं।

और भी असंख्य पेड़ मिल जाएंगे ऐतिहासिक महत्व वाले

दिल्ली सरकार ने 12 प्रजातियों के 18 पेड़ों को हैरीटेज ट्री घोषित किया, यह वाकई काबिलेतारीफ है। लेकिन इनके महत्व से दिल्ली की जनता और यहां आने वाले पर्यटकों को रूबरू कराने के लिए भी प्रयास किए जाने चाहिए। इसके अलावा अगर सर्वे कराया जाए तो दिल्ली में और असंख्य पेड़ मिल जाएंगे जिनका ऐतिहासिक महत्व हो। यह भी सच है कि पेड बेजुबान भले होते हैं, लेकिन बावजूद इसके बहुत कुछ बयां करते प्रतीत होते हैं। जिस तरह किताबें इंसान की सच्ची दोस्त होती हैं, पेड़ों को भी सच्चा हमसफर कहा जा सकता है।

-फैयाज ए खुदसर, पर्यावरणविद

विरासत वृक्षों का ब्योरा

अरावली और एनसीआर की चुनिंदा प्रजातियों के ये पेड़ अपने आप में एक खास पहचान रखते है। कई जगहों की तो पहचान ही इन पेड़ों के बिना अधूरी सी लगती है –

1. एफआरआरओ दफ्तर भीकाजी कामा प्लेस का बरगद का पेड़

2. तुगलकाबाद के खंडहरों में शान से खड़ा ऐलान्थस का पेड़

3. लोधी गार्डन बड़ा गुंबद के उत्तर में स्थित मशहूर आम का विशाल पेड़

4. इंडिया गेट से 100 मीटर पर स्थित बरगद जो इंडिया गेट की पहचान का हिस्सा बबन चुका है

5. राजघाट संग्रहालय का अर्जुन का पेड़

6. राजघाट स्थित अशोक वृक्ष

7. तीन मूर्ति का विशाल नीम का पेड़

8. नेहरू पार्क का ऐलान्थस पेड़

9. नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा का बरगद का मशहूर पेड़।

10. कुतुब मस्जिद स्थित मशहूर स्लवाडोरा का पेड़

11. बर्मा मिशन में स्थित पीपल का पेड़ जिसके नीचे भगवान बुद्ध की प्रतिमा है

12. कटवारिया सराय सेंट्रल पार्क का बरगद

13. तीन मूर्ति के गार्डन में स्थित सेमाल का पेड़

14. कदम शरीफ मस्जिद स्थित नीम का पेड़

15. हौज खास डियर पार्क के पास स्थित पिलखन का पेड़

16. हौज खास आर्ट विलेज के पास स्थित इमली का पेड़

17. दादा बाड़ी जैन मुनि स्थित पीपल का पेड़

18. चिराग दिल्ली दरगाह का खिरनी का पेड़

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