दिल्ली

Home दिल्ली Page 31
इस सेक्शन में पढें Delhi,new delhi,Delhi History,delhi university,jac delhi,capital of delhi,iit delhi mtech,laxhmi nagar,dhula kuan,delhi aiims,sadar bazar delhi,pincode of delhi, delhi chor bazar,delhi news, delhi news in hindi, delhi news hindi, latest delhi news, दिल्ली न्यूज़, दिल्ली समाचार, दिल्ली की खबरें,

मिर्जा गालिब और आम

0
मिर्जा गालिब अक्सर शाम के समय आम का लुत्फ उठाते थे। उन्हें आम बहुत पसंद थे, खासकर छोटे-छोटे नफीस और मीठे चौसा आम। एक...

दिल्ली में दिन के इस समय सजती थी महफिलें

0
मुगलिया दौर में दिल्ली की रौनक शाम को पांच बजे के बाद फिर से शुरू हो जाती। सबसे पहले भिश्ती निकलते जो अपनी चमड़े...

अपनी मौत से ठीक पहले इस अंग्रेज अफसर ने की थी जफर के बड़े...

0
दिल्ली के रेजिडेंट सर थॉमस मैटकॉफ के लिए जो रोज़ाना दरबार की डायरी तैयार की जाती थी उसमें दर्ज है कि आखरी रात को...

पुरानी दिल्ली की हवेलिया सुनाती हैं इतिहास की कहानियां Old Delhi Haveli

0
पुरानी दिल्ली (Purani delhi) के हवेलियों की दरो दीवारें कहानियां सुुनाती हैं। कहानियां जो ताजा कर देती हैं उन पुराने दिनों की यादें जब...

दिल्ली: एशियाड से लेकर गणेश मूर्ति के दूध पीने तक

0
1982 एशियाड खेलों के लिए शहर में बनाए गए तीन बड़े स्टेडियम दी यंगिस्तान, नई दिल्ली। केन्द्रीय सरकार में हो या राज्य सरकार में, अस्थिरता और...

दिल्ली की वो बावली जिसने बादशाह के गुरूर को तोड़ दिया

0
दिल्ली की बावलियों का इतिहास हजरत निज़ामुद्दीन औलिया की दरगाह के अहाते के उत्तरी दरवाजे पर एक और बड़ी बावली है, जिसे पीर-मुरशिद के अनुयायी...

बहादुर शाह जफर को नीचा क्यों दिखाता था थॉमस मैटकॉफ, जफर ने लिखी यह...

0
जफर की रचना में झलकता है उनका दर्द ब्रिटिश रेज़िडेंट सर थॉमस मैटकाफ (Sir Thomas Metcalfe) शुरू में गवर्नर जनरल के प्रतिनिधि की हैसियत से...

इस तरह जवान बने रहते थे राजा महाराजा, ये खाते थे

0
हकीम अजमल खां...मरीज को देखकर ही इलाज बता देते थे हकीम अजमल खां की गिनती दिल्ली के श्रेष्ठ हकीमों में हमेशा रहेगी। उनकी याद अभी...

दिल्ली का बारहमासा लोकगीत

0
हमसे वाट्सएप से जुड़िए https://whatsapp.com/channel/0029VaNLx3XCRs1fvrDml50o बरसात के मौसम में बारहमासे गाए जाने का भी रिवाज रहा है- कहूं किससे दिल का हाल, बीत गया साल मेरे दिलदार ने...

कभी कृष्ण की कहानी सुनाने वाले भगतबाजों को अंग्रेजों ने अश्लील नाटक के मंचन...

0
हिन्दुतान ने अपने संस्कृत नाटकों की शानदार विरासत को मुसलमानों के काल में खो दिया। 1719-19 ई. में एक हिन्दी कवि 'नवाज' ने फ़र्रुखसियर...

Don't Miss