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मुस्लिम काल की दिल्ली (पठान काल): राजाओं की बावली और मस्जिद

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कुतुब साहब की लाट के करीब दक्षिण-पश्चिम में ऊधम खां के मकबरे के दक्षिण में एक आलीशान मकान है, जिसे सिकंदर लोदी के एक...

दिल्ली में पशु पक्षियों के खेल का इतिहास

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कभी युद्ध में जूझने वाले राजा इस तरह पशु-पक्षियों के खेल में हुए लीन अंग्रेज़ों द्वारा सत्ता प्राप्त करने से पहले मुग़ल बादशाह और दक्कन...

1857 की क्रांति : ब्रिटिश रेजिडेंसी के हेड मुंशी जीवनलाल ने क्या लिखा

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1857 की क्रांति का सूत्रपात हो चुका था। विद्रोही दिल्ली में दाखिल हो गए थे। उनके रास्ते में जो कोई भी आता वो हटाते...

मुस्लिम काल की दिल्ली (पठान काल):दरगाह हजरत रोशन चिराग दिल्ली

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शेख नासिरुद्दीन महमूद खानदान चिश्ती के दिल्ली के सबसे आखिरी बुजुर्ग थे। यह हजरत निजामी के सबसे बड़े खलीफाओं में से थे। यह बड़े...

चांदनी चौक के इस मंदिर की महिमा से डर गया औरंगजेब, बदलना पडा हुक्म

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चांदनी चौक के जैन लाल मंदिर का इतिहास लाल किले के लाहौरी दरवाजे के पास, लाजपत राय मार्केट के सामने, जैनियों का जो लाल मंदिर...

क्या होता था जब किसी शहर में रुकता था अकबर का काफिला

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सुल्तानों और मुग़लों के काल में आम लोगों का दिल्ली से बाहर का सफ़र नाममात्र का होता था। इसका सबसे बड़ा कारण सुविधाओं का...

1857 की क्रांति: इतना गोला-बारुद दिल्ली का चूरमा बनाने के लिए काफी है

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1857 की क्रांति: सितंबर को आठ मील लंबी घेराबंदी श्रृंखला के हाथी झूमते हुए ब्रिटिश कैंप में दाखिल हुए। वह साठ भारी हॉविट्जर और...

दिल्ली की इस दुकान पर चाप खाने पानीपत, लुधियाना से खींचे चले आते हैं...

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पटपड़गंज रोड शिवपुरी स्थित रमेश वैष्णो ढाबा (ramesh vaishno dhaba) 27 वर्षों से अपने स्वादिष्ट व लाजीज चाट के लिए मशहूर है। रमेश बतरा...

दिलशाद गार्डन में नहीं था कभी बड़ा गार्डन, बंगाली जुल्फें बनाने की फैक्ट्री थी...

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दिलशाद गार्डन (Dilshad garden) का नाम सुनते ही आंखों के सामने बाग-बगीचे की तस्वीर उभर आती है। लेकिन क्या आपको पता है कि यहां...

मुगल काल की दिल्ली : खिजरी दरवाजा

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मुसम्मन बुर्ज के नीचे चंद सीढ़ियां उतरकर दरिया के किनारे पहुंच जाते हैं। यह वही दरवाजा है, जिसको कप्तान डगलस 11 मई 1857 को...

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