सोशल मीडिया पर वीडियो देख बोले लोग, दिल्ली मेट्रो को भी सीखना चाहिए
दी यंगिस्तान, नई दिल्ली।
viral video: भारत की राजधानी दिल्ली में मेट्रो सेवाएं रोज़ लाखों यात्रियों का सहारा हैं, लेकिन भीड़भाड़ की समस्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। ऐसे में एक वायरल वीडियो ने एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है – क्या दिल्ली मेट्रो को जापान रेलवे की तकनीक अपनानी चाहिए?
यह वायरल वीडियो ट्विटर यूजर @gunsnrosesgirl3 द्वारा साझा किया गया था, जिसमें जापान रेलवे के कर्मचारी, जिन्हें ‘ओशिया‘ या ‘पुशर्स‘ कहा जाता है, यात्रियों को सावधानीपूर्वक ट्रेन में धकेलते हुए दिखते हैं ताकि ट्रेन के दरवाजे सही तरीके से बंद हो सकें और समय पर रवाना हो।
जापान में यह तरीका दशकों से उपयोग में है, खासतौर पर टोक्यो जैसे शहरों में, जहां ट्रेनें अपनी क्षमता से कहीं अधिक यात्रियों को ढोती हैं – कभी-कभी 200% तक अधिक। यह दृश्य पहली बार देखने पर अजीब लग सकता है, लेकिन जापान की अनुशासनप्रिय संस्कृति इसे प्रभावी बनाती है।
दिल्ली मेट्रो में भी कुछ स्टेशन, जैसे हौज खास, पर रश आवर्स के दौरान अत्यधिक भीड़ देखी जाती है। 3 मार्च 2025 की टाइम्स ऑफ इंडिया रिपोर्ट के अनुसार, इन स्टेशनों पर कभी-कभी ‘स्टैम्पेड जैसी स्थिति‘ बनने का खतरा रहता है। यात्रियों ने DMRC से ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी बढ़ाने और अधिक प्रबंधन कर्मचारियों की मांग की है।

क्या दिल्ली मेट्रो जापान से कुछ सीख सकती है?
कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि ‘ओशिया मॉडल’ दिल्ली में लागू करना चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन असंभव नहीं।
सुषमा जो रोज़ाना मेट्रो से यात्रा करती हैं, कहती हैं, “यहां पहले से ही धक्का-मुक्की है। अगर कर्मचारी भी धक्का देने लगें, तो शायद और अराजकता हो जाए।”
दूसरी ओर, कुछ लोगों का मानना है कि अगर इसे सख्त प्रशिक्षण और तकनीकी निगरानी के साथ लागू किया जाए, तो यह दिल्ली की भीड़ को संभालने में कारगर हो सकता है।
यह भी पढ़ें-
- Hyundai ने बढ़ाए दाम — Creta खरीदनी है तो अभी करो या मई तक रुको? Expert की राय
- 20 अप्रैल को आ रही है MG Majestor — Fortuner का राज खत्म? कीमत, साइज़ और features का पूरा सच
- दिल्ली की सड़कों में छिपा है ‘Global History’ का राज, क्या आपने कभी olof palme marg का बोर्ड गौर से देखा?
- दिल्ली पंचायत संघ ने उठाई गांव जहां तक, मालिकाना हक वहां तक की मांग
- दिल्ली भाजपा अध्यक्ष के पिताश्री श्याम लाल सचदेवा का शरीर पंचतत्व में विलीन






