गाजियाबाद में एनएच-9 पर बीटेक छात्रा से मोबाइल लूटने का आरोप जीतेंद्र पुलिस एनकाउंटर में मारा गया। लेकिन कीर्ति के मां-बाप की तो पूरी दुनिया ही उजड गई। कुछ दिन पहले की ही बात है, नोएडा से लाल कुआं के लिए ऑटो पकडा। अभी ऑटो में बैठकर मोबाइल निकाला ही था कि ड्राइवर बोल पडा। सर, मोबाइल पॉकेट में रख लीजिए।

मैंने पूछा, क्यों भाई

चालक बोला- सर यहां बाइक पर लडके आते हैं और झपटमारी करते हैं

मैंने उसकी बात मान ली……….

सच्चाई तो यही है कि नोएडा, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा में पुलिस व्यवस्था में अभी बहुत सुधार की दरकार है। पुलिस यहां सिर्फ वैन लेकर खडी दिखती है, तत्पर नहीं। कभी दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे पर सफर करिए। जगह जगह यूपी  ट्रैफिक पुलिस के जवान दिखते हैं। अच्छी बात है, दिखना भी चाहिए।

लेकिन सीसीटीवी कैमरे लगे स्थानों पर तैनात ये जवान सिर्फ और सिर्फ यह ध्यान देते हैं कि कोई बाइक वाला हाइवे में तो प्रवेश नहीं कर रहा। समझ नहीं आता कि सीसीटीवी कैमरे क्यों लगे हैं। सितम तो यह कि यूपी गेट समेत अन्य जगहों पर जिस जगह पुलिस तैनात रहती है, वहीं आसपास ऑटो, ई रिक्शा वाले स्टैंड बना चुके हैं। पुलिस की एकाग्रता ऐसी कि वो दायें-बायें देखते भी नहीं। भले ही सुबह-शाम लोग घंटों जाम में फंसे रहे।

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