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1857 की क्रांति: तोप से दीवार में सुराख बनाकर दिल्ली में दाखिल हुए अंग्रेज,...

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20 फुट गहरी खाई पार करनी थी चुनौती 1857 की क्रांति: अंग्रेजों ने दिल्ली पर हमला बिल्कुल वैसे ही किया जैसे योजना बनाई गई थी।...

1857 की क्रांति: अंग्रेजी फौज के कत्लेआम की आंखों देखी दास्तान

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1857 की क्रांति: विलियम डेलरिंपल अपनी किताब आखिरी मुगल में लिखते हैं कि पत्रकार जहीर देहलवी की तरह ही सरवरुलमुल्क के खानदान ने भी...

1857 की क्रांति: ब्रिटिश अफसर के साथ हाथ में सलाखें लिए क्यों घूमता था...

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1857 की क्रांति: अंग्रेजों ने दिल्ली पर दोबारा कब्जा कर लिया। हर तरफ कत्लेआम मचा हुआ था। इस दौरान हुकूमत के वसूली एजेंट भी...

Chawri Bazar story: चावड़ी बाजार में आंखें नीचे झुकाकर क्यों गुजरते थे लोग

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चावड़ी बाजार, जीबी रोड से गुजरते हुए सकुचाते थे दिल्लीवाले दी यंगिस्तान, नई दिल्ली। Chawri Bazar story: यदि आबादी के लिहाज से देखें तो मोटे...

1857 की क्रांति: अंग्रेजी कमांडर ने क्यों लिखा दिल्ली पर हमला करने से किया...

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1857 की क्रांति: नवनियुक्त कमांड जनरल विल्सन ने 18 जुलाई को उसने लाहौर में सर जॉन लॉरेंस को एक बहुत परेशानी भरा खत लिखा।...

जब इंदिरा गांधी की एक झलक पाने के लिए सड़कों किनारे उमड़ा हुजूम

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उपचुनाव में जीत के बाद इंदिरा गांधी को किया गया गिरफ्तार दी यंगिस्तान, नई दिल्ली। देश की राजनीति में इंदिरा गांधी का एक मुकाम...
second world war

दूसरे विश्वयुद्ध के समय कैसा था दिल्ली का ‘माहौल’….

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कोयले से लेकर चीनी के बढ गए थे दाम, आटा खरीदने के लिए करनी पड़ती थी मशक्कत दूसरा विश्वयुद्ध (second world war) 1939 से...

1857 की क्रांति: दुश्मन जितना नजदीक होगा, उतनी जल्दी इंतकाम लेंगे

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1857 की क्रांति: अंग्रेज चार टुकडियों में शहर में दाखिल हुए। तीसरी टुकड़ी के सिपाही कुदसिया बाग में गोलियों की बौछार से बचे हुए...

1857 की क्रांति: झज्जर के नवाब के आखिरी शब्द थे- मेरे अपने काम ने...

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1857 की क्रांति: दिल्ली पर दोबारा कब्जे के बाद अंग्रेजों ने तटस्थता को भी अपराध माना और एक-एक करके बहादुर शाह जफर के दरबार...

1857 की क्रांति: मटर के सूप की तरह हो गया था यमुना का पानी

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 दिल्ली शहर के बाहर बदतर थे हालात 1857 की क्रांति: शहर के अंदर दिल्लीवालों के विपरीत अंग्रेजों के पास खाने-पीने की चीजों की कोई कमी...

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