दिल्ली
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1857 की क्रांति: अंग्रेजों को जीत का नहीं था भरोसा, भागने के लिए तैयार...
जंग से ठीक पहले अंग्रेज अफसर राबर्ट टेलर ने बीबी से किया यह वादा
1857 की क्रांति: 14 सितंबर के बाद हालात बेकाबू थे।...
1857 की क्रांति: मिर्जा गालिब ने ऐसा क्या कहा कि हंसने लगा अंग्रेज कर्नल
1857 की क्रांति: सितंबर महीने में अंग्रेजों ने दिल्ली पर दोबारा कब्जा कर लिया। बादशाह बहादुर शाह जफर को कैद कर लिया गया। उनपर...
भांड ने ऐसा क्या किया कि फांसी का आदेश देकर पलट गए बहादुरशाह प्रथम
एक दफा कुछ सिपाही किसी नक्काल को पकड़कर बहादुरशाह प्रथम के सामने लाए। बहादुरशाह ने उसकी घृणित शक्ल देखकर हुक्म दिया, "ले जाओ इसको...
1857 की क्रांति: हुसैन आजाद ने जान जोखिम में डाल बचाई जौक की गजलों...
अंग्रेजों के दिल्ली पर कब्जे के बाद दिल्ली में बरपा कहर
1857 की क्रांति: अंग्रेजों ने 17 सितंबर को दिल्ली पर आंशिक रूप से...
दिल्ली 6 में रोधग्राम गली के बावर्चियों की बात ही निराली है
मुगलई जायका पकाने में माहिर हैं बावर्ची
दिल्ली छह (delhi 6) की गलियों में कुछ रवायतें ऐसी हैं जो पीढ़ी दर पीढ़ी बदस्तूर चली आ...
1857 की क्रांति: अंग्रेजी फौज के कत्लेआम की आंखों देखी दास्तान
1857 की क्रांति: विलियम डेलरिंपल अपनी किताब आखिरी मुगल में लिखते हैं कि पत्रकार जहीर देहलवी की तरह ही सरवरुलमुल्क के खानदान ने भी...
मुगल काल की दिल्ली : मकबरा खानखाना (1626 ई.)
फाहिम के मकबरे के पास ही उस सड़क की दाहिनी ओर जो हुमायूँ के मकबरे से बारह पुले को जाती है, और निजामुद्दीन-मथुरा रोड...
मुगल काल की दिल्ली : मकबरा फहीम खां वा नीला बुर्ज (1624 ई.)
हुमायूं के मकबरे की पूर्वी दीवार के बाहर एक टूटा-फूटा नीला गुंबद खड़ा है, जिसे हज्जाम का गुंबद भी कहते हैं। संभवतः यह खानखाना...
दिल्ली की शादियों में आज भी गाए जाते हैं ये लोकगीत (पार्ट-़1)
दिल्ली में शादी-ब्याह के अवसर पर सुहाग-घोड़ी गाने का रिवाज बहुत पुराना है। इन गीतों को शादियाने भी कहा जाता है। निम्न कुछ सुहाग,...
दास्तानगाेई…अलिफ लैला की कहानियां
पुराने जमाने में दास्तानों के सबसे अधिक लोकप्रिय संग्रह थे- 'दास्तान-ए-अमीर हम्जा' जो सबसे पहले मुहम्मद तुग़लक के काल में अमीर खुसरो ने फ़ारसी...














