लाल किले की डायरी में दर्ज है कई रहस्योद्घाटन  

बुढ़ापे में बहादुर शाह जफर Bahadur shah Zafar के सामने एक बड़ी चुनौती अपनी विभिन्न रानियों और रखैलों के आपस के झगड़े निबटाना था और यह कि वह किस हद तक हमेशा जवान मर्दों से साजबाज करती थीं। यह उलझनें इस 1852 की शादी में पूरे वक्त अंदरूनी सतह पर उभरती रहीं।

पंद्रह साल पहले जब ज़फर 1837 में तख्तनशीन हुए थे तो उनकी मलिका-ए-खास ताज महल बेगम taj mahal थीं जो एक आम दरबारी संगीतकार की बहुत खूबसूरत बेटी थीं। तख्तनशीनी के वक़्त सारे जश्न उन्हीं की निगरानी में हुए थे।” लेकिन उनका यह मुकाम ज़्यादा दिन कायम नहीं रहा। सिर्फ तीन साल बाद ही ज़फ़र के सामने उन्नीस साला अमीरजादी जीनत महल को पेश किया गया। जफर उस वक्त चौंसठ साल के थे। चंद महीने के अंदर ही उनकी शादी हो गई और वह ताज बेगम को हटाकर खुद हरम की मल्लिका की जगह पर काबिज़ हो गईं।

और फिर जीनत महल Jeenat mahal जफर के इंतकाल के वक्त तक उनकी चहेती बीवी रहीं। लेकिन इसके बावजूद सत्तर वर्षीय जफर चार और शादियां करने से न रुके। और वह भी निचले तबके की लड़कियों से। साथ ही उनकी कई रखैलें भी थीं। 1853 में कम से कम पांच ऐसी औरतें थीं, जो उनकी ख्वाबगाह की खिदमत अंजाम देती थीं क्योंकि उस साल जुलाई में ज़फ़र ने पांच जोड़ी चांदी के पलंगों के पाए बनवाए थे।” ज़फ़र के हरम में हर वक्त खूब रौनक रहती थी और यह गहमागहमी उनके अस्सी साल के होने तक भी रही। ज़फ़र के सोलह बेटे और इक्तीस बेटियां हुई। उनका आखरी बेटा मिर्ज़ा शाह अब्बास था, जिसकी पैदाइश के वक्त जफर पूरे सत्तर साल के थे।

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