खारी बावली में होती थी कभी खारे पानी की बावली
दी यंगिस्तान, नई दिल्ली।
baolis of delhi: अंग्रेजी के नामचीन कवि शेक्सपियर ने लिखा है कि नाम में क्या रखा है। पर वह बात अलग है कि नाम से ही बीते समय का रास्ता खुलता है जो कि आज को इतिहास में ले जाता है। पुरानी दिल्ली की खारी बावली की गली, भारत की ही नहीं बल्कि एशिया का सबसे बड़ा थोक किराना और मसाले का बाजार है।
जैसे कि नाम से ही पता चलता है कि यहां कभी खारे पानी की बावली होती थी। पर आज बस नाम ही नाम रह गया है, बावली समय के साथ गुम हो गई है।
पर्सी ब्राउन ने अपनी सुप्रसिद्ध पुस्तक “इंडियन आर्किटेक्चर” में लिखा है कि बावड़ी बनाने का सिलसिला हिंदुओं के शासन के कार्यकाल के दौरान शुरू हुआ। मुसलमानों के शासन के दौरान इसका और भी विकास हुआ।
ब्राउन का मानना है कि सार्वजनिक उपयोग के लिए बनाए गए कुंओं के साथ इन इमारतों को बनाने में जिस प्रकार की निर्माण कला का इस्तेमाल किया गया, उसका उदाहरण दुनिया के किसी और देश में देखने को नहीं मिलता।
ऐसा माना जाता है कि अफगान शासक शेरशाह सूरी के पुत्र इस्लाम शाह (सलीम शाह) के शासनकाल में ख्वाजा अब्दुल्ला लाजर कुरैशी ने खारी बावली कुंए की नींव रखी।
जो कि वर्ष 1551 में बन कर तैयार हुआ। अब इस बावली के भौतिक अवशेष तो नहीं बचे हैं पर सर सैयद अहमद खां की पुस्तक ‘आसारूस सनादीद’ (सन् 1864) और “मिफ्ता अल तवारीख” किताबों में इसका उल्लेख मिलता है।
इसी तरह, एक पालम बावली थी, जिसका नाम दिल्ली-हरियाणा के नाम का उल्लेख करने वाले अभिलेख की वजह से प्रचलन में है। 13 वीं के पालम गांव में एक सीढ़ीदार कुंए (बावली), जो कि अब नहीं है, से मिले संस्कृत अभिलेख में उल्लेख है कि ढिल्ली के एक व्यक्ति उद्वार ने सीढ़ीदार कुंए का निर्माण कराया था।

यह अभिलेख मुल्तान जिले (अब पाकिस्तान में) में उच्छ से आए उद्वार (नामक व्यापारी) द्वारा पालम में एक बावली और एक धर्मशाला के निर्माण की बात दर्ज करता है। गुलाम वंश के शासक बलबन के समय के पालम-बावली अभिलेख तिथि 1272 ईस्वी (विक्रम संवत् 1333) में लिखा है कि हरियाणा पर पहले तोमरों ने तथा बाद में चौहानों ने शासन किया।
अब यह शक शासकों के अधीन है। “जर्नल ऑफ़ दि एपिग्राफिक सोसाइटी ऑफ़ बंगाल” भाग 43 (वर्ष 1874 में प्रकाशित) के अनुसार, पालम बावली के अभिलेख में, जो गयासुद्दीन बलबन के शासन काल में लिखा गया था, नगर का नाम दिल्ली बताया गया है और जिस प्रदेश में यह स्थित है, उसे हरिनायक कहा गया है।
दिल्ली के सबसे पुराने शहर महरौली को तो बावड़ियों का शहर ही कहा जा सकता है। जहां की चार प्रमुख बावड़ियों में राजों की बैन, गंधक की बावली, कुतुबशाह की बावड़ी और औरंगजेब की बावड़ी हैं। इनमें से अब औरंगजेब की बावड़ी के प्रमाण नहीं मिलते।
आदित्य अवस्थी ने अपनी पुस्तक “नीली दिल्ली, प्यासी दिल्ली” में लिखा है कि यह बावड़ी बहादुरशाह द्वितीय के महल के पश्चिम में करीब 36 फीट की दूरी पर बनी हुई थी। यह बावड़ी जिस जमीन पर बनाई गई, उसे सरकारी जमीन के रूप में दर्ज किया गया था।

इस बावड़ी को औरंगजेब की बावड़ी का नाम देने का कारण यह बताया गया कि उसके औरंगजेब के शासन काल (1658-1707) के दौरान बनाए जाने के प्रमाण मिले हैं। इस बावड़ी को संरक्षित रखने की सिफारिश की गई थी। यह बावड़ी 130 फीट लंबी और 36 फीट चैड़ी थी। इस बावड़ी में पानी तक उतरने के लिए 74 सीढ़ियां बनाई गई थीं।
सरकारी दस्तावेजों में रायपुर खुर्द कहे जाने वाले इलाके में एक बावड़ी होने का हवाला मिलता है। अब यह कहां खो गई, फिलहाल इसका पता लगा पाना संभव नहीं है। इसे “बस्ती बावड़ी” के नाम से भी जाना जाता है। सैयद अहमद खान के अनुसार, यह बावड़ी वर्ष 1488 में बनाई गई थीं-यानी अब से करीब 531 साल पहले। यह बावड़ी दिल्ली पर लोदी शासन के दौरान बनाई गई एक महत्वपूर्ण इमारत मानी जा सकती है।
दिल्ली की ऐतिहासिक इमारतों के सर्वेक्षक मौलवी जफर हसन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि यह “बावड़ी फूटा गुबंद” कही जाने वाली इमारत के 250 गज दक्षिण में बनी हुई थी। यह बावड़ी 96 फीट लंबी और 263 फीट चैड़ाई में बनी हुई थी।
इस बावड़ी का पता इसमें बनी पांच मेहराबों वाली दालानों से चलता था। यह बस्ती सिकंदर लोदी के कार्यकाल के दौरान ख्वाजा सारा द्वारा बसाई गई मानी जाती है।
लेटेस्ट पोस्ट
- Delhi SIR 2026 प्रक्रिया पर कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने उठाए गंभीर सवाल, बोले- बीएलए पर जिम्मेदारी थोपकर अपना पल्ला झाड़ रहा है चुनाव आयोग?
- क्या New Mercedes-Benz GLS Facelift है असली ‘EV Killer’? जानिए Price, Features और वो सब कुछ जो इसे बनाता है सड़कों का राजा!
- MG Hector और Comet EV खरीदने वालों को बड़ा झटका! 1 अप्रैल से बढ़ रहे हैं दाम; जानें अब कितनी ढीली होगी जेब?
- Volkswagen ID Polo EV Big Reveal: क्या यह Tata-Mahindra की छुट्टी कर देगी? Price, Range और Features की Exclusive जानकारी लीक!
- Mahindra Thar 3-Door Facelift: क्या यह New Thar Roxx को भी पीछे छोड़ देगी? जानें Price और Features






