यह राजनीतिक किस्सा तब का है जब कुलदीप नैयर, पंडित जवाहर लाल नेहरू (jawaharlal nehru) के सूचना अधिकारी थे। उन्होने लिखा है कि 1963 में वो सूचना अधिकारी के रूप में कार्य कर रहे थे। एक दिन कार्यालय आए तो देखा कि शास्त्री जी (जो तब सरकार में नहीं थे) नेहरू से मिलने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे थेे।

कुलदीप ने नेहरू के निजी सचिव एन. के. अय्यर शेषन से शिकायत की कि शास्त्री पिछले एक घंटे से बैठे हुए थे। शेषन उन्हें एक तरफ ले जाकर बोले कि वे दो बार ऊपर चिट भेज चुके थे, जहां नेहरू अपने शयनकक्ष में मौजूद थे। “अगर वे उन्हें नहीं बुला रहे हैं तो आप ही बताएँ कि मैं क्या कर सकता हूँ?” शेषन ने अपनी विवशता प्रकट करते हुए मुझे ‘उनकी राजनीति में न उलझने की सलाह दी।

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