दिल्ली में राजघाट समाधि के अतिरिक्त दिल्ली में गांधीजी के पांच-छह और स्मारक हैं, जिनका विवरण इस प्रकार है :

(1) गांधी स्मारक संग्रहालय तथा पुस्तकालय : इसकी शुरूआत गांधीजी के निधन के तीन वर्ष पश्चात कोटा हाउस के निकट की चंद बैरकों में हुई थी। बाद में यह मानसिंह रोड पर ले जाया गया। वर्तमान संग्रहालय का भवन राजघाट समाधि के निकट दिल्ली दरवाजे से आने वाली सड़क पर रिंग रोड पर स्थित है, जो 1951 में बनकर तैयार हुआ। भवन की इमारत दोमंजिला है, जिसके चार कक्ष हैं और बीच में 50 फुट x 36 फुट का भवन है। प्रवेश द्वार में घुसकर बाएं हाथ वाले कक्ष में पुस्तकालय और वाचनालय है, जिसमें दस हजार पुस्तकों का संग्रह किया जा चुका है। दाएं कक्ष में गांधीजी की रचनात्मक प्रवृत्तियों का प्रदर्शन है।

ऊपर के दोनों कक्षों में से एक में संग्रहालय है, जिसमें गांधीजी के अंतिम समय के कपड़े और अन्य सामग्री रखी गई है। गांधीजी की जीवन कथा के 201 चित्रों की एक गैलरी भी है, जिसमें उनकी वाल्य अवस्था से लेकर उनके अंतिम समय तक का चित्र-दर्शन है, दूसरे भाग में आडीटोरियम है, जहां गांधीजी की जीवन कथा के चलचित्र दिखाए जाते हैं। संग्रहालय की इमारत धौलपुर के सफेद पत्थर की बनी है। अंदर की ओर संगमरमर लगाया है। इस पर दस लाख रुपये की लागत आई है। संग्रहालय का प्रबंध एक कमेटी द्वारा किया जाता है।

(2) हरिजन निवास : यह किंग्सवे रोड पर ढाका गांव के पास हरिजन कार्य का मुख्यालय है, जिसका शिलान्यास 2 जनवरी 1935 को गांधीजी ने किया था। पहले तो गांधीजी के ठहरने के लिए यहां एक दोमंजिला मकान बनाया गया था। धीरे-धीरे इसमें इमारतें बननी शुरू हुईं। हरिजन निवास तथा उद्योगशाला एवं अतिथि भवन और कार्यालय की इमारत बनाई गई। महादेव भाई के स्मारक में भी एक मकान बनाया गया और बीच के बगीचे में एक लाल पत्थर का ऊंचा स्तंभ खड़ा किया गया, जिस पर गीता के श्लोक अंकित हैं। गांधीजी कितनी ही बार इस निवास में ठहरे थे। लेखक की माता की स्मृति में जो प्रार्थना मंदिर बना हुआ है, उसका शिलान्यास और उद्घाटन गांधीजी के कर-कमलों द्वारा ही हुआ था।

(3) गांधी मैदान : चांदनी चौक फव्वारे के पास, जो कंपनी बाग का भाग है, वह गांधी मैदान के नाम से पुकारा जाता है। पहले यह खेल कूद का मैदान था, घास लगी हुई थी और उसमें क्रिकेट मैच हुआ करते थे। मार्च 1932 में जब गांधी इर्विन समझौता हुआ तो 6 मार्च को गांधीजी ने इस मैदान में कई लाख की जनसंख्या के सामने भाषण दिया था। उन दिनों की आबादी के लिहाज से उतनी बड़ी मीटिंग पहले कभी नहीं हुई थी। तभी से इस मैदान का नाम गांधी मैदान पड़ गया।

(4) गांधीजी की मूर्ति : दिल्ली में रेलवे के बड़े स्टेशन की तरफ का जो कंपनी बाग का हिस्सा है, उसके एक कक्ष में, जो पार्क की शक्ल में है, गांधीजी की कांस्य धातु की साढ़े सात फुट लंबी एक मूर्ति 21 फुट ऊंचे संगमरमर के चबूतरे पर लगाई गई है, जिसके चौगिर्दा पांच फव्वारे लगे हैं।

(5) बापू समाज सेवा केंद्र : रीडिंग रोड की हरिजन कालोनी के नजदीक ही, जहां गांधीजी ठहरा करते थे, पंचकुइयां रोड पर उनके निधन के पश्चात राजकुमारी अमृत कौर के प्रयास से फोर्ड फाउंडेशन ने भारत सरकार को राष्ट्रपिता की स्मृति में चार लाख रुपये का अनुदान देकर अप्रैल 1954 में बापू समाज सेवा केंद्र का निर्माण करवाया। केंद्र में एक बालवाड़ी, एक प्राथमिक पाठशाला, प्रौढ़ शिक्षा विभाग, पुस्तकालय एवं वाचनालय, बाल क्लब, युवक क्लब, औषधालय आदि हैं। इसका संचालन नई दिल्ली म्युनिसिपल कमेटी द्वारा किया जाता है। इमारत में एक बहुत बड़ा हाल है, जिसके दोनों बाजू बालकनी है। सामने ऊंचा प्लेटफार्म है। हाल के साथ ही अन्य कितने ही कमरे और स्थान हैं, जिनमें विभिन्न गतिविधियां चलती हैं।

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