देशभर के पुलिस बल में महिला कर्मियों की संख्या केवल 11.75 प्रतिशत

भारत दुनिया का एकमात्र देश है जहां महिलाओं के नाम के साथ ‘देवी’ शब्द जुड़ा हुआ है। नारी शक्ति स्वरूपा है। भारतीय संस्कृति की संवाहक है। जीवन मूल्यों की संरक्षक है। त्याग, दया, क्षमा, प्रेम, वीरता और बलिदान का प्रतीक और गृहलक्ष्मी है। लेकिन कालांतर में इन धारणाओं में परिवर्तन परिलक्षित होने लगा। जिसका असर यह हुआ कि समाज में स्त्री की स्थिति कमजोर होती गई। वह अशिक्षा, लैंगिक भेदभाव, कुप्रथाओं और पुरुषवादी सोच के कारण घर की दहलीज तक सीमित होकर रह गई। अब जबकि देश आजादी के अमृत महोत्सव का जश्न मनाकर अमृतकाल में प्रस्थान कर चुका है तो समय आ गया है कि पुलिस बल में आधी आबादी की हिस्सेदारी बढाने पर गंभीरता से प्रयास किए जाए।  

भारतीय महिलाओं का देश के भीतर सुरक्षा की पहली पंक्ति अर्थात पुलिस बल में प्रवेश आजादी से 9 वर्ष पूर्व 1938 में शुरू हुआ, परंतु कई दशक बीत जाने के बाद भी आजतक इस क्षेत्र में महिलाओं की संख्या में अपेक्षाकृत बढ़ोतरी नहीं हुई है। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में 48.46 फीसदी जनसंख्या महिलाओं की है परन्तु पुलिस बल में इनका प्रतिनिधित्व लगभग 11.75 ही है। हाल ही में जारी केंद्र सरकार के आंकडों के मुताबिक केवल 8 राज्य एवं केंद्रशासित संघ में डीजीपी या स्पेशल डीजीपी पद पर महिला अधिकारी तैनात है।

सरकारों की सचेतता, आरक्षण व अन्य प्रावधानों के माध्यम से महिलाओं की भागीदारी को सुनिश्चित करने कि कोशिश की जा रही है, बावजूद इसके पुलिस बल में महिलाओं की उपस्थिति अन्य कार्यों जैसे अध्यापन, नर्सिंग आदि से काफी कम है। वर्तमान में पुलिस बल में महिलाओं की संख्या कम है, और उनमें भी अधिकतर कांस्टेबल जैसे निम्नतम पद पर है, और केवल बहुत कम संख्या में महिला कर्मी ही उच्च पदों तक तक पहुंच पाई है,इसके पीछे क्या मुख्य कारण है ये अपने आप में सोचने का विषय है।

केंद्र सरकार ने राज्यसभा में बताया है कि संविधान की सातवीं अनुसूची (राज्य सूची) के तहत कानून राज्य का विषय है। पुलिस में जेंडर संतुलन सहित अधिक महिलाकर्मियों की भर्ती करने की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है। केंद्र पुलिस बलों में महिलाओं की संख्या बढाने के लिए राज्यों को एडवाइजरी जारी करता है। गृह मंत्रालय ने पुलिस बल में महिला प्रतिनिधित्व बढाकर 33 प्रतिशत करने के लिए सभी राज्य सरकारों को 2013, 2015, 2019, 2021 और 13 अप्रैल 2022 को एडवाइजरी जारी की थी। केंद्र ने राज्यों से अनुरोध किया कि कम से कम प्रत्येक पुलिस स्टेशन में 3 महिला उप-निरीक्षक और 10 महिला पुलिस कांस्टेबल होनी चाहिए, ताकि महिला हेल्प हेस्क 24 घंटे काम कर सकें। इतना ही नहीं स्थानीय प्रशासनों से कांस्टेबलों/उपनिरीक्षकों के रिक्त पदों को परिवर्तित करके महिला कांस्टेबलों/उपनिरीक्षकों के अतिरिक्त पद सृजन करने की भी सलाह दी। हालांकि हालात धीरे-धीरे बदल रहे हैं।

भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में महिला डीजीपी का नहीं होना चिंताजनक है। दिल्ली, गुजरात, कनार्टक, महाराष्ट्र सरीखे राज्यों में महिला डीजीपी नहीं हैं। एडिशनल डीजीपी पद पर महिलाओं की नियुक्ति की स्थिति भी बहुत प्रशंसनीय नहीं है। देशभर में केवल 37 महिला एडिशनल डीजीपी नियुक्त है। तेलंगाना में सबसे अधिक 6 एडिशनल डीजीपी तैनात है, जबकि यूपी-मध्यप्रदेश में इनकी संख्या 3-3 है। इसी तरह देशभर में केवल 31 महला आईजीपी तैनात है। डीआईजी 54, एसपी/एसएसपी 368, एडिशनल एसपी 269, डिप्टी एसपी 908 हैं। इंस्पेक्टर 3680, सब इंस्पेक्टर 13146 जबकि महिला एएसआई 6052 हैं। देशभर में पुलिस बल में महिला हेडकांस्टेबलों की संख्या 20669, कांस्टेबल 180685 समेत अन्य पदों पर 20,669 महिलाकर्मी तैनात है। राज्यों में उत्तर प्रदेश की स्थिति पूर्व के मुकाबले सुधरी है। यूपी में देश के अन्य राज्यों के मुकाबले सर्वाधिक महिला पुलिसकर्मी तैनात है। यूपी पुलिस में कुल 33,425 महिलाएं हैं। यूपी के बाद तमिलनाडू में 22,547, महाराष्ट्र में 30,432, बिहार में 19,790, गुजरात में 14681 महिलाएं पुलिस बल में हैं। यदि पूर्व के वर्षों से तुलना करें तो 2021 तक भारत में पुलिस बल में 2,17,026 महिला पुलिसकर्मी कार्यरत थी। 2022 में यह संख्या बढकर 2,46,103 तक पहुंच गई है। हालांकि अभी भी देश के पुलिस बल में महिला कर्मियों की 33 प्रतिशत नियुक्ति का सपना अधूरा है। अभी पुलिसबल में 11.75 महिलाएं कार्यरत हैं।

योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में देश के सबसे बडे राज्य यूपी में बदलाव की बयार बह रही है। खुद मुख्यमंत्री ने कहा है कि 2017 तक यूपी पुलिस में महिला कर्मियों की संख्या महज 10 हजार थी। जबकि इस समय करीब 40 हजार है। महज 6 वर्षों में यह संख्या चार गुना बढ गई। यह एक सराहनीय पहल है। यूपी सरकार ने सभी 1518 थानों में 10,417 महिला पुलिस बीट का गठन किया है। जिसमें 15,130 से अधिक महिला बीट पुलिसकर्मियों की नियुक्ति की गई है। थानों में हेल्प डेस्क बनाया गया है। जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। हेल्प डेस्क ने बहुत कम समय में अपनी उपयोगिता साबित की है। हेल्प डेस्क की स्थापना के बाद से 10,20,426 शिकायतें मिली। इनमें से 910362 शिकायतों का निस्तारण भी किया जा चुका है। अब जबकि हम आजादी के सौ वर्ष के सफर पर निकल चुके हैं तो जरूरी है कि महिला भागीदारी बढाई जाए। पुलिस बल में महिला कर्मियों की अधिक संख्या महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर नकेल कसने में मददगार साबित होगी। महिलाओं के प्रति अपराध के मामलों की जांच में भी सहुलियत होगी। पुलिस बल में महिला कर्मियों और अधिकारियों की संख्या बढाने के लिए विशेष नियुक्ति अभियान चलाना होगा। जब तक प्रत्येक सेक्टर में महिलाओं को पुरूषों के बराबर अधिकार नहीं मिलेंगे तब तक विकसित भारत का सपना पूरा होना मुश्किल है।

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